बठिंडा शहर पंजाब के पर्यटन स्थल के बारे में जानकारी


बठिंडा पंजाब का एक ऐतिहासिक शहर है। इस शहर को "मालवे का दिल" भी कहा जाता है। इसका इतिहास का करीब 3000 साल पुराना है। इतिहासकार इस शहर को पंजाब का सब से पुराना शहर मानते है। कहा जाता है कि प्राचीन समय में कुषाण साम्राज्य का एक भाग था। इसका प्राचीन नाम विक्रमगढ़ था। विक्रमगढ़ नाम को जैसलमेर के भाटी राजपूत राजा ने बदलकर बठिंडा कर दिया था। 


यह शहर कई बड़े बड़े राजाओं के अधीन रह चुका है। सैलानियों को यहाँ के पर्यटन स्थल खूब लुभाते है। यहाँ की संस्कृति, मेहमान नवाज़ी की पूरी दुनिया कायल है। यह नगर छोटा जरूर है, लेकिन सुंदरता के मामले में बड़े बड़े शहरों को मात देता है। आइये आज हम बात करते है. बठिंडा पंजाब के पर्यटन स्थल (Bathinda Punjab Tourist Place) के बारे में विस्तार सहित। 



बठिंडा झील (Bathinda Lake) 


शिकारा नाव में बैठने के लिए, पंजाब (Punjab) के लोगों को कश्मीर नहीं जाना पड़ता है। बठिंडा झील में शिकारा नाव पर बैठकर झील के सुन्दर दृश्यों को देखा जा सकता है। यह पर्यटन स्थल परिवार के साथ घूमने के लिए बहुत बढ़िया है। प्रतिदिन बहुत बड़ी संख्या में पर्यटक यहाँ पर घूमने के लिए आते है। इस झील के किनारे पर आकर शरीर ताज़गी से भर जाता है। 



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किला मुबारक (Kila Mubarak)


किला मुबारक या बठिंडा किला इस नगर का प्रमुख पर्यटन स्थल है। इस किले का सम्बन्ध प्राचीन कुषाण राजवंश से है। कुछ इतिहासकारों का कहना है कि रज़िया सुलतान, जो कि पहली हिंदुस्तान की पहली महिला शासक थी। उसे इस स्थान पर हराकर बंदी बना कर रखा गया था। इतिहास में रुचि रखने वाले लोगों के लिए बहुत ही अच्छा स्थान है। पर्यटकों के लिए सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक, बिना किसी शुल्क के खुला रहता है। 



पीर हाजी रतन मजार (Peer Haji Ratan Majar)


मुसलिम धर्म में आस्था रखने वाले लोगों के लिए पीर हाजी रतन मजार बहुत ही महत्वपूर्ण है। पीर हाजी रतन मजार पर हर दिन बहुत बहुत बड़ी संख्या में भक्त चादर चढ़ाने के लिए आते है। यहाँ पर आकर लोगों की मनोकामनाएं पूरी होती है। लोगों के मन को बहुत ज्यादा शांति मिलती है। वीरवार वाले दिन इस मजार पर बहुत ज्यादा भीड़ होती है। 



बीर तालाब चिड़िया घर (Bir Talab Zoo)


बीर तालाब चिड़िया घर की स्थापना वर्ष 1978 में रेड क्रॉस सोसाइटी के द्वारा की गयी थी। इसका क्षेत्रफल 161 एकड़ में फैला हुआ है। इसको जूलॉजिकल गार्डन या मिनी चिड़िया घर भी कहा जाता है। बच्चों या परिवार के साथ घूमने के लिए बहुत ही बढ़िया जगह है। यहाँ पर कई किस्म के पक्षी और जानवर देखने को मिलते है। यहाँ पर कई प्रकार की वनस्पतियों को भी देखने का अवसर मिलता है।



लक्खी जंगल (Lakhi Forest)


लक्खी जंगल बठिंडा (Bathinda) शहर से 15 किलोमीटर की दूरी पर, मुक्तसर शहर की तरफ जाते हुए स्थित है। कुछ विद्वानों के द्वारा कहा जाता है कि इस जंगल में एक लाख से ज्यादा पेड़ होने कारण, इस का नाम सिखों के दसवें गुरु गुरु गोबिंद सिंह जी ने लक्खी जंगल रखा था। कुछ का कहना है कि यहाँ पर सिख मुगलों से बचने के लिए रहते थे। यहाँ पर एक प्राचीन गुरुदुवारा साहिब भी स्थित है। जहाँ पर सैलानी नतमस्तक होने के लिए जरूर जाते है। 



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तख़्त श्री दमदमा साहिब (Takht Shri Damdama Sahib)


सिख इतिहास में पाँच तख़्त है। इन तख्तों से सिख धर्म के हित के लिए फैसले लिए जाते है।  तख़्त श्री दमदमा साहिब पाँच तख्तों में से एक है। यहाँ पर हर दिन बहुत बड़ी संख्या में सिख अनुयायी नतमस्तक होने के लिए आते है। यहाँ का वातावरण बहुत ही भक्तिमय और शांति से भरा है। सिखों के दसवें गुरु गुरु गोबिंद सिंह जी इस स्थान पर करीब साढ़े नौ महीने रहे थे। 



रोज गार्डन (Rose Garden)


रोज गार्डन बठिंडा परिवार के साथ घूमने के लिए बढ़िया पर्यटन स्थल (Tourist Place) है। बच्चों को यह पार्क बहुत ज्यादा भाता है। यह 40000 वर्ग मीटर में फैला हुआ है। यहाँ पर कई तरह के पेड़ पौधे देखने को मिलते है। जिनमें गुलाब की सब से ज्यादा किस्में देखने को मिलती है। रोज गार्डन का वातावरण हर किसी को लुभाता है। पर्यटकों के लिए सुबह 5.30 से रात 10 बजे तक खुला रहता है।   

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