मंगलवार, 10 अगस्त 2021

अहमदाबाद गुजरात भारत के पर्यटन स्थल के बारे में विस्तार सहित जानकारी

अहमदाबाद (Ahmedabad) गुजरात का बहुत ही सुन्दर शहर है। यह पहले गुजरात की राजधानी हुआ करता था। इसको कर्णावती नाम से भी पहचाना जाता है। साबरमती नदी के किनारे पर बसे, इस नगर को घूमने के लिए बड़ी संख्या में सैलानी आते है। औद्योगिक और ऐतिहासिक रूप से बहुत ही शानदार नगर है।  यहाँ पर मिलने वाले व्यंजनों का स्वाद सैलानी लम्बे समय तक भूलते नहीं है। आइये आज हम बात करते है, अहमदाबाद गुजरात भारत के पर्यटन स्थल (Ahmedabad Gujarat India Tourist Places) के बारे में विस्तार सहित। 



अक्षरधाम मंदिर (Akashar Dham Temple)


अक्षरधाम मंदिर हिन्दू भगवान स्वामी नारायण को समर्पित है। इस मंदिर की स्थापना वर्ष 1992 में की गयी थी। यह मंदिर बहुत बड़े क्षेत्र में फैला हुआ है। इस मंदिर के अंदर 7 फुट ऊंची स्वामी नारायण की मूर्ति स्थित है। मंदिर की दीवारों पर नक्काशी की गयी है। इस मंदिर को गुलाबी रंग के पत्थर से बनाया गया है। जन्मआष्ट्मी का त्यौहार बड़ी धूम धाम के साथ मनाया जाता है। 



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हठी सिंह जैन मंदिर (Hathi Singh Jain Temple)


हठी सिंह जैन मंदिर का निर्माण 19 सदी के दौरान हुआ था। इस मंदिर को हठी सिंह नाम के व्यापारी ने उस समय 8 लाख रुपए दे कर बनवाया था। यह जैन मंदिर जैन समुदाय के 15 वे गुरु धर्मनाथ को समर्पित है। इस मंदिर को सफ़ेद संगमरमर पत्थर से बनाया गया है। इस पर बहुत ही बारीकी से नक्काशी की गयी है। मंदिर के शिखर पर एक गुंबद और 12 स्तंभ पर बना है। 



केलिको संग्रहालय (Calico Museum)


केलिको संग्रहालय में सैलानियों को भारतीय कपड़ों के बारे में जानकारी मिलती है। कपड़े की बुनाई, सिलाई देखने को मिलती है। अलग अलग कपड़े, धागे, डिजाइन देखने को मिलते है। पूरी दुनिया में एक अनूठा संग्रहालय है। इस संग्रहालय को गौतम साराभाई और उनकी बहन जीरा साराभाई द्वारा 1949 में शुरू किया गया था। मुग़ल काल के समय के कपड़े देखने को भी मिलते है। सैलानियों के लिए एक पुस्तकालय भी है। 



चंदोला झील (Chandola Lake)


चंदोला झील का निर्माण मुगल बादशाह अहमदाबाद ताज खान नारी अली की बेगम के द्वारा करवाया गया था। इसी कारण यह एक ऐतिहासिक झील भी कही जा सकती है। चंदोला झील 1200 हेक्टर में फैली हुई है। इसके पानी को खेती और कारखानों में प्रयोग किया जाता है। पर्यटकों को कई किस्म के पक्षी देखने को मिलते है। यहाँ का वातावरण बहुत ही शांत और सुहावना है। बच्चों को यह जगह बहुत पसंद आती है।



अहमद शाह मस्जिद (Ahmad Shah Masjid)


अहमद शाह मस्जिद का निर्माण 1414 ई वी पूर्व में हुआ था। अहमदाबाद शहर की सब से पुरानी मस्जिदों में से एक है। सुलतान अहमदशाह ने इस शहर को बसाया था। उन्हीं के नाम पर इस मस्जिद का नाम रखा गया है। भद्रा किले किले की दक्षिण पश्चिम दिशा में यह मस्जिद स्थापित है। काले और सफ़ेद संगमरमर पत्थर से इस मस्जिद को बनाया गया है। मस्जिद में बहुत सुन्दर मीनाकारी देखने को मिलती है। 



जामा मस्जिद (Jama Masjid)


अहमद शाह ने 1423 में जामा मस्जिद का निर्माण करवाया था। इंडो- अरबी वास्तुकला का बहुत ही सुन्दर मिश्रण देखने को मिलता है। इसकी चारों दिशाओं में दरवाजे स्थित है। यह पिले बलुआ पत्थर से बनाई गयी है। मेहराब (पूजा स्थल) में 260 स्तंभ बने हुए है। अभी भाषा में आयतें खुदी हुई है। सैलानियों को जामा मस्जिद में जैन मंदिर की भांति कुछ गुंबद और हिन्दू मंदिर में लटकी घंटी की नक्काशी दिखाई देगी। 



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सरखेज रोज़ा (Sarkhej Roza)


वास्तुकला की अनूठी मिसाल सरखेज रोज़ा है। सरखेज रोज़ा में पीर अहमद खाटु गंज बख्श, महमूद शाह बेगड़ा, उसकी बेगम का मकबरा, महल के साथ एक मस्जिद भी एक साथ स्थित हैं। यहाँ पर एक जल कुंड भी बना हुआ है। इस जल कुंड की बहुत ज्यादा गहराई बताई जाती है। वस्तुकला का बहुत अच्छा उदाहरण है। इतिहास में रुचि रखने वाले लोगों के लिए बहुत अच्छा स्थान है। 



