बुधवार, 31 मार्च 2021

पटिआला पंजाब में घूमने वाले पर्यटन स्थल के बारे में जानकारी

पटिआला पंजाब के सब से प्रमुख शहरों में से एक है। पुराने समय में यह शहर एक रियासत थी। यहाँ पर सैलानियों को मुग़लकालीन और राजपूताना वास्तुकला के सुन्दर दृश्य देखने को मिलते है। इस शहर के लोग बहुत ही मिलनसार है। इसी शहर के नाम से पटिआला सलवार, पटिआला शाही पगड़ी, पटिआला पैग और पटिआला जूती बहुत ही मशहूर है। आइये आज हम बात करते है, पटिआला पंजाब के पर्यटन स्थल (Patiala Punjab Tourist Place) के बारे में विस्तार सहित। 



किला मुबारक (Kila Mubarak)


किला मुबारक की संरचना मिश्रित भवन के आधार पर की गयी है। इसकी बनावट सैलानियों को बहुत ज्यादा भाती है। इसका निर्माण सिख वास्तुकला के आधार पर किया गया है। वास्तव में यह एक ऐतिहासिक किला है, जिसके साथ एक महल जुड़ा हुआ है। महाराजा आला सिंह ने वर्ष 1764 में इसका निर्माण करवाया था। किले को दो भागों में विभाजित किया है। पहला भाग किला अंदरून और दूसरा दरबार हॉल है। दुर्ग के बाहर लगी दुकानें पर्यटकों को अपनी तरफ आकर्षित करती है। 



मोती बाग़ महल (Moti Bagh Palace)


मोती बाग़ एक ऐतिहासिक महल है। यह शहर के मोती बाग़ हिस्से में स्थित है। इस महल का निर्माण महाराजा भूपिंदर सिंह के द्वारा वर्ष 1840 में करवाया गया था। वर्ष 1920 में इस महल के परिसर का निर्माण किया गया था। महल के परिसर में 15 हॉल बने हुए है। मोती बाग़ महल की वास्तुकला राजपूताना और कांगड़ा शैली को दर्शाती है। सैलानियों के देखने के महल में बहुत सारे चित्र और पदक लगे हुए है। 



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शीश महल (Sheesh Mahal)


"पैलेस ऑफ़ मिरर" शीश महल को कहा जाता है। इसका निर्माण 1847 में महाराजा नरेंदर सिंह के द्वारा किया गया था। सैलानियों को पुराने सिक्के, चित्र, तमगे, हथियार और पांडुलिपियां देखने को मिलती है। शीश महल मोती बाग़ महल के पीछे ही बना हुआ है। महल के सामने से एक सुंदर झील बहती है। जिसके ऊपर एक बाँध बना हुआ है। इस बाँध को लक्ष्मण झूला के नाम से भी जाना जाता है। पर्यटकों के लिए सुबह 10 बजे से शाम 5 तक का समय घूमने के लिए है। 



बहादुर गढ़ किला (Qila Bahadurgarh)


बहादुर किले पटिआला पंजाब (Punjab) का निर्माण 1658 में नवाब सैफ खान ने करवाया था। इस ऐतिहासिक किले का पुनर्निर्माण  1837 में महाराजा कर्म सिंह ने करवाया था। इसका क्षेत्रफल 21 किलोमीटर में फैला हुआ है। किले के आसपास में बहुत सारी इस्लाम से जुडी इमारतें देखने को मिलती है। बहादुर गढ़ किले में एक मस्जिद और एक गुरुदुवारा साहिब भी स्थित है। वर्ष 1889 के बाद इसके मैदान में कमांडो की ट्रेनिंग दी जाती है। 



बारादरी बाग़ (Baradari Garden)


बारादरी बाग़ महाराजा राजिंदर सिंह के रहने का स्थान था। इस बाग़ में प्रवेश करने के बारह दरवाजे है।  यहाँ पर पर्यटकों को महाराजा राजिंदर सिंह की मूर्ति के साथ, ऐतिहासिक दस्तावेज देखने को मिलते है। बारादरी बाग़ में कई किस्म के फूल और पौधे देखने को मिलते है। सरकार ने इसके महल परिसर को एक हेरिटेज होटल का रूप दे दिया है। 



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बीर मोती बाग़ वन्य जीव पार्क (Beer Moti Bagh Zoo)


बीर मोती बाग़ वन्य जीव पार्क का 645 हेक्टेयर तक फैलाव है। इसकी शहर से दूरी सिर्फ 5 किलोमीटर है। राजघराने के लोगों के द्वारा इस वन्य जीव पार्क का उपयोग किया जाता था। जिन सैलानियों को प्रकृति के दृश्य और जीव जंतुओं को देखने में रुचि हो, उनके लिए बहुत अच्छी जगह है। यहाँ जंगली सूअर, चीतल, दलदली, बटेर, मैना, मोर और हिरन देखने को मिलते है। 



शाही समाधी (Shahi Samadhan) 


शाही समाधी स्थल पर पटिआला (Patiala) के संस्थापक बाबा आला सिंह जी समाधी बनी है। उनके बाद यहाँ पर कई शाही लोगों की समाधी बनाई गयी है। हेरिटेज फेस्टिवल के दौरान हेरिटेज वाक का आयोजन किया जाता है। यह वाक शाही समाधी से शुरू होकर किला मुबारक तक जाती है। इस वाक में शहर वासियों के अलावा दूसरे शहरों के लोग भी हिस्सा लेते है। 



छत्ता नानु मल्ल (Chatta Nanu Mal)


छत्ता नानु मल्ल कैपटन अमरिंदर सिंह के पुरखों के या महाराजाओं के वजीर थे। वह सड़क के ऊपरी हिस्से में बनी छत के मकान में रहते थे। उसके निवास स्थान को छत्ता नानु मल्ल के नाम से जाना जाता है। यहाँ पर वह लोगों की शिकायतें भी सुना करते थे। सरकार की लापरवाही की वजह से इसकी हालत बहुत ही ख़राब हो चुकी है। यहाँ पर कूड़े के ढेर देखने को मिलते है।


हवेली वाला मोहल्ला (Haweli Wala Moholla)


