शनिवार, 7 अगस्त 2021

प्रयागराज उत्तर प्रदेश भारत के पर्यटन स्थल के बारे में विस्तार सहित जानकारी

इलाहबाद (Allahabaad) को अब प्रयागराज (Paryaagraj) के नाम से जाना जाता है। हिन्दू धर्म में इस शहर का प्रमुख स्थान है। ऐतिहासिक इमारतों के साथ बहुत बड़ी संख्या में, धार्मिक स्थल भी देखने को मिलते है। प्रयागराज उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहरों में से एक है। गंगा, यमुना और सरस्वती का संगम इसी शहर में देखने को मिलता है।  यहाँ का माहौल बहुत ज्यादा धार्मिक है। आइये आज हम बात करते है, प्रयागराज उत्तर प्रदेश भारत के पर्यटन स्थल (Paryaagraj Allahabaad Uttar Pradesh India Tourist Spot) के बारे में विस्तार सहित।  



त्रिवेणी संगम स्थल (Triveni Sangam Site)


पुरातन कथाओं के अनुसार इसी स्थान पर गंगा, यमुना और सरस्वती नदी का संगम हुआ था। जिसके बाद इसका नाम त्रिवेणी संगम स्थल पड़ गया। यहाँ पर सरस्वती नदी दिखाई नहीं देती है। मकर संक्रांति या कुम्भ के दिनों में बहुत ज्यादा भीड़ देखने को मिलती है। नाव में बैठकर भी इस स्थल पर पहुँचा जा सकता है। यहाँ पर होने वाली गंगा आरती दुनिया भर में प्रसिद्ध है।



प्रयागराज किला (Prayagraj Fort)


प्रयागराज किला ऐतिहासिक धरोहर है। इस किले का निर्माण मुग़ल बादशाह अकबर ने करवाया था। पुरातन विभाग के द्वारा इसका सही से ख्याल नहीं रखा गया। जिस के कारण खंडर में बदल गया है। इसके बहुत बड़े हिस्से को बंद कर दिया गया है। सैलानी कुछ हिस्से को ही देख सकते है। पाताल पूरी मंदिर और अक्षय वट को भी देखा जा सकता है।   



मनकामनेश्वर मंदिर (Mankameshwar Temple)


मनकामनेस्वर मंदिर हिन्दू भगवान शिव जी को समर्पित है। इस मंदिर में शिव लिंग स्थित है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस मंदिर में  मांगी गयी हर मनोकामना पूर्ण होती है। यह मंदिर प्रयाग राज किले के ठीक पीछे है। मंदिर के साथ में यमुना घाट भी स्थित है। लोग वहां पर स्नान कर सकते है। सारा दिन भक्तों कि भीड़ इस मंदिर में रहती है। 



हनुमान मंदिर (Hanuman's Temple)


इस हनुमान मंदिर में लेटी हुई, हनुमान जी की मूर्ति है। ऐसा लगता है कि मानो वह आराम कर रहे हो। यह मंदिर त्रिवेणी संगम स्थल के निकट है। उनकी मूर्ति को अच्छे से सजाया गया है। इस मंदिर का इतिहास बहुत पुराना है। यह मूर्ति जमीन से 6 या 7 फुट नीचे है। प्रतिदिन बहुत बड़ी संख्या में हनुमान भक्त मंदिर में दर्शन के लिए आते है। बारिश के दिनों में कई बार इस मंदिर के अंदर पानी भी प्रवेश कर जाता है।  



चंदरशेखर आजाद पार्क (Chandrashekhar Azad Park)


चंदर शेखर आजाद की अंग्रेजों के साथ इसी पार्क में मुठभेड़ हुई थी। उन्होंने कहा था मैं आजाद था, आजाद हूँ आजाद ही रहूँगा। इसी बात को पूरा करने के लिए आखिरी गोली खुद को मार कर शहीद हो गए। पार्क में कई तरह के पौधे, फूल और लाइब्रेरी देखने को मिलती है। बच्चों को इस स्थान पर जरूर ले कर आये। इस से उन्हें अपने इतिहास का पता चलता है। 



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आदि विमान मंडपम मंदिर (Adi Vimana Mandapam Temple)


आदि विमान मंडपम मंदिर एक तीन मंजिला मंदिर है। हिन्दू भगवान शिव जी को समर्पित है। मंदिर की तीसरी मंज़िल पर एक शिव लिंग में कई छोटे छोटे शिव लिंगों को बनाया गया है। सैलानियों को मंदिर में की गयी नक्काशी बहुत ज्यादा पसंद आती है। महाशिवरात्रि वाले दिन इस मंदिर में बहुत ज्यादा भीड़ देखने को मिलती है। इस मंदिर के साथ में एक बाजार भी है।



