शुक्रवार, 30 जुलाई 2021

आगरा उत्तर प्रदेश के पर्यटक स्थल के बारे में जानकारी


उत्तर प्रदेश का आगरा शहर अपनी ऐतिहासिक धरोहर के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है। इस शहर पर सब से ज्यादा मुग़ल राजाओं का शासन रहा है। जिनके शासन काल में कई ऐतिहासिक इमारतों का निर्माण किया गया है। कुछ इतिहासकारों का कहना है कि आगरा शहर का सम्बन्ध महाभारत के समय से है। आगरा का पेठा और ताजमहल दुनिया भर में मशहूर है। आइये आज हम बात करते है, आगरा उत्तर प्रदेश के पर्यटक स्थल (Agra Uttar Pradesh Tourist Place) के बारे में विस्तार सहित। 



ताजमहल (Taj Mahal)


ताजमहल को दुनिया भर के सैलानी देखने के लिए जरूर आते है। इस ऐतिहासिक इमारत को मुग़ल बादशाह शाहजहाँ ने अपनी बेगम मुमताज़ की याद में बनवाया था। इसे बनाने के लिए लगभग 17 साल का समय लगा था। इसे सफ़ेद संगमरमर से बनाया गया है। इसको एक आयताकार आकार में बनाया गया है। कुछ लोग इसे प्रेम का प्रतीक कहते है। चाँदनी रात में इसे देखने का नज़ारा बहुत ही दिलकश होता है। 



आगरा किला या लाल किला (Agra Fort Or Red Fort)


आगरा (Agra) किला को लाल किला के नाम से भी जाना जाता है। इसका निर्माण मुग़ल बादशाह अकबर ने अपने शासन काल के दौरान करवाया था। इस किले के अंदर सेना के साथ शाही लोग भी रहा करते थे। इसको लाल बलुआ पत्थर से बनाया गया है। इसकी वास्तुकला बहुत ही मनमोहक है। इस किले के अंदर शीशे की दीवारें, अंगूरी बाग़, शाही औरतों के लिए बनी नगीना मस्जिद बहुत ही खूबसूरत है। 



जामा मस्जिद (Jama Mosque)


जामा मस्जिद आगरा उत्तर प्रदेश में भी स्थित है। इसका निर्माण मुग़ल बादशाह शाहजहाँ ने अपनी बेटी जहांनारा के लिए बनवाया था। लाल बलुआ पत्थर से बनी इस मस्जिद को संगमरमर से सजाया गया है। यह शहर के मध्य में स्थित मस्जिद है। इसके आसपास एक बड़ा बाजार लगता है। जहां पर सैलानी कुछ ना कुछ सामान जरूर खरीद लेते है। सुबह 6 बजे से रात 8 बजे तक इस मस्जिद में सैलानी आ सकते है।  



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खास महल (Khas Palace)


खास महल आगरा किला में बना हुआ है। यहाँ पर शाहजहां की बेटियां जहांआरा और रोशनआरा रहती थी। इस महल की छतों पर बहुत ही सुन्दर नक्काशी की गयी है। जिसको देखकर सैलानियों के मुंह से वाह खुद ब खुद ही निकल आता है। खास महल के एक तरफ अंगूरी बाग़ और एक तरफ नदी बहती है। आगरा जाने वाले लोग इसे देखना नहीं भूलते है। 



चीनी राउजा मकबरा (Chini Rauza Tomb)


चीनी राउजा मकबरे का निर्माण मुग़ल सम्राट शाहजहाँ के दरबारी कवि और प्रधानमंत्री मौलाना शुक्ररल्‍लाह शिराजी ने करवाया था। इनकी ख्वाहिश थी अपने जीते जी अपने लिए मकबरे को बनवाये। कुछ इतिहास कर इस मकबरे के गुंबद की बनावट को सही नहीं मानते है। इसे बनाने के लिए चीनी पत्थर का उपयोग किया गया है। जिसके कारण इसे चीनी मकबरा भी कहा जाता है।  



पंच महल (Panch Palace)


पंच महल एक 5 मंजिला इमारत है। यह फतेहपुर सिकरी के पश्चिमी किनारे पर स्थित है। इसको अकबर बादशाह की रानियों के लिए बनवाया गया। इसमें 176 खम्भे लगाए गए है। इन खंबों के कारण महल बहुत ही ज्यादा हवादार था। अकबर यहाँ पर बैठ कर नृत्य का आनंद लिया करते थे। इसका निर्माण लाल पत्थर से किया गया है। इस पर्यटक स्थल (Tourist Place) पर सैलानियों को बहुत मजा आता है।