सैलानियों के देखने के लिए हवेली वाला मोहल्ला बहुत ही बढ़िया पर्यटन स्थल (Tourist Place) है। यहाँ पर बीकानेरी शैली में बानी हवेलियां देखने को मिलती है। इस मोहल्ले की गलियां बहुत संकरी है। दरवाजे और खिड़कियों पर नक्काशी की गयी है। पर्यटकों को इसी मोहल्ले में कई छोटे बड़े मंदिर भी देखने को मिलेंगे। याद रहे गलियां संकरी होने कारण भीड़ बहुत रहती है। 

सोमवार, 29 मार्च 2021

बठिंडा शहर पंजाब के पर्यटन स्थल के बारे में जानकारी


बठिंडा पंजाब का एक ऐतिहासिक शहर है। इस शहर को "मालवे का दिल" भी कहा जाता है। इसका इतिहास का करीब 3000 साल पुराना है। इतिहासकार इस शहर को पंजाब का सब से पुराना शहर मानते है। कहा जाता है कि प्राचीन समय में कुषाण साम्राज्य का एक भाग था। इसका प्राचीन नाम विक्रमगढ़ था। विक्रमगढ़ नाम को जैसलमेर के भाटी राजपूत राजा ने बदलकर बठिंडा कर दिया था। 


यह शहर कई बड़े बड़े राजाओं के अधीन रह चुका है। सैलानियों को यहाँ के पर्यटन स्थल खूब लुभाते है। यहाँ की संस्कृति, मेहमान नवाज़ी की पूरी दुनिया कायल है। यह नगर छोटा जरूर है, लेकिन सुंदरता के मामले में बड़े बड़े शहरों को मात देता है। आइये आज हम बात करते है. बठिंडा पंजाब के पर्यटन स्थल (Bathinda Punjab Tourist Place) के बारे में विस्तार सहित। 



बठिंडा झील (Bathinda Lake) 


शिकारा नाव में बैठने के लिए, पंजाब (Punjab) के लोगों को कश्मीर नहीं जाना पड़ता है। बठिंडा झील में शिकारा नाव पर बैठकर झील के सुन्दर दृश्यों को देखा जा सकता है। यह पर्यटन स्थल परिवार के साथ घूमने के लिए बहुत बढ़िया है। प्रतिदिन बहुत बड़ी संख्या में पर्यटक यहाँ पर घूमने के लिए आते है। इस झील के किनारे पर आकर शरीर ताज़गी से भर जाता है। 



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किला मुबारक (Kila Mubarak)


किला मुबारक या बठिंडा किला इस नगर का प्रमुख पर्यटन स्थल है। इस किले का सम्बन्ध प्राचीन कुषाण राजवंश से है। कुछ इतिहासकारों का कहना है कि रज़िया सुलतान, जो कि पहली हिंदुस्तान की पहली महिला शासक थी। उसे इस स्थान पर हराकर बंदी बना कर रखा गया था। इतिहास में रुचि रखने वाले लोगों के लिए बहुत ही अच्छा स्थान है। पर्यटकों के लिए सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक, बिना किसी शुल्क के खुला रहता है। 



पीर हाजी रतन मजार (Peer Haji Ratan Majar)


मुसलिम धर्म में आस्था रखने वाले लोगों के लिए पीर हाजी रतन मजार बहुत ही महत्वपूर्ण है। पीर हाजी रतन मजार पर हर दिन बहुत बहुत बड़ी संख्या में भक्त चादर चढ़ाने के लिए आते है। यहाँ पर आकर लोगों की मनोकामनाएं पूरी होती है। लोगों के मन को बहुत ज्यादा शांति मिलती है। वीरवार वाले दिन इस मजार पर बहुत ज्यादा भीड़ होती है। 



बीर तालाब चिड़िया घर (Bir Talab Zoo)


बीर तालाब चिड़िया घर की स्थापना वर्ष 1978 में रेड क्रॉस सोसाइटी के द्वारा की गयी थी। इसका क्षेत्रफल 161 एकड़ में फैला हुआ है। इसको जूलॉजिकल गार्डन या मिनी चिड़िया घर भी कहा जाता है। बच्चों या परिवार के साथ घूमने के लिए बहुत ही बढ़िया जगह है। यहाँ पर कई किस्म के पक्षी और जानवर देखने को मिलते है। यहाँ पर कई प्रकार की वनस्पतियों को भी देखने का अवसर मिलता है।



लक्खी जंगल (Lakhi Forest)


लक्खी जंगल बठिंडा (Bathinda) शहर से 15 किलोमीटर की दूरी पर, मुक्तसर शहर की तरफ जाते हुए स्थित है। कुछ विद्वानों के द्वारा कहा जाता है कि इस जंगल में एक लाख से ज्यादा पेड़ होने कारण, इस का नाम सिखों के दसवें गुरु गुरु गोबिंद सिंह जी ने लक्खी जंगल रखा था। कुछ का कहना है कि यहाँ पर सिख मुगलों से बचने के लिए रहते थे। यहाँ पर एक प्राचीन गुरुदुवारा साहिब भी स्थित है। जहाँ पर सैलानी नतमस्तक होने के लिए जरूर जाते है। 



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तख़्त श्री दमदमा साहिब (Takht Shri Damdama Sahib)


सिख इतिहास में पाँच तख़्त है। इन तख्तों से सिख धर्म के हित के लिए फैसले लिए जाते है।  तख़्त श्री दमदमा साहिब पाँच तख्तों में से एक है। यहाँ पर हर दिन बहुत बड़ी संख्या में सिख अनुयायी नतमस्तक होने के लिए आते है। यहाँ का वातावरण बहुत ही भक्तिमय और शांति से भरा है। सिखों के दसवें गुरु गुरु गोबिंद सिंह जी इस स्थान पर करीब साढ़े नौ महीने रहे थे। 



रोज गार्डन (Rose Garden)


रोज गार्डन बठिंडा परिवार के साथ घूमने के लिए बढ़िया पर्यटन स्थल (Tourist Place) है। बच्चों को यह पार्क बहुत ज्यादा भाता है। यह 40000 वर्ग मीटर में फैला हुआ है। यहाँ पर कई तरह के पेड़ पौधे देखने को मिलते है। जिनमें गुलाब की सब से ज्यादा किस्में देखने को मिलती है। रोज गार्डन का वातावरण हर किसी को लुभाता है। पर्यटकों के लिए सुबह 5.30 से रात 10 बजे तक खुला रहता है।   

