रविवार, 14 मार्च 2021

उड़ीसा के पर्यटक स्थल के बारे में जानिए विस्तार सहित


उड़ीसा (Odisha) ग्रामीण शैली को बहुत ही खूबसूरती के साथ प्रदर्शित करने वाला राज्य है। ग्रामीण जीवन को देखने वाले लोगों के लिए बहुत ही बढ़िया स्थान है। जैसे जैसे वक्त गुजर रहा है, वैसे वैसे उद्योग के क्षेत्र में इसके कदम बहुत तेजी के बढ़ते हुए दिख रहे है। हर साल पूरे देश से बहुत बड़ी संख्या में लोग इस राज्य में घूमने के लिए आते है। जगन्नाथ पूरी मंदिर और कोणार्क मंदिर इसके बहुत ही महत्वपूर्ण पर्यटक स्थल है। इस राज्य को ओडिशा के नाम से भी जाना जाता है। आइये आज हम बाते करते है, उड़ीसा के पर्यटक स्थल (Tourist Place) के बारे में विस्तार सहित जानकारी (Information)। 



कोणार्क सूर्य मंदिर (Konark Sun Temple)


कोणार्क सूर्य मंदिर को विश्व धरोहर की सूचि में यूनेस्को के द्वारा शामिल किया जा चुका है। यह मंदिर हिन्दू भगवान भगवान सूर्य नारायण से सम्बन्धित है। इसकी वास्तुकला को देखने के लिए दुनिया भर के लोग आते है। हर साल इस मंदिर में धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों को आयोजन किया जाता है। कोणार्क सूर्य मंदिर पुरी से 35 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। राजा लांगूल नृसिंहदेव इस मंदिर कर निर्माण करवाया था। राजा की अचानक मौत होने के बाद इसका कार्य पूरा नहीं हो सका। मंदिर की दीवारों पर कई कामुक मूर्तियों का निर्माण करवाया गया है। 

 


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उदयगिरी और खंडगिरी गुफाएं (Udayagiri And Khandagiri Caves)


उदयगिरी और खंडगिरी गुफाएं इसकी राजधानी भुवनेश्वर से करीब 6 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इतिहासकारों का कहना है कि इनमें से कुछ गुफाओं का निर्माण जैन धर्म के लोगों के द्वारा किया गया था। उदयगिरी में 18 गुफाएं और खंडगिरी में 15 गुफाएं स्थित है। इन गुफाओं में सब से ज्यादा महत्व रानी गुफा को दिया जाता है। इनमें जैन धर्म और बौद्ध से सम्बन्धित मूर्तियां देखने को मिलती है। यहाँ आज भी जैन धर्म के लोगों के द्वारा पूजा अर्चना की जाती है। 



हीरा कुंड बाँध (Hirakud Dam)


हीरा कुंड बाँध मानव निर्मित बहुत ही सुन्दर बाँध है। इस बंद का निर्माण साल 1956 में महानदी के ऊपर किया गया था। यह 56 किलोमीटर लम्बा है। लोगों के घूमने के लिए 21 किलोमीटर लम्बी ड्राइव थरु सड़क है। यहाँ से लोगों को प्रकृति के सुन्दर दृश्यों को देखने का अवसर प्राप्त होता है। इसके किनारों पर दो मीनार है। एक का नाम गाँधी मीनार और नेहरू मीनार है। यह दुनिया का सब से बड़ा बाँध है। 



भितरकनिका राष्ट्रीय उद्यान (Bhitarkanika National Park)


भितरकनिका राष्ट्रीय उद्यान जीव जंतुओं में रुचि रखने वाले सैलानियों के लिए उपर्युक्त स्थान है। जीव जंतुओं के साथ कुदरत के बहुत ही लुभावने दृश्य देखने को मिलते है। यह 145 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। खारे पानी में रहने वाले मगरमच्छ, काला बाज, अजगर, पनकौआ मुख्य रूप से देखे जा सकते है। पर्यटकों को कुछ कछुए भी देखने को मिलते है। 



पुरी (Puri)


