अमृतसर पंजाब के पर्यटन स्थल के बारे में विस्तार सहित जानकारी


अमृतसर औद्योगिक और आध्यात्मिक नज़र से पंजाब का बहुत ही महत्वपूर्ण शहर है। इस शहर में सिखों का सब से पवित्र स्थान हरमंदिर साहिब स्थित है। वाघा बॉर्डर, जलिआंवाला बाग़, दुर्गियाणा मंदिर, महाराजा रणजीत सिंह संग्रहालय और खैर उद्दीन मस्जिद सैलानियों के घूमने लिए बहुत ही बढ़िया स्थान है। 


पंजाबी लोग अपने मेहमानों की बहुत सेवा करते है। यहाँ के लोग बहुत ही खुश मिज़ाज के होते है। अमृतसर में हाथ से बनी चीज़ें, स्वादिष्ट भोजन, लोक नृत्य भागड़ा - गिद्दा हर एक पर्यटक दिल मोह लेते है। 1984 ओपरेशन ब्लू स्तर अमृतसर पंजाब के के लिए बहुत ज्यादा दुःख से भरा समय था। जिस के बारे में सोचने भर से रूह काँप उठती है। इस दुखद समय के बाद पंजाब के लोगों ने फिर से खुद को खड़ा किया। आइये आज हम बात करते है, अमृतसर पंजाब के पर्यटन स्थल (Amritsar Punjab tourist place Information) के बारे में विस्तार सहित जानकारी। 



गोल्डन टेम्पल (Golden Temple) 


गोल्डन टेम्पल सिख धर्म में बहुत ही महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है। गोल्डन टेम्पल को हरमंदिर साहिब और दरबार साहिब के नाम से जाना जाता है। सिख लोगों के अलावा और भी धर्मों के लोग इस स्थान पर नतमस्तक होने के लिए आते है। हरमंदिर साहिब की नींव गुरु अर्जुन देव जी ने मुसलिम फ़कीर हजरत साईं मियाँ मीर जी से रखवाई थी। 


दरबार साहिब का निर्माण सरोवर के बिलकुल मध्य में किया गया है। मुख्य दरबार में चारों दिशा में दरवाजे, प्रवेश करने के लिए एक ही रास्ता बनाया गया है। इसका कारण यह है कि दुनिया के किसी भी कोने से, किसी भी धर्म, जात पात के लोग, एक ही रास्ते पर चलकर इस स्थान पर सजदा करने के लिए आये। 


हरमंदिर साहिब के मुख्य दरबार पर सोने की परत वाली चादर चढ़ाई गयी है। जिसकी वजह से इस स्थान को स्वर्ण मंदिर या गोल्डन टेम्पल कहा जाता है। इस गुरुदवारा साहिब में हर समय लंगर चलता रहता है। यहाँ पर दुनिया की सब से बड़ी रसोई है। हर 40000 से 50000 के करीब लोग लंगर खाते है। लोगों को यहाँ पर आकर बहुत ज्यादा शांति मिलती है। 


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अकाल तख़्त अमृतसर (Akal Takhat, Amritsar)


अकाल तख़्त अमृतसर (Amritsar) पाँच अकाल तख्तों में सब से पहला अकाल तख़्त है। इसका निर्माण सिखों के छठे गुरु हरगोबिंद जी ने 1606 में करवाया था। इस स्थान से सिखों से जुड़े अहम फैसले लिए जाते है। इतिहास गवाह है कि इस पर कई बार हमले हुए है। इस हमलों में इसका बहुत ज्यादा नुकसान हुआ है। 1984 में ओप्रशन ब्लू स्टार के दौरान इसकी इमारत को बहुत ज्यादा नुकसान पहुँचा था। 



जलियाँवाला बाग़ (Jalian Wala Bagh)


जलियाँवाला बाग़ हरमंदिर साहिब के बहुत ही समीप है। 13 अप्रैल 1919 को वैशाखी वाले दिन अंग्रेजी अफसर ब्रिगेडियर जनरल रेजिनाल्ड एडवर्ड डायर ने निहत्थे लोगों पर गोलियां चलवाई थी। इस गोलीबारी में हजारों लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा था। जलियाँवाला बाग़ तीन और से घिरा हुआ और एक तरफ से बहुत ही संकरा रास्ता है। 


इस हत्याकांड में कई छोटे छोटे बच्चे भी मारे गए थे। इस हत्याकांड की पूरी दुनिया में निंदा हुई थी। शहीद उधम सिंह ने लंदन के कॉक्सस्टान हॉल में ब्रिगेडियर जनरल रेजिनाल्ड एडवर्ड डायर को सामने से गोली मार कर इस हत्याकांड का बदला लिया था। इसके बाद उनको गिरफ्तार कर के, फांसी की सज़ा दी गयी थी। 