रविवार, 28 मार्च 2021

अमृतसर पंजाब के पर्यटन स्थल के बारे में विस्तार सहित जानकारी


अमृतसर औद्योगिक और आध्यात्मिक नज़र से पंजाब का बहुत ही महत्वपूर्ण शहर है। इस शहर में सिखों का सब से पवित्र स्थान हरमंदिर साहिब स्थित है। वाघा बॉर्डर, जलिआंवाला बाग़, दुर्गियाणा मंदिर, महाराजा रणजीत सिंह संग्रहालय और खैर उद्दीन मस्जिद सैलानियों के घूमने लिए बहुत ही बढ़िया स्थान है। 


पंजाबी लोग अपने मेहमानों की बहुत सेवा करते है। यहाँ के लोग बहुत ही खुश मिज़ाज के होते है। अमृतसर में हाथ से बनी चीज़ें, स्वादिष्ट भोजन, लोक नृत्य भागड़ा - गिद्दा हर एक पर्यटक दिल मोह लेते है। 1984 ओपरेशन ब्लू स्तर अमृतसर पंजाब के के लिए बहुत ज्यादा दुःख से भरा समय था। जिस के बारे में सोचने भर से रूह काँप उठती है। इस दुखद समय के बाद पंजाब के लोगों ने फिर से खुद को खड़ा किया। आइये आज हम बात करते है, अमृतसर पंजाब के पर्यटन स्थल (Amritsar Punjab tourist place Information) के बारे में विस्तार सहित जानकारी। 



गोल्डन टेम्पल (Golden Temple) 


गोल्डन टेम्पल सिख धर्म में बहुत ही महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है। गोल्डन टेम्पल को हरमंदिर साहिब और दरबार साहिब के नाम से जाना जाता है। सिख लोगों के अलावा और भी धर्मों के लोग इस स्थान पर नतमस्तक होने के लिए आते है। हरमंदिर साहिब की नींव गुरु अर्जुन देव जी ने मुसलिम फ़कीर हजरत साईं मियाँ मीर जी से रखवाई थी। 


दरबार साहिब का निर्माण सरोवर के बिलकुल मध्य में किया गया है। मुख्य दरबार में चारों दिशा में दरवाजे, प्रवेश करने के लिए एक ही रास्ता बनाया गया है। इसका कारण यह है कि दुनिया के किसी भी कोने से, किसी भी धर्म, जात पात के लोग, एक ही रास्ते पर चलकर इस स्थान पर सजदा करने के लिए आये। 


हरमंदिर साहिब के मुख्य दरबार पर सोने की परत वाली चादर चढ़ाई गयी है। जिसकी वजह से इस स्थान को स्वर्ण मंदिर या गोल्डन टेम्पल कहा जाता है। इस गुरुदवारा साहिब में हर समय लंगर चलता रहता है। यहाँ पर दुनिया की सब से बड़ी रसोई है। हर 40000 से 50000 के करीब लोग लंगर खाते है। लोगों को यहाँ पर आकर बहुत ज्यादा शांति मिलती है। 


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अकाल तख़्त अमृतसर (Akal Takhat, Amritsar)


अकाल तख़्त अमृतसर (Amritsar) पाँच अकाल तख्तों में सब से पहला अकाल तख़्त है। इसका निर्माण सिखों के छठे गुरु हरगोबिंद जी ने 1606 में करवाया था। इस स्थान से सिखों से जुड़े अहम फैसले लिए जाते है। इतिहास गवाह है कि इस पर कई बार हमले हुए है। इस हमलों में इसका बहुत ज्यादा नुकसान हुआ है। 1984 में ओप्रशन ब्लू स्टार के दौरान इसकी इमारत को बहुत ज्यादा नुकसान पहुँचा था। 



जलियाँवाला बाग़ (Jalian Wala Bagh)


जलियाँवाला बाग़ हरमंदिर साहिब के बहुत ही समीप है। 13 अप्रैल 1919 को वैशाखी वाले दिन अंग्रेजी अफसर ब्रिगेडियर जनरल रेजिनाल्ड एडवर्ड डायर ने निहत्थे लोगों पर गोलियां चलवाई थी। इस गोलीबारी में हजारों लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा था। जलियाँवाला बाग़ तीन और से घिरा हुआ और एक तरफ से बहुत ही संकरा रास्ता है। 


इस हत्याकांड में कई छोटे छोटे बच्चे भी मारे गए थे। इस हत्याकांड की पूरी दुनिया में निंदा हुई थी। शहीद उधम सिंह ने लंदन के कॉक्सस्टान हॉल में ब्रिगेडियर जनरल रेजिनाल्ड एडवर्ड डायर को सामने से गोली मार कर इस हत्याकांड का बदला लिया था। इसके बाद उनको गिरफ्तार कर के, फांसी की सज़ा दी गयी थी। 


यहाँ पर आज भी गोलियों के निशान देखने को मिलते है। इस बाग़ में एक कुआँ भी स्थित है। इस कुएँ में लोग अपनी जान बचाने के लिए कूदे थे। आज इस कुएं को ऊपर से बंद कर दिया गया है। जलियाँवाला बाग़ हत्याकांड की याद में एक स्मारक बनाया गया है। इस स्मारक का उद्घाटन 13 अप्रैल 1961 में डॉक्टर राजेंदर प्रसाद ने किया था। 



वाघा बॉर्डर (Wagha Border) 

 

वाघा बॉर्डर भारत और पाकिस्तान की सीमा को दर्शाने वाला पर्यटक स्थल (Tourist Place) है। इसको अटारी बॉर्डर के नाम से भी जाना जाता है। यहाँ से अमृतसर 28 किलोमीटर और लाहौर  22 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यहाँ पर लोग शाम को होने वाली परेड का लुत्फ लेने के लिए आते है। इसके दोनों और सैलानियों के बैठने के लिए जगह बनाई गयी है। यहाँ परेड पर्यटकों को रोमांच से भर देती है। 



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गुरु का महल (Guru Ka Mahal)


गुरु का महल गुरुदुवारा साहिब गोल्डन टेम्पल के बहुत ही निकट में स्थित है। इस गुरुदुवारा साहिब की स्थापना गुरु राम दास ने अपने परिवार से साथ रहने के लिए करवाया था। इस स्थान पर गुरु रामदास जी के पुत्र और सिखों के पाँचवें गुरु अर्जुन देव जी का विवाह हुआ था। सिखों के छठे गुरु हरगोबिंद सिंह  जी का विवाह और उनके पुत्र बाबा अटल राय जी और गुरु तेग बहादुर जी का जन्म यहीं पर हुआ था। 



