ब्लू सिटी जोधपुर राजस्थान के पर्यटन स्थल के बारे में विस्तार सहित जानकारी


"ब्लू सिटी" (Blue city) के नाम से जोधपुर शहर को जाना जाता है। जोधपुर में सैलानियों को नील रंग के घर बहुत बड़ी संख्या में देखने को मिलते है। यह शहर ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से बहुत ही महत्वपूर्ण है। यहाँ के लोग बहुत बढ़िया ढंग से सैलानियों के साथ पेश आते है। आइए आज हम बाते करते है, ब्लू सिटी (Blue city), जोधपुर (Jodhpur), राजस्थान (Rajasthan) के पर्यटन स्थल (Tourist place) के बारे में विस्तार सहित जानकारी। 



घंटा घर (Clock Tower)


घंटा घर जोधपुर शहर का बहुत ही मशहूर स्थान है। इस स्थान पर बहुत बड़ा बाजार है। जहाँ से लोग रोजाना उपयोग में आने वाली चीज़ों को खरीद सकते है। महाराजा सरदार सिंह ने इसका निर्माण वर्ष 1880 से 1911 के मध्य में करवाया था। सैलानी इस बाजार में हाथ से बनी वस्तुओं को खरीद सकते है। यहाँ के व्यंजन बहुत ही स्वादिष्ट होते है। 



मेहरानगढ़ दुर्ग (Mehrangarh Fort)


मेहरानगढ़ दुर्ग का निर्माण 1459 में राव जोधा के द्वारा करवाया गया था। यह किला 400 फुट की ऊँचाई वाली पहाड़ी पर बना हुआ है। इस किले का फैलाव शहर के मध्य में 5 किलोमीटर तक है। दुर्ग की दीवारों की ऊँचाई 36 फुट और चौड़ाई 21 फुट है। सात द्वार गुजरकर किले में प्रवेश किया जाता है। कुछ विद्वानों का कहना है कि इसका एक आठवाँ द्वार भी है। उसका रास्ता गुप्त रखा गया था। पहले द्वार पर नुकीले कील लगे हुए है, ताकि हाथी उस दरवाजे को तोड़ कर अंदर ना आ सके। 


दुर्ग के परिसर में कई महल और मंदिर देखने को मिलते है। यहाँ पर एक सटी मंदिर भी देखने को मिलता है। राजा मान सिंह की मृत्यु के बाद उनकी पत्नी ने जिंदा चिता में बैठ कर अपने प्राणों की आहुति दे दी थी। जिसके बाद इस मंदिर का निर्माण किया गया था। भारतीय लोगों के लिए 60 रुपए प्रति व्यक्ति और विदेशी लोगों के लिए 400 रुपए प्रति व्यक्ति शुल्क लिया जाता है। 



राव जोधा डेजर्ट रॉक पार्क (Raw Jodha Desert Rock Park)


राव जोधा डेजर्ट रॉक पार्क बहुत ही बढ़िया पर्यटन स्थल है। यहाँ पर सैलानियों को इको पार्क देखने को मिलता है। इस पार्क में कई तरह के पेड़ पौधे लगाए है। राव जोधा डेजर्ट रॉक पार्क का निर्माण 2006 में किया गया था। पर्यटकों को इस पार्क में भारतीय नस्ल के पौधे देखने को मिलते है। सैलानियों को इन पौधों के बारे में उचित जानकारी भी दी जाती है। यह पार्क 200 एकड़ में फैला हुआ है। 



उम्मेद भवन महल (Ummed Bhawan Palace)


उम्मेद भवन महल का निर्माण 1929-1943 तक पूरा किया गया था। इस महल में 347 कमरे है। उम्मेद भवन महल को तीन हिस्सों में बाँट दिया गया है। इसके एक भाग में आज भी शाही परिवार निवास करता है। एक हिस्से को होटल का रूप दे दिया और एक हिस्से को संग्रहालय बना दिया गया है। अपनी बनावट और वास्तुकला के कारण यह महल दुनिया भर में प्रसिद्ध है। सैलानियों के लिए सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक खुला रहता है। इसको देखने के लिए 30 से 100 रुपए तक शुल्क देना होता है। 



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मसूरिया हिल्स बग़ीचा (Masuriya Hills Garden)


मसूरिया हिल्स बग़ीचा बहुत ही सुन्दर है। परिवार के साथ घूमने के लिए या पिकनिक मनाने के लिए बहुत ही अच्छा स्थान है। सैलानी मसूरिया हिल्स बाग़ में बैठ कर सूर्यास्त होने के दृश्य को देखकर आनंदित होते है। यह बग़ीचा एक पहाड़ी के ऊपर स्थित है। सैलानियों को इस बगीचे में घूमने के लिए किसी प्रकार का शुल्क नहीं देना होता है। 



जसवंत थाडा (Jaswant Thada)


1899 में महाराजा जसवंत सिंह की याद में जसवंत थाडा का निर्माण किया गया था। यह मेहरानगढ़ दुर्ग के बहुत ही निकट स्थित है। जसवंत थाडा इमारत का निर्माण संगमरमर पत्थर से किया गया है। संगमरमर पत्थर के ऊपर बहुत ही सुन्दर नक्काशी की गयी है। यहाँ पर आज भी शाही मारवाड़ी परिवार के लोगों का अंतिम संस्कार किया जाता है। यह पहाड़ियों के बिलकुल मध्य में स्थित है। इसे "मारवाड़ ताजमहल" भी कहा जाता है। 



बाल समंद झील (Bal Samand Lake Palace)