पातालपुरी मंदिर (Patalpuri Temple)


पातालपुरी मंदिर को जमीन के नीचे बनाया गया है। यह मंदिर प्रयागराज किले के अंदर स्थित है। हिन्दू देवी देवताओं की बहुत सारी मूर्तियां देखने को मिलती है। यह मंदिर यमुना नदी के किनारे पर बहुत ही सुन्दर बना हुआ है। एक सुरंग के रास्ते इस मंदिर में प्रवेश किया जाता है। फिर उसी सुरंग के दूसरे हिस्से से बाहर आया जाता है। कई लोगों का कहना है कि यहाँ के कुछ लोगों के द्वारा ज्यादा दान माँगा जाता है। याद रहे आप दान अपने सामर्थ्य के हिसाब से दे। 



अक्षय वट (Akshaywat Tempale)


अक्षय वट एक प्राचीन बरगद का वृक्ष है। विद्वानों के अनुसार इस पेड़ का सम्बन्ध तीनों युगों से है। यह भी प्रयागराज (Paryaagraj) किले में स्थित है। इस पेड़ के नीचे हिन्दू भगवान श्री कृष्ण की मूर्ति को स्थापित किया गया है। यह मूर्ति अत्यंत मनमोहक है। पेड़ ने निचले नीचे में संगमरमर का पत्थर लगा हुआ है। इस पेड़ को अमर कहा जाता है। लोग हर दिन यहाँ पर पूजा के लिए आते है।



समुद्रकूप स्थल (Samudra Koop Tirtha)


समुद्र कूप स्थल पर एक प्राचीन कुआँ स्थित है। इस कुंए की गहराई समुद्र तल के बराबर बताई जाती है । कुछ लोगों ने इसकी गहराई को मापने की कोशिश भी की लेकिन सफलता नहीं मिली। स्थानीय लोगों के अनुसार इस कुंए में पानी समुद्र से आता है। जिसकी वजह से इसका पानी ना कम ही हुआ और ना ही पानी में कोई बदलाव आया। कुम्भ मेले के दौरान बहुत बड़ी संख्या में लोग इस कुंए को देखने के लिए आते है। 



नागवासुकी मंदिर (Nagvasuki Temple)


नागवासुकी मंदिर दारागंज इलाके में स्थित है। यह एक प्राचीन नाग देवता को समर्पित मंदिर है। गंगा किनारे बने इस मंदिर में हर दिन बहुत बड़ी संख्या में भक्त दर्शन के लिए आते है। मंदिर के गर्भ गृह में स्थित नाग मूर्ति को 10 वी सदी का बताया जाता है। महाशिवरात्रि वाले दिन इस मंदिर में बहुत भीड़ देखने को मिलती है। भक्तों की सभी मनोकामना पूरी होती है।



स्वराज भवन संग्रहालय (Swaraj Bhawan)


स्वराज भवन भारत देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरु जी का पुश्तैनी घर है। इस भवन में उनके समय की वस्तुओं को संभाल कर रखा गया है। सैलानियों को नेहरु जी से संबंधित कई बातों का पता चलता है। यहाँ पर एक छोटा सा पार्क भी है। जिसमें कई तरह के फूल देखने को मिलते है। स्वराज भवन में बच्चों को जरूर ले कर आये। इस से उन्हें इतिहास की जानकारी मिलती है।



जवाहर तारामंडल (Jawahar Planetarium)


जवाहर तारामंडल में सौर मंडल के बारे में जानकारी दी जाती है। जिन लोगों या बच्चों को सौर मंडल में दिलचस्पी है, उनके लिए बहुत बढ़िया पर्यटन स्थल है। यहाँ पर लोगों को वीडियो और ऑडियो के द्वारा ग्रहों की चाल, दिशा के बारे में बताया जाता है। इसको 1979 में बनाया गया था। यह सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक खुला रहता है। 



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आनंद भवन  (Anand Bhawan)


आनंद भवन का निर्माण देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरु के पिता जी मोती लाल नेहरु जी ने करवाया था। इस से पहले वह स्वराज भवन में रहते थे। जिसे बाद में अँग्रेज़ों के समय में कांग्रेस का दफ्तर बना दिया गया था। मोती लाल जी अपने पूरे परिवार के आनंद भवन में आ गए थे। इस समय इसे एक संग्रहालय का रूप दे दिया गया है। जिसमें नेहरु परिवार के बारे में जानकारी मिलती है। 