दुर्गियाना मंदिर (Durgiana Mandir)


दुर्गियाना मंदिर लोहा गेट के निकट अमृतसर, पंजाब (Punjab) में बहुत ही सुन्दर हिन्दू तीर्थ स्थल है। इस मंदिर को लक्ष्मी नारायण मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। इसका निर्माण 20 वी सदी में किया गया था। लक्ष्मी नारायण मंदिर की बनावट हरमिंदर साहिब से थोड़ी बहुत मिलती जुलती है। यह मंदिर माता दुर्गा को समर्पित है। पंडित मदन मोहन मालवीय ने इस मंदिर की नींव रखी थी। मंदिर का मुख्य द्वार नक्काशी युक्त चाँदी की परत वाला है।  जिस के कारण इसको रजत मंदिर भी कहा जाता है।  



महाराजा रणजीत सिंह संग्रहालय (Maharaja Ranjit Singh Museum)


महाराजा रणजीत सिंह संग्रहकाय में सैलानियों को ऐतिहासिक वस्तुओं को देखने का अवसर प्राप्त होता है। इन वस्तुओं में हथियार, पांडुलिपियां, पुराने सिक्के, कवच और पेंटिंग शामिल है। यह संग्रहालय समर पैलेस का बदला हुआ रूप है। समर पैलेस को महाराजा रणजीत सिंह ने राम बाग़ में बनवाया था। समर पैलेस को जगजीवन राम जी ने एक संग्रहालय के रूप में लोगों के सामने पेश किया था। सैलानियों के घूमने के लिए समय सुबह 10 बजे से शाम पाँच बजे तक का है। यह सोमवार को बंद रहता है।   



खैर उद्दीन मस्जिद (Khair Ud Din Masjid)


खैर उद्दीन मस्जिद मुसलिम धर्म में आस्था रखने वाले लोगों के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान है। इस मस्जिद की वास्तुकला बहुत ही शानदार है। मोहम्मद खैर उद्दीन ने इसको बनवाया था। यह मस्जिद अमृतसर में हॉल बाजार में गाँधी दरवाजे के समीप में स्थित है। एक ही समय में सैकड़ों मुस्लिम भाई एक साथ नमाज अदा कर सकते है।  



पार्टिशन संग्रहालय (Partition Museum)


पार्टिशन म्यूजियम में हिंदुस्तान के बटवारे के समय में हुई घटनाओं को संयोजित कर के रखा गया है। यह लाखों लोगों की दर्द भरी दास्तान को संभाले हुए है। इसका उद्घाटन पंजाब के मुख्यमंत्री कैपटन अमरिंदर सिंह ने किया था। इस संग्रहालय में 14 गैलरी बनाई गयी है। इन गैलरियों में उस समय के अख़बार, फोटो, वीडियो, डॉक्यूमेंट्री फिल्में और लोगों की बातचीत भी शामिल है। 

मंगलवार, 23 मार्च 2021

गोल्डन टेम्पल या हरमंदिर साहिब अमृतसर पंजाब के बारे में विस्तार सहित जानकारी।


हरमिंदर साहिब या गोल्डन टेम्पल गुरुदवारा साहिब को सिख धर्म में बहुत ही पवित्र स्थान माना जाता है। दुनिया के कोने कोने से हर सिखों के साथ दूसरे धर्मों के लोग भी यहाँ पर नतमस्तक होने के लिए आते है। यहाँ पर आ कर हर किसी को बहुत ज्यादा शांति मिलती है। आइए आज हम बात करते है, गोल्डन टेम्पल (Golden Temple)  या हरमंदिर साहिब (Hraminder sahib) अमृतसर (Amritsar) पंजाब (Punjab) के बारे में विस्तार सहित।  



गोल्डन टेम्पल का इतिहास  (Golden Temple History)


सिखों के तीसरे गुरु गुरु अमरदास जी ने "अमृतसर" या "अमृत सरोवर" को बनाने के बारे में अपने विचार रखे थे। अमृत सरोवर को सिखों के चौथे गुरु रामदास जी और बाबा बुड्ढा जी की निगरानी में बनवाना शुरू किया। सरोवर के साथ एक नगर को बसने की योजना भी बनाई गयी। जिस के लिए जमीन गुरु राम दास जी ने जमीदारों को पूरे पैसे दे कर ले ली थी। 


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जमीदारों से जमीन लेने के बाद 1570 में नगर को बसाने का और तालाब बनाने का कार्य शुरू हुआ। यह कार्य 1577 में पूरा हुआ था। गुरु अर्जुन देव जी सिखों के पांचवें गुरु जी ने एक मुसलमान फ़कीर हजरत साईं मियाँ मीर जी से हरमंदिर साहिब की नींव रखवाई थी। गुरु जी ने दरबार साहिब का नक्शा खुद ही तैयार किया था। दरबार साहिब के निर्माण कार्य में गुरु राम दास जी, बाबा बुड्ढा जी, भाई गुरदास जी और कई बड़ी हस्तियों ने बहुत ज्यादा योगदान दिया था। 



दरबार साहिब की बनावट (Durbar Sahib Design)


हिन्दू धर्म की मर्यादा के अनुसार मंदिर की जमीन की ऊँचा रखा जाता है। गुरु अर्जुन देव जी ने दरबार साहिब को जमीन की निचली सतह पर रख कर बनवाया है। यह सरोवर के बिलकुल मध्य में स्थित है। 

इसके मुख्य दरबार में चार दरवाजे और एक ही रास्ता है। इसका तात्पर्य यह है कि दुनिया की चारों दिशाओं के लोग, चाहे किसी भी धर्म के हो, किसी भी जात के, वह बिना किसी भेद भाव के इस दरबार में नतमस्तक होने के लिए आ सकते है। 


मुख्य दरबार की दीवारों पर सोने की परत वाली चादर लगी हुई है। यहाँ पर बहुत ही सुन्दर नक्काशी भी की गयी है। चार दरवाजों को बहुत ही सुन्दर तरीकों से सजाया गया है। गोल्डन टेम्पल के किनारों पर चार गुंबद और एक मध्य में बड़ा गुंबद बना हुआ है। सोने की चादर को महाराजा रणजीत सिंह जी ने 1830 के लगभग चढ़वाया था। जिसके बाद से इसे स्वर्ण मंदिर या गोल्डन टेम्पल कहा जाने लगा।  