बाल समंद झील का निर्माण मानव के द्वारा किया गया है। महाराजा सुर सिंह इस झील के निर्माण कर्ता थे। सैलानी इस झील के आसपास घूमने का आनंद ले सकते है। इस झील के पास में कई तरह के पेड़ देखने को मिलते है। यहाँ का वातावरण बहुत ज्यादा गर्म कम ही होता है। यहाँ पर बाल समंद महल भी है। जिसकी वास्तुकला को देख कर हर कोई मोहित हो जाता है। किसी समय मंडोर ग्रामीण लोगों के लिए जलाशय था। अब इसको के कृतिम झील का रूप दे दिया गया है। 



मंडोर बग़ीचा (Mandore Garden)


मंडोर बग़ीचा को मंडोर गार्डन के नाम से भी जाना जाता है। इस बगीचे का निर्माण 6 वी शताब्दी के आस पास हुआ है। उस समय जोधपुर (Jodhpur) नाम का शहर नहीं था। यह मंडोर नगर से करीब 9 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। सैलानियों के लिए यहाँ पर नायकों का मंदिर और 33 करोड़ देवताओं का मंदिर भी स्थित है। किसी समय मारवाड़ साम्राज्य की राजधानी का नाम मंडोर था। इसके पास मंडोर दुर्ग भी देखने के लायक है, लेकिन इस समय उसकी हालत बहुत ख़राब हो चुकी है।  



खेजड़ला दुर्ग (Khejarla Fort)


खेजड़ला दुर्ग का निर्माण 17 वी शताब्दी के आस पास हुआ है। यह दुर्ग शाही लोगों के महल के रूप में जाना जाता है। इसका निर्माण बलुआ पत्थर और ग्रेनाइट के द्वारा करवाया गया था। यहाँ पर पर्यटकों को भारतीय संस्कृति को बहुत ही करीब से देखने का अवसर प्राप्त होता है। इस समय इस दुर्ग को एक होटल के रूप में बदल दिया गया है। 


गर्मियों के दिनों में इसकी यात्रा ना करें, क्योंकि गर्मी बहुत ज्यादा होती है। यहाँ घूमने के लिए अक्तूबर से फ़रवरी के महीने बढ़िया है। जोधपुर रेलवे स्टेशन से टैक्सी ले कर इस दुर्ग पर पहुँचा जा सकता है। पर्यटकों को यहाँ पर अच्छे कमरे, नाईट लाइफ, जिम और स्पा की सुविधा आसानी के साथ मिल जाती है। यहाँ पर मिलने वाले व्यंजन बहुत ही स्वादिष्ट होते है।  



कायलाना झील (Kaylana Lake)


कायलाना झील एक मानव निर्मित झील है। इस झील का निर्माण महाराजा प्रताप सिंह ने 1872 में करवाया था। सैलानियों को इस झील पर बहुत बढ़ी संख्या में पक्षी देखने को मिलते है। इन पक्षियों में बहुत बड़ी संख्या विदेशी पक्षियों की भी होती है। सर्दियों के दिनों में सरिबेरियन क्रेन को पर्यटक देख सकते है। परिवार के साथ घूमने के लिए बहुत ही बढ़िया पर्यटन स्थल (Tourist Place) है। 



चामुंडा मंदिर (Chamunda Temple)


चामुंडा मंदिर जोधपुर राजस्थान (Rajasthan) बहुत ही प्रसिद्ध है। लोग दूर दूर से चामुंडा माता के दर्शन के लिए आते है। यह मंदिर मेहरानगढ़ दुर्ग के अंदर ही स्थित है। कुछ विद्वानों के अनुसार एक ऋषि के श्राप से नगर को बचने के लिए इस मंदिर का निर्माण किया गया था। इस मंदिर का निर्माण राजा राव जोधा के द्वारा करवाया गया था। यह मंदिर लोगों के सुबह 5 बजे से दोपहर 12 बजे तक, शाम 4 बजे से रात 9 बजे तक खुला रहता है। 



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राय बाग़ महल (Rai Garden Palace)


राय बाग़ का निर्माण 1663 में किया गया था। कहा जाता है कि इस का निर्माण महल में रहने वाली रानियों में से किसी एक ने करवाया था। राग बाग़ महल बहुत ही सुन्दर और प्राचीन ऐतिहासिक इमारत है। इस महल की सुन्दर वास्तुकला को देखकर हर को हैरान हो जाता है। इस महल में लगे संगमरमर के पत्थरों पर की गयी नक्काशी हर किसी को भाती है। हवाई मार्ग, रेल से या बस से आने पर सिर्फ 3 किलोमीटर की और दूरी तय करनी होगी। 



बुलेट बाबा मंदिर (Bullet Baba Temple)


बुलेट मंदिर ॐ बन्ना (Om Banna) को समर्पित है। इस मंदिर के पीछे की कहानी के बारे में स्थानीय लोगों का कहना है कि किसी गांव के नेता ओम सिंह राठौर जी अपनी बुलेट मोटर साइकिल से जा रहे थे। उनका अपनी मोटरसाइकिल पर नियंत्रण नहीं रहा। जिसके बाद उनका NH 56 पर एक्सीडेंट हो गया। जिस में उनकी मृत्यु हो गयी। 


पुलिस वाले उनकी बाइक को थाने में ले गए। अगले दिन बाइक खुद ब खुद हादसे वाले स्थान पर खुद ही पहुंच गयी। पुलिस वालों ने बाइक को फिर थाने में ला कर जंजीरों से बाँध दिया। मोटर साइकिल फिर उसी स्थान पर पहुंच गयी। जिसके बाद लोगों ने इसको चमत्कार समझ कर, इसकी पूजा शुरू कर दी। लोगों ने मिलकर एक मंदिर का निर्माण किया।

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