पुरी उड़ीसा (Odisha) को हिन्दू धर्म में धार्मिक नगरी का स्थान दिया गया है। यहाँ पर बहुत बड़ी संख्या में हिन्दू मंदिर देखने को मिलते है। चार धाम में एक मंदिर जगन्नाथ मंदिर पुरी में स्थित है। इस नगर से लगभग 8 किलोमीटर की दूरी पर नुआनई नदी के मुहाने पर बालीघई तट स्थित है। यह परिवार के साथ घूमने के लिए बहुत ही अच्छी जगह है। 



ट्राईबल संग्रहालय (Tribal Museum)


ट्राईबल संग्रहालय भुवनेश्वर में स्थित है। इसमें उड़ीसा की आदिवासी जनजाति के बारे में जानकारी को सहेज कर रखा गया है। पर्यटकों के आदिवासियों के त्यौहार, रहन-सहन के साथ उनकी सभ्यता के बारे में जानकारी (Information) मिलती है। पर्यटकों के घूमने के लिए बहुत ही बढ़िया स्थान है। उड़ीसा की यात्रा पर जाने वाले लोग ट्राईबल संग्रहालय जाना नहीं भूलते है। 



नंदन कान्हा चिड़ियाघर (Nandan Kanan Zoo)


बच्चों के लिए विशेष रूप से बहुत ही बढ़िया पर्यटक स्थल (Tourist Place) नंदन कान्हा चिड़ियाघर है। यहाँ पर कई प्रकार के जंगली जीव देखने को मिलते है। यह भुवनेश्वर से लगभग 20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। सैलानी विशेष रूप से सफ़ेद बाघ, शेर, अजगर, मगरमच्छ के अलावा सफ़ेद पीठ वाले गिद्द को भी देख सकते है। सैलानी सुबह ७.३० से शाम पांच बजे तक नंदन कान्हा चिड़ियाघर में घूम सकते है। पिकनिक मनाने के लिए कुछ शुल्क देना होता है।



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धौलीगिरी (Dhulgiri)


धौलीगिरी में सैलानियों को पहाड़ियों के प्राकृतिक सुन्दर नजारे देखने को मिलते है। इन पहाड़ियों पर कलिंगा का युद्ध हुआ था। धौलीगिरी को बौद्ध धर्म में बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है।  यहाँ पर शांति स्तूप भी स्थापित है। इसको शांति पैगोड़ा के नाम से भी जाना जाता है। शांति स्तूप में बौद्ध के पैरो के निशान वाले पत्थर और पेड़ भी देखने को मिलते है। सैलानियों को बौद्ध धर्म से सम्बन्धित फिल्म को दिखाया जाता है। इस फिल्म की अवधि करीब 35 मिनट की होती है। पर्यटकों कई चट्टानी गुफाएं और प्राचीन मंदिर देखने को मिलते है। 



चिलिका झील (Chilika Lake)


चिलिका झील को चिल्का झील के नाम से भी जाना जाता है। इसका क्षेत्रफल 1100 वर्ग किलोमीटर है। यहाँ भारत में सब से बड़ी और दुनिया की दूसरी सब से बड़ी खारे पानी की झील है। बरसात के दिनों में इस झील का पानी मीठा हो जाता है। इस झील पर 160 प्रजाति के पक्षी देखने को मिलते है। चिलिका झील पर मछली पालन का कार्य मुख्य रूप से किया जाता है। 



सिमलीपाल राष्ट्रीय उद्यान (Simlipal National Park)


सिमलीपाल राष्ट्रीय उद्यान मयूरभंज जिले में स्थित है। इस उद्यान में 90 से ज्यादा बंगाली शेर और 400 से ज्यादा हाथी देखने को मिलते है। जंगली सांड को भी पर्यटकों के द्वारा देखा जा सकता है। इसके अंदर बना झरना पर्यटकों को अपनी तरफ आकर्षित करता है। सिमलीपाल राष्ट्रीय उद्यान का नाम सेमल या लाल कपास के नाम पर पड़ा है। इस उद्यान का क्षेत्रफल लगभग 2277 किलोमीटर है।

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