मंगलवार, 23 मार्च 2021

गोल्डन टेम्पल या हरमंदिर साहिब अमृतसर पंजाब के बारे में विस्तार सहित जानकारी।


हरमिंदर साहिब या गोल्डन टेम्पल गुरुदवारा साहिब को सिख धर्म में बहुत ही पवित्र स्थान माना जाता है। दुनिया के कोने कोने से हर सिखों के साथ दूसरे धर्मों के लोग भी यहाँ पर नतमस्तक होने के लिए आते है। यहाँ पर आ कर हर किसी को बहुत ज्यादा शांति मिलती है। आइए आज हम बात करते है, गोल्डन टेम्पल (Golden Temple)  या हरमंदिर साहिब (Hraminder sahib) अमृतसर (Amritsar) पंजाब (Punjab) के बारे में विस्तार सहित।  



गोल्डन टेम्पल का इतिहास  (Golden Temple History)


सिखों के तीसरे गुरु गुरु अमरदास जी ने "अमृतसर" या "अमृत सरोवर" को बनाने के बारे में अपने विचार रखे थे। अमृत सरोवर को सिखों के चौथे गुरु रामदास जी और बाबा बुड्ढा जी की निगरानी में बनवाना शुरू किया। सरोवर के साथ एक नगर को बसने की योजना भी बनाई गयी। जिस के लिए जमीन गुरु राम दास जी ने जमीदारों को पूरे पैसे दे कर ले ली थी। 


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जमीदारों से जमीन लेने के बाद 1570 में नगर को बसाने का और तालाब बनाने का कार्य शुरू हुआ। यह कार्य 1577 में पूरा हुआ था। गुरु अर्जुन देव जी सिखों के पांचवें गुरु जी ने एक मुसलमान फ़कीर हजरत साईं मियाँ मीर जी से हरमंदिर साहिब की नींव रखवाई थी। गुरु जी ने दरबार साहिब का नक्शा खुद ही तैयार किया था। दरबार साहिब के निर्माण कार्य में गुरु राम दास जी, बाबा बुड्ढा जी, भाई गुरदास जी और कई बड़ी हस्तियों ने बहुत ज्यादा योगदान दिया था। 



दरबार साहिब की बनावट (Durbar Sahib Design)


हिन्दू धर्म की मर्यादा के अनुसार मंदिर की जमीन की ऊँचा रखा जाता है। गुरु अर्जुन देव जी ने दरबार साहिब को जमीन की निचली सतह पर रख कर बनवाया है। यह सरोवर के बिलकुल मध्य में स्थित है। 

इसके मुख्य दरबार में चार दरवाजे और एक ही रास्ता है। इसका तात्पर्य यह है कि दुनिया की चारों दिशाओं के लोग, चाहे किसी भी धर्म के हो, किसी भी जात के, वह बिना किसी भेद भाव के इस दरबार में नतमस्तक होने के लिए आ सकते है। 


मुख्य दरबार की दीवारों पर सोने की परत वाली चादर लगी हुई है। यहाँ पर बहुत ही सुन्दर नक्काशी भी की गयी है। चार दरवाजों को बहुत ही सुन्दर तरीकों से सजाया गया है। गोल्डन टेम्पल के किनारों पर चार गुंबद और एक मध्य में बड़ा गुंबद बना हुआ है। सोने की चादर को महाराजा रणजीत सिंह जी ने 1830 के लगभग चढ़वाया था। जिसके बाद से इसे स्वर्ण मंदिर या गोल्डन टेम्पल कहा जाने लगा।  


दरबार साहिब आने वाली संगत या भक्तों के लिए हर समय लंगर चलता रहता है। कोई भी व्यक्ति किसी भी धर्म का यहाँ पर मुफ्त में भर पेट खाना खा सकता है। हरमंदिर साहिब की रसोई को दुनिया की सब से बड़ी रसोई के रूप में जाना जाता है। यहां पर प्रति दिन 40000 से 50000 के मध्य में लोग लंगर खाते है। ऐसी मिसाल दुनिया में कहीं और या किसी दूसरे धर्म में देखने को नहीं मिलती है।  



कैसे जाए (How To Reach)


गोल्डन टेम्पल जाने के लिए अमृतसर (Amritsar) पंजाब (Punjab) में अंतर्राष्ट्रीय हवाई मार्ग भी स्थित है। यहाँ से जाने के लिए टैक्सी या ऑटो मिल जाता है। बस अड्डे से पैदल भी जाया जा सकता है, नहीं तो ऑटो या रिक्शा भी लिया जा सकता है। अमृतसर से पूरे देश के राजमार्ग जुड़े हुए है। लोग अपनी गाड़ी में भी आराम के साथ आ सकते है। यहाँ पर मुफ्त में कार पार्किंग की सुविधा भी दी जाती है। 


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बाहर से आने वाले लोगों के लिए मुफ्त में रहने के लिए कमरे भी मिल जाते है। कमरे अगर खाली ना हो तो धर्मशालाएं भी बनी हुई है। यहाँ भक्तों और सैलानियों के लिए हर प्रकार की सुविधा उपलब्ध है। दीवाली वाले दिन दरबार साहिब को बहुत ही सुन्दर तरीके से सजाया जाता है। आतिशबाजी भी बहुत बड़े स्तर पर देखने को मिलती है।  




हरमिंदर साहिब में किन बातों का ध्यान रखे (What Is Important To Keep In Mind In Harminder Sahib)


हरमिंदर साहिब में सर को ढक कर प्रवेश करें। प्रवेश करते समय किसी प्रकार का नशा न किया हो और ना ही अंदर ले कर जाए। गुरुदवारा साहिब के तालाब में तैरना बिलकुल मना है। दरबार साहिब के अंदर थूके ना। लंगर के लिए आराम से जाए और उतना ही ले जितना आप खा सके। थाली में अन्न बिलकुल भी ना छोड़े।  

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