झूलती मीनार (Jhulta Minar)


झूलती मीनार न सिर्फ भारत के बल्कि दुनिया के वैज्ञानिकों के लिए खोज का विषय है। यह दो मीनार है। एक मीनार को हिलाने पर दूसरी खुद ब खुद हिलने लगती है। जबकि दोनों मीनारों को जोड़ने वाला गलियार स्थिर रहता है। इसका निर्माण सुलतान अहमद शाह के नौकर के द्वारा करवाया गया था। दोनों में से एक मीनार तीन मंजिला है। इस मीनार पर बहुत ही सुन्दर नक्काशी की गयी है। 



दादा हरीर वाव (Dada Harir Vav)


दादा हरीर वाव एक ऐतिहासिक कुआँ है। इतिहासकारों के अनुसार इस कुएं का निर्माण महमूद शाह के शासन काल में किया गया था। यह बात संस्कृत में लिखे शिलालेखों से सिद्ध होती है। या कुआँ सोलंकी वास्तुकला में बना है। इसको बनाने के लिए बलुआ पत्थर का इस्तेमाल किया गया है। इस देखने का सही समय दोपहर का है। जब प्रकाश नीचे तक जाता है। विदेशी सैलानी भी इस वाव को देखने के लिए आते है।



लोथल (Lothal)


लोथल में हड़प्पा संस्कृति के निशान देखने को मिलते है। द्रविड़ काल से इसका सम्बन्ध होने के निशान मिले है। इस स्थान पर एक संग्रहालय भी स्थित है। जहाँ पर कुछ ऐसे अवशेष देखने को मिलते है, जिनका सम्बन्ध 4500 वर्ष पुराना है। 16 वी सदी तक यहाँ पर लोगों ने खूब विकास किया। जैसे जैसे समय बीतने लगा, सब कुछ खत्म होने लगा। पुरातत्व विभाग इस के ऊपर लगातार खोज कर रहा है। इतिहास में रुचि रखने वाले पर्यटकों को जरूर आना चाहिए।   



साबरमती गाँधी आश्रम (Sabarmati Gandhi Ashram) 


आजादी की लड़ाई में साबरमती गाँधी आश्रम का मुख्य स्थान रहा है। इसे सत्याग्रह आश्रम के नाम से भी जाना जाता है। साबरमती नदी के किनारे पर बने होने के कारण इसका नाम साबरमती पड़ा। गाँधी जी ने इस स्थान से डंडी मार्च शुरू किया था। यही पर एक पुस्तकालय है। यह पुस्तकालय स्वतंत्रता  संग्राम और महात्मा गाँधी जी के जीवन पर बखूबी रोशनी डालता है।  



कांकरिया झील (Kankaria Lake)


ऐतिहासिक कांकरिया झील मानव के द्वारा बनाई गयी है। यह झील 34 दिशाओं में बहती है। झील के बिलकुल मध्य में एक मानव निर्मित टापू बना हुआ है। इस टापू का नाम नागिनवाड़ी है। इस झील का निर्माण सुलतान कुतुबद्दीन अहमद शाह द्वितीय ने अपनी देख रेख में करवाया था। कुछ विद्वानों के अनुसार झील में ज्यादा चुना पत्थर होने के कारण, इसका नाम कांकरिया झील पड़ा। बच्चों के खेलने के लिए कई तरह के खेल, तीव्र गति से चली वाली रेल झूला, संग्रहालय और चिड़िया घर स्थित है। 



अडालज वाव (Adalaj Vav)


वाघेला राजा वीर सिंह की याद में उनकी पत्नी रानी रुद्रदेवी ने अडालज वाव का निर्माण करवाया था। पानी की किल्लत को दूर करने के इस वाव का निर्माण करवाया गया। इस वाव तक पहुंचने के लिए तीन रास्ते है। यह 16 स्तंभ पर टिका हुआ है। यह इंडो-इस्लामिक वास्तुकला का बहुत ही सुन्दर उदाहरण है। यहाँ का पानी हर मौसम में ठंडा ही रहता है। 



मोढेरा (Modhera Sun Temple) 


मोढेरा सूर्य भगवान को समर्पित एक मंदिर है। यह मंदिर शहर से 101 किलोमीटर दूर मोढेरा गांव में स्थित है। इस मंदिर को यूनेस्को ने ऐतिहासिक धरोहर में शामिल कर लिया है। इस मंदिर को प्राचीन वास्तुकला के आधार पर बनाया गया है। हिन्दू देवी देवताओं की कई प्राचीन मूर्तियां देखने को मिलती है। पुरातत्व विभाग इस मंदिर की देख रेख कर रहा है। 


कैसे जाए (How Reach) 


अहमदाबाद (Ahmedabad) सारे देश के साथ जुड़ा है। सैलानी रेल, सड़क या हवाई सफर से भी आ सकते है। पर्यटक यहाँ की पाव भाजी, पानी पूरी, बासुंदी, पूरनपोली खाना कभी ना भूले। हर गुजरती खाने में हल्का सा मीठा जरूर डाला जाता है। सैलानी यहाँ पर ना शराब पी सकते है, ना कोई बेच ही सकता है। सर्दियों के दिनों में घूमना सब से बेहतर है। आप सभी का दिल से स्वागत है।

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