दरबार साहिब आने वाली संगत या भक्तों के लिए हर समय लंगर चलता रहता है। कोई भी व्यक्ति किसी भी धर्म का यहाँ पर मुफ्त में भर पेट खाना खा सकता है। हरमंदिर साहिब की रसोई को दुनिया की सब से बड़ी रसोई के रूप में जाना जाता है। यहां पर प्रति दिन 40000 से 50000 के मध्य में लोग लंगर खाते है। ऐसी मिसाल दुनिया में कहीं और या किसी दूसरे धर्म में देखने को नहीं मिलती है।  



कैसे जाए (How To Reach)


गोल्डन टेम्पल जाने के लिए अमृतसर (Amritsar) पंजाब (Punjab) में अंतर्राष्ट्रीय हवाई मार्ग भी स्थित है। यहाँ से जाने के लिए टैक्सी या ऑटो मिल जाता है। बस अड्डे से पैदल भी जाया जा सकता है, नहीं तो ऑटो या रिक्शा भी लिया जा सकता है। अमृतसर से पूरे देश के राजमार्ग जुड़े हुए है। लोग अपनी गाड़ी में भी आराम के साथ आ सकते है। यहाँ पर मुफ्त में कार पार्किंग की सुविधा भी दी जाती है। 


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बाहर से आने वाले लोगों के लिए मुफ्त में रहने के लिए कमरे भी मिल जाते है। कमरे अगर खाली ना हो तो धर्मशालाएं भी बनी हुई है। यहाँ भक्तों और सैलानियों के लिए हर प्रकार की सुविधा उपलब्ध है। दीवाली वाले दिन दरबार साहिब को बहुत ही सुन्दर तरीके से सजाया जाता है। आतिशबाजी भी बहुत बड़े स्तर पर देखने को मिलती है।  




हरमिंदर साहिब में किन बातों का ध्यान रखे (What Is Important To Keep In Mind In Harminder Sahib)


हरमिंदर साहिब में सर को ढक कर प्रवेश करें। प्रवेश करते समय किसी प्रकार का नशा न किया हो और ना ही अंदर ले कर जाए। गुरुदवारा साहिब के तालाब में तैरना बिलकुल मना है। दरबार साहिब के अंदर थूके ना। लंगर के लिए आराम से जाए और उतना ही ले जितना आप खा सके। थाली में अन्न बिलकुल भी ना छोड़े।  

रविवार, 21 मार्च 2021

जलियाँवाला बाग़ अमृतसर पंजाब हत्याकांड का सब से बड़ा मुजरिम ब्रिगेडियर जनरल रेजिनाल्ड एडवर्ड डायर


अमृतसर (Amritsar) पंजाब (Punjab) में जलियाँवाला बाग़ (Jallianwala Baag) हत्या कांड (Murder Case) को भारतीय लोग कभी नहीं भूल सकते है। 13 अप्रैल 1919 वैशाखी वाले दिन ब्रिगेडियर जनरल रेजिनाल्ड एडवर्ड डायर (Brigadier General Reginald Edward Dyer) ने शांतमयी ढंग से इकट्ठे हुए 5000  लोगों पर अंधाधुंध गोलियां चलवा दी। इस गोलाबारी में 1000 से ज्यादा लोगों की जान गयी और 2000 से ज्यादा लोग घायल हो गए। इस हत्याकांड की दुनिया भर में बहुत ज्यादा निंदा हुई थी। आइये जानते है, जलियाँवाला बाग़ अमृतसर पंजाब के हत्याकांड के बारे में विस्तार सहित। 



जलियाँवाला बाग़ की बनावट (Jallianwala Bagh Design)


जलियाँवाला बाग़ पंजाब (Punjab) के अमृतसर (Amritsar) शहर में गोल्डन टेम्पल गुरुदवारा साहिब के पास में स्थित है। इस बाग़ में जाने के लिए एक ही रास्ता है। बाकी और जगह से यह मकानों से घिरा हुआ है। जिस रास्ते से इस बाग़ में प्रवेश करते है, वह भी बहुत ही कम चौड़ा है। यहाँ पर एक कुआँ है। जिसे अब ऊपर से अब बंद कर दिया गया है। इस बाग़ में शहीद हुए लोगों की याद में स्मारक भी बनाया गया है। जलियाँवाला बाग़ में हर समय अमर ज्योति प्रज्वलित रहती है। 



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हत्याकांड के बारे में विस्तार सहित जानकारी (Detail Information About The Massacre)


13 अप्रैल 1919 को वैशाखी वाले दिन लोग जलियाँवाला बाग़ में दो नेता सैफुद्दीन और सत्यपाल की गिरफ्तारी का विरोध करने के लिए शांतमयी ढंग से एकत्र हुए थे। अंग्रेजों के द्वारा बनाया गया रोलेट एक्ट का भी  हर हिन्दुस्तानी के द्वारा विरोध किया जा रहा था। उस समय सारे शहर में कर्फ्यु लगा हुआ था। अंग्रेजों के द्वारा किसी भी तरह से लोगों के एकत्र होने पर पाबंदी थी। 


कुछ लोग वैशाखी का मेला देखने के लिए अमृतसर शहर में अपने परिवार के साथ आये हुए थे। ऐसे लोग अचानक ही इस प्रदर्शन में शामिल हो गए। लोगों की संख्या 5 हजार के करीब थी। इनमें बहुत छोटे छोटे बच्चे भी शामिल थे। इतनी बड़ी संख्या में लोगों का एक साथ होना, अंग्रेजों को बिलकुल भी अच्छा नहीं लगा। अंग्रेजी हुकूमत इस प्रदर्शन को हर हाल में खत्म करना चाहती थी। 



ब्रिगेडियर जनरल रेजिनाल्ड एडवर्ड डायर (Brigadier General Reginald Edward Dyer) बिना किसी को सूचना दिए, 90 अंग्रेजी सैनिकों के साथ जलियाँवाला बाग़ में पहुंच गया। अंग्रेजी सैनिकों के पास राइफल्स भरी हुई थी। उसने बिना किसी चेतवानी के लोगों पर अंधाधुंध गोलियां चलाने का हुक्म दे दिया। जिस के बाद सिर्फ 10 मिनट में सारा बाग़ लाशों के ढेर से भर गया। लोग बहुत बड़ी संख्या में घायल हो गए। कुछ लोगों ने जान बचाने के लिए कुएँ में छलांग लगा दी। कुआँ भी कुछ ही पल में लाशों के ढेर से भर गया। 