फतेहपुर सिकरी (Fatehpur Sikri)


फतेहपुर सिकरी का निर्माण 16 वी शताब्दी में मुग़ल बादशाह अकबर ने करवाया था। इसकी वास्तुकला को देखकर हर सैलानी मोहित हो जाता है। इसे लाल बलुआ पत्थर से निर्मित किया गया है। आगरा से करीब एक घंटे के अंदर आप पहुंच सकते है। फतेहपुर सिकरी में जोधाबाई महल, जामा मस्जिद, बुलंद दरवाज़ा और सलीम चिश्ती की दरगाह देखने को मिलती है।  



अंगूरी बाग़ (Angoori Bagh)


अंगूरी बाग़ का निर्माण मुग़ल सम्राट शाहजहाँ ने 1637 में करवाया था। यहाँ पर वह आराम किया करते थे। शाही औरतों के लिए आराम से नहाने के लिए हमाम को तैयार करवाया गया था। इसमें एक बहुत ही सुन्दर बग़ीचा भी है। इस बाग़ की जटिल बनावट के कारण या कुछ विद्वानों के अनुसार कहा जाता है कि पहले यहाँ पर अंगूर के बूटे होते थे। जिसके कारण इसको अंगूरी बाग़ कहा जाता है।  



ताज संग्रहालय (Taj Museum)


ताज संग्रहालय का निर्माण 1982 में किया गया था। यह संग्रहालय जल महल के अंदर बना हुआ है। यहाँ पर सैलानियों को पुराने सिक्के, बादशाह और उनकी रानियों के कब्रों के चित्र भी देखने को मिलते है। इसकी वास्तुकला हर किसी को मोहित करती है। यह सुबह 10 बजे से शाम 7 बजे तक खुला रहता है। सैलानियों को अपनी कार दूर कर पार्किंग में पार्क करके आना होता है। कार पार्किंग से इलेक्ट्रिक गाड़ियां मिल जाती है। 





अकबर मकबरा (Akbar Tomb)


अकबर मकबरा 1605 से 1608 के समय के आस पास में बनाया गया था। इसकी वास्तुकला को देख कर हर सैलानी हैरान हो जाता है। यह 119 एकड़ में फैला हुआ है। इस मकबरे को मक्का की दिशा में ना बना कर, उगते सूरज की दिशा में बनाया गया है। यहाँ पर सहित मुख्य मकबरे के चारों तरफ बग़ीचा बना हुआ है। इस बगीचे को खुद अकबर से बनवाया था। इस मकबरे से सिर्फ एक किलोमीटर की दूरी पर उनकी बेगम मरियम उज जमानी का मकबरा भी बना हुआ है। 






कैसे और कब जाए? (How & When Go)


आगरा उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) घूमने का सब से बढ़िया समय अक्तूबर से मार्च तक का होता है। इस समय बहुत ज्यादा गर्मी नहीं होती है। सैलानियों को आने के लिए घरेलू हवाई मार्ग, रेल मार्ग और सड़क मार्ग की सेवा उपलब्ध है। पर्यटक इस शहर के लजीज व्यंजनों का स्वाद लेना नहीं भूलते है। कालीन, जूट या चमड़े का सामान काफी सस्ते दाम पर आसानी से मिल जाता है। 

गुरुवार, 29 जुलाई 2021

वाराणसी या बनारस उत्तर प्रदेश के पर्यटक स्थल के बारे में विस्तार सहित जानकारी


वाराणसी (Varanasi) उत्तर प्रदेश का प्रमुख धार्मिक नगर है। इस नगर में पर्यटकों बहुत बड़ी संख्या में मंदिर और घाट देखने को मिलते है। दुनिया के सब से पुराने नगरों में से एक वाराणसी नगर है। यह गंगा नदी के किनारे पर 2500 वर्ष पहले से स्थित है। इसको बनारस के नाम से भी जाना जाता है। परिवार और दोस्तों के साथ घूमने के लिए बहुत ही अच्छा स्थान है। आइये आज हम बात करते है, वाराणसी या बनारस उत्तर प्रदेश के पर्यटक स्थल (Varanasi or Banaras Uttar Pardesh Tourist Place) के बारे में विस्तार सहित। 



दशाश्वमेध घाट (Dashashwamedh Ghat)


दशाश्वमेध घाट पर शाम को होने वाली गंगा आरती के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है। संसार के कोने कोने से लोग इस घाट पर स्नान करने के लिए आते है। यह एक बहुत ही प्राचीन घाट है। कुछ विद्वानों के अनुसार ब्रह्मा जी ने एक अश्वमेध यज्ञ के दौरान 10 घोड़ों की बलि थी। जिसके बाद इस घाट का नाम दशाश्वमेध घाट पड़ा था।  