यहाँ पर आज भी गोलियों के निशान देखने को मिलते है। इस बाग़ में एक कुआँ भी स्थित है। इस कुएँ में लोग अपनी जान बचाने के लिए कूदे थे। आज इस कुएं को ऊपर से बंद कर दिया गया है। जलियाँवाला बाग़ हत्याकांड की याद में एक स्मारक बनाया गया है। इस स्मारक का उद्घाटन 13 अप्रैल 1961 में डॉक्टर राजेंदर प्रसाद ने किया था। 



वाघा बॉर्डर (Wagha Border) 

 

वाघा बॉर्डर भारत और पाकिस्तान की सीमा को दर्शाने वाला पर्यटक स्थल (Tourist Place) है। इसको अटारी बॉर्डर के नाम से भी जाना जाता है। यहाँ से अमृतसर 28 किलोमीटर और लाहौर  22 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यहाँ पर लोग शाम को होने वाली परेड का लुत्फ लेने के लिए आते है। इसके दोनों और सैलानियों के बैठने के लिए जगह बनाई गयी है। यहाँ परेड पर्यटकों को रोमांच से भर देती है। 



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गुरु का महल (Guru Ka Mahal)


गुरु का महल गुरुदुवारा साहिब गोल्डन टेम्पल के बहुत ही निकट में स्थित है। इस गुरुदुवारा साहिब की स्थापना गुरु राम दास ने अपने परिवार से साथ रहने के लिए करवाया था। इस स्थान पर गुरु रामदास जी के पुत्र और सिखों के पाँचवें गुरु अर्जुन देव जी का विवाह हुआ था। सिखों के छठे गुरु हरगोबिंद सिंह  जी का विवाह और उनके पुत्र बाबा अटल राय जी और गुरु तेग बहादुर जी का जन्म यहीं पर हुआ था। 



दुर्गियाना मंदिर (Durgiana Mandir)


दुर्गियाना मंदिर लोहा गेट के निकट अमृतसर, पंजाब (Punjab) में बहुत ही सुन्दर हिन्दू तीर्थ स्थल है। इस मंदिर को लक्ष्मी नारायण मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। इसका निर्माण 20 वी सदी में किया गया था। लक्ष्मी नारायण मंदिर की बनावट हरमिंदर साहिब से थोड़ी बहुत मिलती जुलती है। यह मंदिर माता दुर्गा को समर्पित है। पंडित मदन मोहन मालवीय ने इस मंदिर की नींव रखी थी। मंदिर का मुख्य द्वार नक्काशी युक्त चाँदी की परत वाला है।  जिस के कारण इसको रजत मंदिर भी कहा जाता है।  



महाराजा रणजीत सिंह संग्रहालय (Maharaja Ranjit Singh Museum)


महाराजा रणजीत सिंह संग्रहकाय में सैलानियों को ऐतिहासिक वस्तुओं को देखने का अवसर प्राप्त होता है। इन वस्तुओं में हथियार, पांडुलिपियां, पुराने सिक्के, कवच और पेंटिंग शामिल है। यह संग्रहालय समर पैलेस का बदला हुआ रूप है। समर पैलेस को महाराजा रणजीत सिंह ने राम बाग़ में बनवाया था। समर पैलेस को जगजीवन राम जी ने एक संग्रहालय के रूप में लोगों के सामने पेश किया था। सैलानियों के घूमने के लिए समय सुबह 10 बजे से शाम पाँच बजे तक का है। यह सोमवार को बंद रहता है।   



खैर उद्दीन मस्जिद (Khair Ud Din Masjid)


खैर उद्दीन मस्जिद मुसलिम धर्म में आस्था रखने वाले लोगों के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान है। इस मस्जिद की वास्तुकला बहुत ही शानदार है। मोहम्मद खैर उद्दीन ने इसको बनवाया था। यह मस्जिद अमृतसर में हॉल बाजार में गाँधी दरवाजे के समीप में स्थित है। एक ही समय में सैकड़ों मुस्लिम भाई एक साथ नमाज अदा कर सकते है।  



पार्टिशन संग्रहालय (Partition Museum)


पार्टिशन म्यूजियम में हिंदुस्तान के बटवारे के समय में हुई घटनाओं को संयोजित कर के रखा गया है। यह लाखों लोगों की दर्द भरी दास्तान को संभाले हुए है। इसका उद्घाटन पंजाब के मुख्यमंत्री कैपटन अमरिंदर सिंह ने किया था। इस संग्रहालय में 14 गैलरी बनाई गयी है। इन गैलरियों में उस समय के अख़बार, फोटो, वीडियो, डॉक्यूमेंट्री फिल्में और लोगों की बातचीत भी शामिल है। 

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