मंगलवार, 3 अगस्त 2021

हरिद्वार उत्तराखंड में घूमने वाले स्थानों के बारे में विस्तार सहित जानकारी

जिन लोगों की धार्मिक स्थानों और आध्यात्मिक ज्ञान में रुचि हो, उनके लिए हरिद्वार सब से महत्वपूर्ण स्थान  है। हिन्दू धर्म में इसका बहुत ही विशेष स्थान है। पौराणिक हिन्दू कथाओं के अनुसार शिव जी ने गंगा जी को अपनी जटा से मुक्त किया था। गंगा जी गौमुख से होते हुए सब से पहले हरिद्वार पहुंची थी। विद्वानों के अनुसार इसका पुराना नाम गंगा द्वार था। 


कुछ विद्वानों के अनुसार गरुड़ पक्षी के घड़े से हरिद्वार, प्रयागराज, उज्जैन, नासिक में अमृत की बुंदे छलकी थी। जिसके बाद इन स्थानों पर 12 साल के कुम्भ के मेले का आयोजन किया जाता है। इस मेले में बहुत बड़ी संख्या में लोगों का जमावड़ा लगता है। लोग हिन्दू धर्म के बारे में जानने के लिए बड़ी दूर दूर से आते है। 


उत्तराखंड की पहाड़ियों के बीच में हरिद्वार बसा हुआ है। यहाँ का मौसम बहुत ही शानदार होता है। स्वच्छ जलवायु शरीर को ताजगी से भर देती है। दुनिया के कोने कोने से पर्यटक बहुत बड़ी संख्या में घूमने के लिए आते है। आइये आज हम बात करते है, हरिद्वार उत्तराखंड के पर्यटक स्थल (Haridwar Uttrakhand Tourist Place) के बारे में विस्तार सहित। 



हर की पौड़ी (Har Ki Pauri)


हर की पौड़ी हरिद्वार में सब से पवित्र स्थान माना जाता है। प्राचीन कथाओं के अनुसार इस स्थान पर हिन्दू भगवान विष्णु और शिव जी दिखाई दिए थे। उस समय से ही इस स्थान पर लोग स्नान करने के लिए आते है। इस स्थान को ब्रह्मा कुंड के नाम से भी जाना जाता है। हर की पौड़ी पर होने वाली गंगा आरती दुनिया भर में प्रसिद्ध है। इसके निकट गंगा मंदिर और हरिचरण मंदिर भी सैलानियों के मुख्य आकर्षण में से एक है। 



चंडी मंदिर (Chandi Temple)


चंडी मंदिर माँ काली को समर्पित है। यह मंदिर नील पर्वत पर बना हुआ है। सैलानी मंदिर में दर्शन के साथ साथ ट्रैकिंग का आनंद भी लेते नज़र आते है। हर साल बहुत बड़ी संख्या में लोग चंडी मंदिर में नतमस्तक होने के लिए आते है। इस मंदिर के आस पास का वातावरण बहुत ही सुन्दर है। लोग अपने कैमरे में यहाँ की यादों को सँजोना नहीं भूलते है। 



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चिल्ला वन्यजीव पार्क  (Chilla Wildlife Sanctuary)


प्रकृति प्रेमी और जानवरों में रुचि रखने वाले लोगों के लिए चिल्ला वन्यजीव पार्क बहुत ही बढ़िया पर्यटक स्थल (Tourist Place) है। चिल्ला वन्यजीव पार्क का क्षेत्रफल 249 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। इसकी स्थापना 1977 में की गयी थी। हाथी, बाघ, बिल्ली, भालू के साथ कई पक्षियों की किस्में भी देखने को मिलती है। नवम्बर से जून तक का समय इस पार्क को घूमने के लिए सही समय है। 



मनसा देवी मंदिर (Mansa Devi Temple)


हिन्दू मनसा देवी मंदिर शिवालिक की पहाड़ियों के बिल्वा पर्वत पर स्थापित है। यह मंदिर माँ मनसा को समर्पित है। देवी माँ को शक्ति का रूप माना जाता है। हिन्दू पौराणिक कथाओं के अनुसार देवी माँ शिव जी के मस्तिष्क की उपज है। प्रति वर्ष बहुत बड़ी संख्या में लोग इस मंदिर में माथा टेकने के लिए आते है। माँ अपने भक्तों की सारी मनोकामनाएं पूरी करती है। 