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काशी विश्वनाथ मंदिर (Kashi Vishwnath Mandir)


काशी विश्वनाथ मंदिर 12 ज्योतिर्लिंगों में एक मंदिर है। इतिहासकारों के अनुसार इस मंदिर का इतिहास करीब 200 साल पुराना है। भगवान शिव को समर्पित इस मंदिर में हर साल बहुत बड़ी संख्या में नतमस्तक होने के लिए आते है। महाशिवरात्रि वाले दिनों में भक्तों को पैर रखने की जगह नहीं होती है। भक्त मंदिर के परिसर में सिर्फ जल, फूल और पैसों के अलावा कुछ और नहीं ले जा सकते है। भक्तों को अपना सामान किसी दुकान पर या किसी को देकर मंदिर में प्रवेश करना होगा।  



संकट मोचन मंदिर (Sankat Mochan Hanuman)


संकट मोचन मंदिर का निर्माण गोस्वामी तुलसीदास ने करवाया था। यह मंदिर भी काशी विश्वनाथ मंदिर की तरह बहुत ही प्रसिद्ध है। मंदिर में स्थापित हनुमान जी मूर्ति बहुत ही भव्य है। इस मूर्ति को देखकर लगता है कि हनुमान जी खुद ही है। प्रतिदिन सुबह 4 बजे और रात को आरती कि जाती है। इस आरती के दौरान हनुमान चालीसा का पथ किया जाता है। यह बहुत ही अद्भुत अनुभव होता है। 



अस्सी घाट (Assi Ghat) 


अस्सी घाट पर रामायण की रचना गोस्वामी तुलसीदास जी के द्वारा की गयी थी। इस घाट पर स्नान करने के बाद शिव लिंग की पूजा पीपल के पेड़ के नीचे बैठ के करते है। हर दिन सुबह 5 बजे इसी घाट पर गंगा की आरती की जाती है। यह आरती बहुत ही भव्य ढंग से की जाती है। यह घाट रेलवे स्टेशन से सिर्फ 7 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। 



राम नगर किला (Ram Nagar Fort)


वाराणसी (Varanasi) में राम नगर किला अस्सी घाट के बिलकुल सामने है। इस किले पर जाने के लिए सैलानी नाव का भी उपयोग कर सकते है। इतिहासकारों के अनुसार इस किले का इतिहास करीब 400 साल पुराना है। जैसे जैसे समय बीत रहा है, इसकी हालत ख़राब होती जा रही है। सैलानियों के लिए यह बहुत ही बढ़िया स्थान है घूमने के लिए। इस किले में संग्रहालय भी है, जिसमें अंग्रेजों के समय की कारों को भी प्रदर्शित किया गया है। 



कथवाला मंदिर (Kathwala Temple)


कथवाला मंदिर को नेपाली मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। इस मंदिर की बनावट काष्ठकला की तरह बनाई गयी है। यह मंदिर नेपाल के एक राजा के द्वारा ललिता घाट पर बनवाया गया था। इस मंदिर की नक्काशी देखने के लोग दूर दूर से आते है। इसके मुख्य द्वार पर दो शेर की मूर्तियां भी बनाई गयी है। मंदिर की दीवारों को लाल रंग से रंगा गया है। 



सारनाथ (Sarnath)


सारनाथ में भगवान बुद्ध ने अपने 5 शिष्यों को इस स्थान पर आध्यात्मिक ज्ञान दिया था। इस पर्यटक स्थल (Tourist Place) पर दुनिया भर से लोग घूमने के लिए आते है। धमेख और धर्मराजिका स्तूप देखने में बहुत ही सुन्दर है। इतिहासकार कहते है कि यह स्थान किसी समय में बहुत बड़ा शिक्षा का स्थान था। यहाँ पर दुनिया के कोने कोने से लोग पढ़ने के लिए आते थे। इस स्थान पर आकर लोगों को बहुत ज्यादा मन कि शांति मिलती है। पर्यटकों सारनाथ में स्थित पुरातत्व विभाग का संग्रहालय भी देख सकते है।  



दुर्गा मंदिर या बंदर मंदिर (Durga Or Monkey Temple)


वाराणसी में दुर्गा मंदिर का बहुत ज्यादा महत्व है। यह मंदिर माँ दुर्गा को समर्पित है। इस मंदिर में हर दिन बहुत बड़ी संख्या में नतमस्तक होने के लिए आते है। यह मंदिर बंगाल की एक महारानी के द्वारा बनवाया गया था। कुछ विद्वानों के अनुसार इस मंदिर में स्थित माँ दुर्गा की मूर्ति को बनाकर स्थापित नहीं किया गया था। यह मूर्ति खुद ही प्रकट हुई थी। दुर्गा मंदिर में बहुत बड़ी संख्या में बंदर भी देखने को मिलते है। जिसके कारण इसे बंदर मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। 