जलियाँवाला बाग़ (Jallianwala Baag) हत्या कांड (Murder Case) दुनिया का सब से बड़ा खौफनाक हत्याकांड था। इस हत्याकांड के बाद अंग्रेजी सरकार और जनरल डायर की पूरी दुनिया में बहुत बदनामी हुई। अमृतसर के डिप्टी दफ्तर में 484 शहीद हुए लोगों की और जलियाँवाला बाग़ में 388 लोगों की सूचि है। ब्रिटिश सरकार के द्वारा पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार 200 के घायल और 379 लोगों के मरने की बात कही गयी है। 


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स्थानीय लोगों के अनुसार या अनाधिकारिक आंकड़ों के अनुसार 1000 से ज्यादा की मौत और 2000 से ज्यादा लोगों के घायल होने की बात कही गयी थी। इस दुखद हत्याकांड के बाद आम जनता से चंदा ले कर इस स्थान को 5 लाख 65 हजार में खरीदा गया था। आजादी के बाद इस बाग़ में अमर ज्योति और शहीदों की याद में एक स्मारक को बनाया गया है। यहाँ पर आज भी गोलियों के निशान देखने को मिलते है। 

शनिवार, 20 मार्च 2021

ब्लू सिटी जोधपुर राजस्थान के पर्यटन स्थल के बारे में विस्तार सहित जानकारी


"ब्लू सिटी" (Blue city) के नाम से जोधपुर शहर को जाना जाता है। जोधपुर में सैलानियों को नील रंग के घर बहुत बड़ी संख्या में देखने को मिलते है। यह शहर ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से बहुत ही महत्वपूर्ण है। यहाँ के लोग बहुत बढ़िया ढंग से सैलानियों के साथ पेश आते है। आइए आज हम बाते करते है, ब्लू सिटी (Blue city), जोधपुर (Jodhpur), राजस्थान (Rajasthan) के पर्यटन स्थल (Tourist place) के बारे में विस्तार सहित जानकारी। 



घंटा घर (Clock Tower)


घंटा घर जोधपुर शहर का बहुत ही मशहूर स्थान है। इस स्थान पर बहुत बड़ा बाजार है। जहाँ से लोग रोजाना उपयोग में आने वाली चीज़ों को खरीद सकते है। महाराजा सरदार सिंह ने इसका निर्माण वर्ष 1880 से 1911 के मध्य में करवाया था। सैलानी इस बाजार में हाथ से बनी वस्तुओं को खरीद सकते है। यहाँ के व्यंजन बहुत ही स्वादिष्ट होते है। 



मेहरानगढ़ दुर्ग (Mehrangarh Fort)


मेहरानगढ़ दुर्ग का निर्माण 1459 में राव जोधा के द्वारा करवाया गया था। यह किला 400 फुट की ऊँचाई वाली पहाड़ी पर बना हुआ है। इस किले का फैलाव शहर के मध्य में 5 किलोमीटर तक है। दुर्ग की दीवारों की ऊँचाई 36 फुट और चौड़ाई 21 फुट है। सात द्वार गुजरकर किले में प्रवेश किया जाता है। कुछ विद्वानों का कहना है कि इसका एक आठवाँ द्वार भी है। उसका रास्ता गुप्त रखा गया था। पहले द्वार पर नुकीले कील लगे हुए है, ताकि हाथी उस दरवाजे को तोड़ कर अंदर ना आ सके। 


दुर्ग के परिसर में कई महल और मंदिर देखने को मिलते है। यहाँ पर एक सटी मंदिर भी देखने को मिलता है। राजा मान सिंह की मृत्यु के बाद उनकी पत्नी ने जिंदा चिता में बैठ कर अपने प्राणों की आहुति दे दी थी। जिसके बाद इस मंदिर का निर्माण किया गया था। भारतीय लोगों के लिए 60 रुपए प्रति व्यक्ति और विदेशी लोगों के लिए 400 रुपए प्रति व्यक्ति शुल्क लिया जाता है। 



राव जोधा डेजर्ट रॉक पार्क (Raw Jodha Desert Rock Park)


राव जोधा डेजर्ट रॉक पार्क बहुत ही बढ़िया पर्यटन स्थल है। यहाँ पर सैलानियों को इको पार्क देखने को मिलता है। इस पार्क में कई तरह के पेड़ पौधे लगाए है। राव जोधा डेजर्ट रॉक पार्क का निर्माण 2006 में किया गया था। पर्यटकों को इस पार्क में भारतीय नस्ल के पौधे देखने को मिलते है। सैलानियों को इन पौधों के बारे में उचित जानकारी भी दी जाती है। यह पार्क 200 एकड़ में फैला हुआ है। 



उम्मेद भवन महल (Ummed Bhawan Palace)


उम्मेद भवन महल का निर्माण 1929-1943 तक पूरा किया गया था। इस महल में 347 कमरे है। उम्मेद भवन महल को तीन हिस्सों में बाँट दिया गया है। इसके एक भाग में आज भी शाही परिवार निवास करता है। एक हिस्से को होटल का रूप दे दिया और एक हिस्से को संग्रहालय बना दिया गया है। अपनी बनावट और वास्तुकला के कारण यह महल दुनिया भर में प्रसिद्ध है। सैलानियों के लिए सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक खुला रहता है। इसको देखने के लिए 30 से 100 रुपए तक शुल्क देना होता है। 



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मसूरिया हिल्स बग़ीचा (Masuriya Hills Garden)


मसूरिया हिल्स बग़ीचा बहुत ही सुन्दर है। परिवार के साथ घूमने के लिए या पिकनिक मनाने के लिए बहुत ही अच्छा स्थान है। सैलानी मसूरिया हिल्स बाग़ में बैठ कर सूर्यास्त होने के दृश्य को देखकर आनंदित होते है। यह बग़ीचा एक पहाड़ी के ऊपर स्थित है। सैलानियों को इस बगीचे में घूमने के लिए किसी प्रकार का शुल्क नहीं देना होता है। 



जसवंत थाडा (Jaswant Thada)