वैष्णों देवी मंदिर (Vaishno Devi Temple)


हरिद्वार (Haridwar) में भी कश्मीर में स्थित वैष्णों देवी मंदिर जैसा एक मंदिर बना हुआ है। इस मंदिर में माँ काली, सरस्वती और लक्ष्मी जी मूर्तियों को स्थापित किया गया है। इन मूर्तियों को बहुत ही सुन्दर ढंग से बनाया गया है। इस मंदिर की वास्तुकला को देख कर हर कोई हैरान रह जाता है। इस मंदिर पर पहुंचने के लिए भक्तों को ज्यादा चढ़ाई नहीं करनी पड़ती है।  



भारत माता मंदिर (Bharat Mata Temple)


भारत के स्वतंत्रता सैनानियों को भारत माता मंदिर समर्पित है। भारत माता मंदिर के अंदर किसी देवी देवता की मूर्ति स्थापित नहीं है। इस मंदिर के मुख्य हिस्से की जमीन पर भारत देश का नक्शा बना हुआ है। जिसको केसरी रंग से ढका गया है। यह नक्शा भारत माता को दिखाता है। एक हाथ में किताब और एक हाथ में चावल के दाने दिखाए गए है। इसके साथ एक माला और एक सफ़ेद कपड़े को दर्शाता है। यह एक ऊंची इमारत है।  



पतञ्जलि योगपीठ (Patanjali Yogpeeth)


पतञ्जलि योग पीठ में योग और आयुर्वेद के बारे में जानकारी दी जाती है। यह गुरु ऋषि पतञ्जलि के नाम पर इस संस्थान का नाम रखा गया है। आयुर्वेद में रुचि रखने वाले लोगों के लिए बहुत ही अच्छा स्थान है। आयुर्वेदिक दवाइयों की बहुत बड़े स्तर पर इस योग पीठ में खोज की जाती है। सैलानियों के रहने के अच्छी सुविधा प्रदान की जाती है। 



स्वामी विवेकानन्द पार्क (Swami Vivekananda Park)


स्वामी विवेकानन्द पार्क पर्यटकों के बहुत ही अच्छा पर्यटक स्थल है। इसका आकर त्रिकोण में बना हुआ है। यहाँ का वातावरण बहुत ही शांत और सुहावना होता है। इस पार्क में एक तरफ विवेकानन्द जी और दूसरी तरफ शिव जी की बहुत बड़ी स्थापित है। लोग सुबह सुबह और शाम को घूमने के लिए ज्यादा आते है। बच्चों के खेलने के लिए बहुत ही अच्छी जगह है। 



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बड़ा बाजार (Big Bazar)


हरिद्वार उत्तराखंड (Uttrakhand) में बड़ा बाजार बहुत ज्यादा मशहूर है। हर दिन लोग बहुत बड़ी संख्या में कुछ ना कुछ खरीदने के लिए आते है। इस बाजार में हर प्रकार की वस्तु आराम से मिल जाती है। इस बाजार में मिलने वाले स्वादिष्ट खाने को लोग कभी नहीं भूलते है। यहाँ पर विदेशी लोग भी बहुत बड़ी संख्या में खरीदारी करते है। 



सप्तऋषि आश्रम (Saptrishi Ashram)


माना जाता है कि इस स्थान पर किसी समय ऋषि कश्यप, वशिष्ठ, अत्रि, विश्वामित्र, जमदग्नि, भारद्वाज और गौतम ने भगवान की आराधना की थी। जिसके बाद इस स्थान का नाम सप्तऋषि आश्रम पड़ गया। इसी स्थान पर गंगा नदी सात अलग अलग धारा में विभाजित हो जाती है। इसी स्थान पर एक सरोवर भी है, जिसे सप्त कुंड के नाम से जाना जाता है। यह पर्यटकों के घूमने के लिए अच्छी जगह है। 



पारद शिवलिंग (Parad Shivling)


पारद शिव लिंग पारा धातु से बना हुआ है। पारद या पारे को मर्करी के नाम से भी जाना जाता है।  पारे को कुछ विशेष क्रिया से गुजारने के बाद वह ठोस रूप में बदल जाता है। जिस के बाद किसी भी आकार में ढाला जा सकता है। यह शिवलिंग 150 किलोग्राम परे से बना हुआ है। हरिद्वार से लगभग 2 किलोमीटर की दूरी पर कनखल क्षेत्र में स्थित पारद शिव लिंग है।

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