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आलमगीर मस्जिद (Alamgir Mosque)


आलमगीर मस्जिद को मुग़ल बादशाह औरंगजेब के द्वारा 17 वीं बनाया गया। यह बहुत ही सुन्दर वास्तुकला उदाहरण है। यह पंचगंगा घाट पर बनी है। इस मस्जिद में गैर मुस्लिम लोगों को प्रवेश की इजाजत नहीं है। मुसलमान लोगों के यह स्थान बहुत ही खास है। 



कैसे और कब जाए? (When & How Go)


बनारस (Banaras) पूरे देश के साथ हवाई मार्ग, सड़क मार्ग और रेल मार्ग से जुड़ा हुआ। सैलानी अपनी सुविधा के अनुसार आ सकते है। अक्तूबर से मार्च का समय घूमने के लिए बहुत ही बढ़िया है। बाकी दिनों में  काफी ज्यादा गर्मी होती है। यहाँ की बनारसी साड़ियां दुनिया भर में मशहूर है। सैलानी ठंडाई का मजा भी ले सकते है, लेकिन याद रहे इसमें भाँग भी मिलाई जाती है। 

बुधवार, 28 जुलाई 2021

पठानकोट पंजाब में घूमने वाले पर्यटक स्थल के बारे में विस्तार सहित


पठानकोट पंजाब राज्य का बहुत ही सुन्दर शहर है। इस की सुंदरता को देख कर सैलानी बहुत ज्यादा आनंदित होते है। इसे हिमाचल प्रदेश और जम्मू कश्मीर का प्रवेश द्वार भी कहा जाता है। यहाँ पर दुनिया के कोने कोने से पर्यटक घूमने के लिए आते है। इसका पहाड़ी और हरा भरा वातावरण हर किसी को प्रभावित करता है। परिवार और दोस्तों के साथ घूमने के लिए बहुत ही बढ़िया स्थान है। आइये आज हम बात करते है, पठानकोट पंजाब में घूमने वाले पर्यटक स्थल (Pathankot Punjab tourist place) के बारे में विस्तार सहित। 



मुक्तेश्वर मंदिर (Mukteshwar Temple)


मुक्तेश्वर मंदिर भगवान शिव को समर्पित मंदिर है। इस मंदिर का इतिहास लगभग 350 साल प्राचीन बताया जाता है। यह बहुत ही भव्य मंदिर है। मुक्तेश्वर मंदिर में एक शिव लिंग और योनि को स्थापित किया है। यह लिंग सफ़ेद संगमरमर पत्थर से और योनि को तांबे से बनाया गया है। गणेश, ब्रह्मा, विष्णु, पार्वती, हनुमान, और नंदी भगवान की मूर्तियों को भी स्थापित किया गया है। 


पहाड़ के बीच में इस मंदिर को बनाया गया है। जिसके सामने से एक नदी भी बहती है। सैलानी और शिव भक्तों के लिए बहुत ही अद्भुत स्थान है। प्रति वर्ष बहुत बड़ी संख्या में लोग घूमने के लिए आते है। मंदिर में भक्तों के लिए सुबह 7 बजे से शाम 7 बजे तक प्रवेश करने की अनुमति है। यहाँ पर आने का किसी प्रकार का शुल्क नहीं लगता है। 



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सिटी सेंटर मॉल (City Center Mall)


खरीदारी करने वाले सैलानियों के लिए सिटी सेंटर मॉल बहुत ही अच्छा स्थान है। महंगे कपड़े, मेकअप का सामान, जूते चप्पल हर तरह सामान बड़ी आसानी के साथ मिल जाता है। बच्चों के खेलने के कई तरह के खेल भी मौजूद है। सिनेमा के दीवाने और खाने पीने के शौकीन लोगों को भी बहुत मजा आता है। एक दिन पूरा अच्छे से घूमने के लिए बहुत ही अच्छी जगह है। 



नूरपुर किला (Nurpur Fort)


नूरपुर किले का इतिहास करीब 900 साल पुराना है। पहले इसके काफी हिस्से को अंग्रेजों ने और उसके बाद 1905 में आये भूकंप ने बहुत ज्यादा नुकसान पहुँचाया था। किले का बचा हिस्सा भी बहुत बड़ी संख्या में सैलानियों को अपनी तरफ खींचने के कार्य करता है। इसे पठानी राजपूतों के द्वारा तैयार करवाया गया था। जिसके बाद इस किले का नाम शाहजहाँ ने अपनी बेगम नूर जहां के नाम पर रखा था। 