1899 में महाराजा जसवंत सिंह की याद में जसवंत थाडा का निर्माण किया गया था। यह मेहरानगढ़ दुर्ग के बहुत ही निकट स्थित है। जसवंत थाडा इमारत का निर्माण संगमरमर पत्थर से किया गया है। संगमरमर पत्थर के ऊपर बहुत ही सुन्दर नक्काशी की गयी है। यहाँ पर आज भी शाही मारवाड़ी परिवार के लोगों का अंतिम संस्कार किया जाता है। यह पहाड़ियों के बिलकुल मध्य में स्थित है। इसे "मारवाड़ ताजमहल" भी कहा जाता है। 



बाल समंद झील (Bal Samand Lake Palace)


बाल समंद झील का निर्माण मानव के द्वारा किया गया है। महाराजा सुर सिंह इस झील के निर्माण कर्ता थे। सैलानी इस झील के आसपास घूमने का आनंद ले सकते है। इस झील के पास में कई तरह के पेड़ देखने को मिलते है। यहाँ का वातावरण बहुत ज्यादा गर्म कम ही होता है। यहाँ पर बाल समंद महल भी है। जिसकी वास्तुकला को देख कर हर कोई मोहित हो जाता है। किसी समय मंडोर ग्रामीण लोगों के लिए जलाशय था। अब इसको के कृतिम झील का रूप दे दिया गया है। 



मंडोर बग़ीचा (Mandore Garden)

मंडोर बग़ीचा को मंडोर गार्डन के नाम से भी जाना जाता है। इस बगीचे का निर्माण 6 वी शताब्दी के आस पास हुआ है। उस समय जोधपुर (Jodhpur) नाम का शहर नहीं था। यह मंडोर नगर से करीब 9 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। सैलानियों के लिए यहाँ पर नायकों का मंदिर और 33 करोड़ देवताओं का मंदिर भी स्थित है। किसी समय मारवाड़ साम्राज्य की राजधानी का नाम मंडोर था। इसके पास मंडोर दुर्ग भी देखने के लायक है, लेकिन इस समय उसकी हालत बहुत ख़राब हो चुकी है।  



खेजड़ला दुर्ग (Khejarla Fort)


खेजड़ला दुर्ग का निर्माण 17 वी शताब्दी के आस पास हुआ है। यह दुर्ग शाही लोगों के महल के रूप में जाना जाता है। इसका निर्माण बलुआ पत्थर और ग्रेनाइट के द्वारा करवाया गया था। यहाँ पर पर्यटकों को भारतीय संस्कृति को बहुत ही करीब से देखने का अवसर प्राप्त होता है। इस समय इस दुर्ग को एक होटल के रूप में बदल दिया गया है। 


गर्मियों के दिनों में इसकी यात्रा ना करें, क्योंकि गर्मी बहुत ज्यादा होती है। यहाँ घूमने के लिए अक्तूबर से फ़रवरी के महीने बढ़िया है। जोधपुर रेलवे स्टेशन से टैक्सी ले कर इस दुर्ग पर पहुँचा जा सकता है। पर्यटकों को यहाँ पर अच्छे कमरे, नाईट लाइफ, जिम और स्पा की सुविधा आसानी के साथ मिल जाती है। यहाँ पर मिलने वाले व्यंजन बहुत ही स्वादिष्ट होते है।  



कायलाना झील (Kaylana Lake)


कायलाना झील एक मानव निर्मित झील है। इस झील का निर्माण महाराजा प्रताप सिंह ने 1872 में करवाया था। सैलानियों को इस झील पर बहुत बढ़ी संख्या में पक्षी देखने को मिलते है। इन पक्षियों में बहुत बड़ी संख्या विदेशी पक्षियों की भी होती है। सर्दियों के दिनों में सरिबेरियन क्रेन को पर्यटक देख सकते है। परिवार के साथ घूमने के लिए बहुत ही बढ़िया पर्यटन स्थल (Tourist Place) है। 



चामुंडा मंदिर (Chamunda Temple)


चामुंडा मंदिर जोधपुर राजस्थान (Rajasthan) बहुत ही प्रसिद्ध है। लोग दूर दूर से चामुंडा माता के दर्शन के लिए आते है। यह मंदिर मेहरानगढ़ दुर्ग के अंदर ही स्थित है। कुछ विद्वानों के अनुसार एक ऋषि के श्राप से नगर को बचने के लिए इस मंदिर का निर्माण किया गया था। इस मंदिर का निर्माण राजा राव जोधा के द्वारा करवाया गया था। यह मंदिर लोगों के सुबह 5 बजे से दोपहर 12 बजे तक, शाम 4 बजे से रात 9 बजे तक खुला रहता है। 



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राय बाग़ महल (Rai Garden Palace)


राय बाग़ का निर्माण 1663 में किया गया था। कहा जाता है कि इस का निर्माण महल में रहने वाली रानियों में से किसी एक ने करवाया था। राग बाग़ महल बहुत ही सुन्दर और प्राचीन ऐतिहासिक इमारत है। इस महल की सुन्दर वास्तुकला को देखकर हर को हैरान हो जाता है। इस महल में लगे संगमरमर के पत्थरों पर की गयी नक्काशी हर किसी को भाती है। हवाई मार्ग, रेल से या बस से आने पर सिर्फ 3 किलोमीटर की और दूरी तय करनी होगी। 



बुलेट बाबा मंदिर (Bullet Baba Temple)


बुलेट मंदिर ॐ बन्ना (Om Banna) को समर्पित है। इस मंदिर के पीछे की कहानी के बारे में स्थानीय लोगों का कहना है कि किसी गांव के नेता ओम सिंह राठौर जी अपनी बुलेट मोटर साइकिल से जा रहे थे। उनका अपनी मोटरसाइकिल पर नियंत्रण नहीं रहा। जिसके बाद उनका NH 56 पर एक्सीडेंट हो गया। जिस में उनकी मृत्यु हो गयी। 


पुलिस वाले उनकी बाइक को थाने में ले गए। अगले दिन बाइक खुद ब खुद हादसे वाले स्थान पर खुद ही पहुंच गयी। पुलिस वालों ने बाइक को फिर थाने में ला कर जंजीरों से बाँध दिया। मोटर साइकिल फिर उसी स्थान पर पहुंच गयी। जिसके बाद लोगों ने इसको चमत्कार समझ कर, इसकी पूजा शुरू कर दी। लोगों ने मिलकर एक मंदिर का निर्माण किया।