भारद्वाज बाग़ (Bharadwaj Park)


भारद्वाज बाग़ ऋषि भारद्वाज जी से संबंधित है। सैलानियों को इस बाग़ में ऋषि भारद्वाज जी की एक बड़ी मूर्ति देखने को मिलती है। यहाँ पर बहुत सारे फव्वारे देखने को मिलते है। इन फव्वारों में लाइट भी लगाई गयी है। शाम के समय रंगबिरंगी लाइट में बहुत ही सुन्दर मनोरम दृश्य दिखाई देता है। कई किस्मों के फूल इस उद्यान को सुगंधित करते है।  



हाथी उद्यान (Elephant Park)


हाथी उद्यान इलाहबाद उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) का मुख्य पर्यटन स्थल है। यहाँ पर एक विशाल हाथी की मूर्ति है। जिसके अंदर से बच्चों के फिसलने के लिए जगह बनाई गयी है। यह उद्यान बच्चों को खूब पसंद आता है। इस उद्यान के साथ में एक छोटी से झील और बहुत सारे पक्षी देखने को मिलते है। सुमित्रानंदन उद्यान के नाम से भी इस पार्क को जाना जाता है। 



इलाहबाद संग्रहालय (Allahabad Museum)


इलाहबाद (Allahabad) संग्रहालय चंदर शेखर आजाद पार्क में स्थित है। इस संग्रहालय की इमारत बहुत ही सुंदर तरीके से बनाई गयी है। पर्यटकों को आजाद जी के जीवन, स्वतंत्रता संग्राम के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी पढ़ने के लिए मिलती है। सैलानियों को प्राचीन वस्तु, मूर्तियां देखने को मिलती है। यहाँ वह बंदूक भी देखने को मिलती है, जिस से उन्होंने खुद को गोली मारी थी।



खुसरो बाग़ (Khusro Bagh)


खुसरो बाग़ एक महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल है। इस बाग़ में खुसरो, उनकी बहन और माँ की कब्र बनी हुई है। खुसरों मुग़ल बादशाह जहाँगीर के सब से बड़े पुत्र थे। इन कब्रों पर बहुत ही सुन्दर नक्काशी की गयी है। इस उद्यान में अमरूद के सब से ज्यादा पेड़ है। यहाँ पर होने वाले अमरूदों को विदेशों में भी बेचा जाता है। यह बाग़ 17 बीघे में फैला हुआ है। 



पत्थर गिरजा घर (Patthar Girjaghar)


पत्थर गिरजा घर बहुत ही सुन्दर ईसाई धर्म से संबंधित इमारत है। इस गिरजा घर का निर्माण गॉथिक शैली में किया गया है। इसको 13 वी सदी के करीब बनाया गया है। यह बहुत ही प्राचीन इमारत है। किसी भी धर्म के लोग या सैलानी इसको अंदर जा कर देख सकते है। हफ्ते के सारा दिन खुला रहता है। यह सरोजनी नायडू मार्ग पर स्थित है।  



वेणी माधव मंदिर (Veni Madhav Temple)


हिन्दू भगवान श्री कृष्ण को वेणी माधव मंदिर इलाहबाद में निर्मला मार्ग पर स्थित है। कुछ विद्वानों के अनुसार इस मंदिर वाली जगह पर बंगाल के प्रसिद्ध संत चैतन्य महाप्रभु ने अपने जीवन काफी समय गुजारा है। इस मंदिर में कृष्ण जी की अत्यंत सुन्दर मूर्ति देखने को मिलती है। मंदिर के साथ में एक छोटा सा बाजार भी है। यहाँ के बाजार से हस्तशिल्प वस्तु खरीदी जा सकती है।



मिंटो पार्क (Minto Park)


मिंटो पार्क को मदन मोहन मालवीय पार्क के नाम से भी जाना जाता है। यह बाग़ यमुना नदी के किनारे पर बना हुआ है। इस बाग़ में जाने के लिए 10 रुपए शुल्क लगता है। इस बाग़ की हरियाली को देख कर सैलानी आनंदित हो जाते है। वर्ष 1858 ईस्ट इंडिया कंपनी के लिए क्वीन विक्टोरिया का पत्र इसी पार्क में पढ़ा गया था। इस कारण इसका ऐतिहासिक महत्व ज्यादा हो जाता है। 

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