कृष्ण और मीरा बाई की मूर्तियां भी इस किले के गर्भ गृह में स्थित है। यह अकेला स्थान है, जहाँ पर कृष्ण और मीरा बाई की पूजा एक साथ की जाती है। हर साल काफी संख्या में कृष्ण और मीरा बाई के भक्त इस किले के गर्भ गृह में प्रवेश करने के लिए आते है। नूरपुर किले को देखने के लिए पानी को अपने साथ जरूर रखे। 



लक्ष्मी नारायण मंदिर (Lakshmi Narayan Temple)


लक्ष्मी नारायण मंदिर पठानकोट में बहुत ज्यादा प्रसिद्ध है। यह मंदिर माँ लक्ष्मी और भगवान विष्णु जी को समर्पित है। हनुमान जी की एक बड़ी मूर्ति भी इस मंदिर के आँगन में स्थित है। भक्तों और पर्यटकों के लिए बहुत ही बढ़िया वातावरण है। त्यौहार वाले दिनों में  बहुत बढ़िया संख्या में लोग नतमस्तक होने के लिए आते है। 



रणजीत सागर बाँध (Ranjit Sagar Dam)


पंजाब (Punjab) के प्रमुख बाँध में से एक रणजीत सागर बाँध पठानकोट (Pathankot) है। यहाँ से पहाड़ी दृश्य बहुत ही सुंदर दिखाई देते है। परिवार या दोस्तों के घूमने के लिए बहुत ही बढ़िया स्थान है। लोगों के घूमने के लिए कई पिकनिक स्थान बनाये गए है। बच्चों को यह स्थान खूब लुभाता है। आप अगर एक दिन के लिए घूमने के लिए जाना चाहते है तो रणजीत सागर बहुत ही बढ़िया चुनाव है। 



काठगढ़ मंदिर (Kathgarh Temple)


काठगढ़ मंदिर का हिन्दू पौराणिक कथाओं में जिक्र मिलता है। इस मंदिर में भगवान शिव को समर्पित एक 6 फुट ऊँचा लिंग स्थापित है। कहा जाता है कि जब भगवान राम को खोजने के लिए जब भरत निकले थे, उस समय इस मंदिर की खोज हुई थी। काठगढ़ मंदिर की वास्तुकला को देखकर सैलानी और भक्त बहुत ज्यादा आनंदित होते है। 

यह मंदिर ब्यास और चोच नदी के मिलने वाले स्थान पर स्थित है। शिवरात्रि वाले दिन बहुत बड़ी संख्या में भक्त नतमस्तक होने के लिए आते है। मंदिर के बाहर छोटी छोटी दुकानें है। इस दुकानों पर मिलने वाला समान काफी सस्ता होते है। लोग अपने कैमरे में इस की यादों को बंद करना बिलकुल भी नहीं भूलते है। 



शाहपुरकंडी किला (Shahpurkandi Fort)


1505 में मुग़ल बादशाह शाहजहाँ के प्रमुख जसपाल सिंह पठानिया ने शाहपुरीकंडी किले का निर्माण करवाया था।  इस किले का निर्माण रावी नदी के किनारे पर करवाया गया है। शाहपुरकंडी किले को नूरपुर और कांगड़ा को बाहरी आक्रमण से बचाने के लिए बनाया गया था। यहाँ पर आने वाले पर्यटकों को बहुत ही अच्छा अनुभव प्राप्त होता है। परिवार या दोस्तों के साथ घूमने के लिए अच्छा पर्यटक स्थल (Tourist Place) है। 



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कैसे और कब जाए (How & When Go)


पठानकोट जाने के लिए सड़क या रेल के द्वारा ही जाया जा सकता है। आप दुनिया के किसी भी कोने से आना चाहते हो तो, आप को हवाई जहाज के द्वारा अमृतसर हवाई अड्डे पर आना होगा। यहाँ से कार या रेल के द्वारा जा सकते है। अक्तूबर से अप्रैल का समय बहुत ही अच्छा है। यहाँ की पश्मीना शॉल दुनिया भर में मशहूर है। 

अहमदाबाद गुजरात भारत के पर्यटन स्थल के बारे में विस्तार सहित जानकारी

अहमदाबाद (Ahmedabad) गुजरात का बहुत ही सुन्दर शहर है। यह पहले गुजरात की राजधानी हुआ करता था। इसको कर्णावती नाम से भी पहचाना जाता है। साबरमती...