शुक्रवार, 19 मार्च 2021

शिव सागर आसाम के पर्यटन स्थल के बारे में जानकारी


शिव सागर (Siva Sagar) आसाम (Assam) का बहुत ही खूबसूरत नगर है। यहाँ पर अहोम राजकाल की छवि देखने को मिलती है। यह नगर ब्रह्मपुत्र की सहायक नदी दिखू के किनारे पर स्थित है। सैलानियों को प्राकृतिक दृश्य बहुत ज्यादा भाते है। शिव सागर में रहने वाले लोगों की जीवन शैली, संस्कृति बहुत ही अलग है। आइए आज हम बात करते है, शिव सागर (Siva Sagar) आसाम (Assam) के पर्यटन स्थल (Tourist Place) के बारे में विस्तार सहित।     



शिव सागर तालाब (Siva Sagar Tank)


शिव सागर तालाब 129 एकड़ में फैला हुआ है। इसी तालाब के नाम पर इस जिले का नाम पड़ा है। सैलानियों के लिए गर्मियों में बोटिंग करना बहुत बढ़िया रहता है। इस तालाब के आस पास के प्राकृतिक दृश्य बहुत ही ज्यादा लुभावने है। सर्दियों के दिनों में बहुत बड़ी संख्या में प्रवासी पक्षी देखने को मिलते है। परिवार के साथ घूमने के लिए बहुत ही अच्छा स्थान है।  



जोय सागर तालाब (Joysagar Tank)


जोय सागर तालाब एक मानव निर्मित तालाब है। इस तालाब का निर्माण अहोम राजा स्वर्गदेव रुद्र सिंह ने अपनी माता जी जयमती की याद में बनवाया था। इसी तालाब के उत्तरी किनारे पर तीन मंदिर भी स्थित है। यह मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है। इसके अलावा सूर्य मंदिर और गणेश मंदिर प्रमुख मंदिर के पिछले हिस्से में स्थित है। इन मंदिरों की वास्तुकला को देख कर हर कोई दंग रह जाता है। 



रंग घर (Rang Ghar)


अहोम राजा स्वर्गदेव रुद्र सिंह जी ने रंग घर को बनवाया था। रंग घर की इमारत दो मंजिला है। इस मंजिल की बनावट बहुत ही अलग है। जैसे किसी ने नाव को छत पर उलटा कर के रख दिया हो। कुछ लोगों का कहना है कि यह एशिया कि सब से पुरानी रंग घर कि इमारत है। यहाँ से अहोम राज घराने के लोग बैठकर खेलों को देखा करते थे। 



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शिव दोल (Shiv Dol)


शिव दोल भगवान शिव को समर्पित के मंदिर है। इस मंदिर को पूर्वोत्तर दिशा में सब ज्यादा ऊँचाई पर स्थित मंदिर माना जाता है। शिव दोल मंदिर की ऊँचाई 104 फुट है। इस मंदिर के साथ विष्णु दोल और देवी दोल का मंदिर भी स्थित है। शिव भक्त बहुत बड़ी संख्या में महाशिवरात्रि वाले दिन इस मंदिर में नतमस्तक होने के लिए आते है। 



नामदांग पत्थर वाला पुल (Namdang Stone Bridge)


नामदांग पत्थर वाला पुल एक ही पत्थर से बना पुल है। इसे "नामदांग स्टोन ब्रिज" के नाम से भी जाना जाता है। भूवैज्ञानिकों का कहना है कि "यह पुल करीब 300 साल पुराना है"। नामदांग नामक नदी पर इस पुल का निर्माण किया गया है। यह शिव सागर से गौरी सागर की तरफ जाते हुए, जय सागर से पहले स्थित है। अहोम राजा ने इसका निर्माण वर्ष 1703 में करवाया था। 



केंद्रीय बैप्टिस्ट चर्च (Central Baptist Church)


शिव सागर (Siva Sagar)  तालाब के किनारे पर केंद्रीय बैप्टिस्ट चर्च स्थित है। वर्ष 1845 में रिव नाथन ब्राउन ने इसको बनवाया था। यह गिरजा घर बहुत ही सुंदर बना हुआ है। रिव नाथन ब्राउन ने आसाम में बांग्ला भाषा को राज भाषा बनाने का विरोध किया था। उन्होंने असमिया भाषा को फिर से राज भाषा बनाने की बात पूरे जोर शोर से कही। 



तलाटल घर (Talatal House) 


अहोम साम्राज्य की सब से बड़ी निशानी तलाटल घर है। यह शिव सागर से 4 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। सैलानियों को ग्राउंड फ्लोर से तीसरी मंजिल तक जाने की इजाजत है। तलाटल घर की बेसमेंट में जाने की किसी को भी अनुमति नहीं है। इसका निर्माण  स्वारगदेव रुद्र सिंहा ने वर्ष 1698 में करवाया था। इसका निर्माण सेना के रहने के हिसाब से करवाया गया था। 



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देवी दोल (Devi Dol) 


देवी दोल मंदिर में माँ काली और दुर्गा की पूजा की जाती है। इस मंदिर की ऊँचाई 60 फुट और परिधि 120 फुट है। देवी दोल मंदिर की एक तरफ शिव दोल और दूसरी तरफ विष्णु दोल मंदिर है। यहाँ का वातावरण बहुत ही बढ़िया है। यह एक छोटा सा मंदिर है। इसका निर्माण अहोम रानी अम्बिका कुंवारी ने करवाया था। अम्बिका कुंवारी राजा शिवा सिंगा की पत्नी थी। 



स्टेट संग्रहालय (State Museum)


ताज संग्रहालय शिव सागर आसाम (Assam) बहुत ही सुन्दर पर्यटन स्थल (Tourist Place) है। इसका उद्घाटन 31 जनवरी 1992 में किया गया था। यह 600 गज में बना हुआ है। पर्यटकों को अहोम साम्राज्य की वस्तुओं को देखने का अवसर मिलता है। इस वस्तुओं में गहने, हथियार सजावट का सामान शामिल है। यह एक छोटी इमारत है, लेकिन बहुत ही तरीके से इसमें सामान को रखा गया है। 

अहमदाबाद गुजरात भारत के पर्यटन स्थल के बारे में विस्तार सहित जानकारी

अहमदाबाद (Ahmedabad) गुजरात का बहुत ही सुन्दर शहर है। यह पहले गुजरात की राजधानी हुआ करता था। इसको कर्णावती नाम से भी पहचाना जाता है। साबरमती...