बुधवार, 31 मार्च 2021

पटिआला पंजाब में घूमने वाले पर्यटन स्थल के बारे में जानकारी

पटिआला पंजाब के सब से प्रमुख शहरों में से एक है। पुराने समय में यह शहर एक रियासत थी। यहाँ पर सैलानियों को मुग़लकालीन और राजपूताना वास्तुकला के सुन्दर दृश्य देखने को मिलते है। इस शहर के लोग बहुत ही मिलनसार है। इसी शहर के नाम से पटिआला सलवार, पटिआला शाही पगड़ी, पटिआला पैग और पटिआला जूती बहुत ही मशहूर है। आइये आज हम बात करते है, पटिआला पंजाब के पर्यटन स्थल (Patiala Punjab Tourist Place) के बारे में विस्तार सहित। 



किला मुबारक (Kila Mubarak)


किला मुबारक की संरचना मिश्रित भवन के आधार पर की गयी है। इसकी बनावट सैलानियों को बहुत ज्यादा भाती है। इसका निर्माण सिख वास्तुकला के आधार पर किया गया है। वास्तव में यह एक ऐतिहासिक किला है, जिसके साथ एक महल जुड़ा हुआ है। महाराजा आला सिंह ने वर्ष 1764 में इसका निर्माण करवाया था। किले को दो भागों में विभाजित किया है। पहला भाग किला अंदरून और दूसरा दरबार हॉल है। दुर्ग के बाहर लगी दुकानें पर्यटकों को अपनी तरफ आकर्षित करती है। 



मोती बाग़ महल (Moti Bagh Palace)


मोती बाग़ एक ऐतिहासिक महल है। यह शहर के मोती बाग़ हिस्से में स्थित है। इस महल का निर्माण महाराजा भूपिंदर सिंह के द्वारा वर्ष 1840 में करवाया गया था। वर्ष 1920 में इस महल के परिसर का निर्माण किया गया था। महल के परिसर में 15 हॉल बने हुए है। मोती बाग़ महल की वास्तुकला राजपूताना और कांगड़ा शैली को दर्शाती है। सैलानियों के देखने के महल में बहुत सारे चित्र और पदक लगे हुए है। 



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शीश महल (Sheesh Mahal)


"पैलेस ऑफ़ मिरर" शीश महल को कहा जाता है। इसका निर्माण 1847 में महाराजा नरेंदर सिंह के द्वारा किया गया था। सैलानियों को पुराने सिक्के, चित्र, तमगे, हथियार और पांडुलिपियां देखने को मिलती है। शीश महल मोती बाग़ महल के पीछे ही बना हुआ है। महल के सामने से एक सुंदर झील बहती है। जिसके ऊपर एक बाँध बना हुआ है। इस बाँध को लक्ष्मण झूला के नाम से भी जाना जाता है। पर्यटकों के लिए सुबह 10 बजे से शाम 5 तक का समय घूमने के लिए है। 



बहादुर गढ़ किला (Qila Bahadurgarh)


बहादुर किले पटिआला पंजाब (Punjab) का निर्माण 1658 में नवाब सैफ खान ने करवाया था। इस ऐतिहासिक किले का पुनर्निर्माण  1837 में महाराजा कर्म सिंह ने करवाया था। इसका क्षेत्रफल 21 किलोमीटर में फैला हुआ है। किले के आसपास में बहुत सारी इस्लाम से जुडी इमारतें देखने को मिलती है। बहादुर गढ़ किले में एक मस्जिद और एक गुरुदुवारा साहिब भी स्थित है। वर्ष 1889 के बाद इसके मैदान में कमांडो की ट्रेनिंग दी जाती है। 



बारादरी बाग़ (Baradari Garden)


बारादरी बाग़ महाराजा राजिंदर सिंह के रहने का स्थान था। इस बाग़ में प्रवेश करने के बारह दरवाजे है।  यहाँ पर पर्यटकों को महाराजा राजिंदर सिंह की मूर्ति के साथ, ऐतिहासिक दस्तावेज देखने को मिलते है। बारादरी बाग़ में कई किस्म के फूल और पौधे देखने को मिलते है। सरकार ने इसके महल परिसर को एक हेरिटेज होटल का रूप दे दिया है। 



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बीर मोती बाग़ वन्य जीव पार्क (Beer Moti Bagh Zoo)


बीर मोती बाग़ वन्य जीव पार्क का 645 हेक्टेयर तक फैलाव है। इसकी शहर से दूरी सिर्फ 5 किलोमीटर है। राजघराने के लोगों के द्वारा इस वन्य जीव पार्क का उपयोग किया जाता था। जिन सैलानियों को प्रकृति के दृश्य और जीव जंतुओं को देखने में रुचि हो, उनके लिए बहुत अच्छी जगह है। यहाँ जंगली सूअर, चीतल, दलदली, बटेर, मैना, मोर और हिरन देखने को मिलते है। 



शाही समाधी (Shahi Samadhan) 


शाही समाधी स्थल पर पटिआला (Patiala) के संस्थापक बाबा आला सिंह जी समाधी बनी है। उनके बाद यहाँ पर कई शाही लोगों की समाधी बनाई गयी है। हेरिटेज फेस्टिवल के दौरान हेरिटेज वाक का आयोजन किया जाता है। यह वाक शाही समाधी से शुरू होकर किला मुबारक तक जाती है। इस वाक में शहर वासियों के अलावा दूसरे शहरों के लोग भी हिस्सा लेते है। 



छत्ता नानु मल्ल (Chatta Nanu Mal)


छत्ता नानु मल्ल कैपटन अमरिंदर सिंह के पुरखों के या महाराजाओं के वजीर थे। वह सड़क के ऊपरी हिस्से में बनी छत के मकान में रहते थे। उसके निवास स्थान को छत्ता नानु मल्ल के नाम से जाना जाता है। यहाँ पर वह लोगों की शिकायतें भी सुना करते थे। सरकार की लापरवाही की वजह से इसकी हालत बहुत ही ख़राब हो चुकी है। यहाँ पर कूड़े के ढेर देखने को मिलते है।


हवेली वाला मोहल्ला (Haweli Wala Moholla)


सैलानियों के देखने के लिए हवेली वाला मोहल्ला बहुत ही बढ़िया पर्यटन स्थल (Tourist Place) है। यहाँ पर बीकानेरी शैली में बानी हवेलियां देखने को मिलती है। इस मोहल्ले की गलियां बहुत संकरी है। दरवाजे और खिड़कियों पर नक्काशी की गयी है। पर्यटकों को इसी मोहल्ले में कई छोटे बड़े मंदिर भी देखने को मिलेंगे। याद रहे गलियां संकरी होने कारण भीड़ बहुत रहती है। 

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