बुधवार, 24 फ़रवरी 2021

हाजी अली दरगाह के बारे में जानिए विस्तार सहित


भारत के महाराष्ट्र (Maharashtra) राज्य के बॉम्बे (Bombay) शहर के वर्ली समुद्री किनारे के पास में हाजी अली दरगाह (Haji Ali Dargah) है। इस दरगाह पर मुसलिम धर्म के लोगों की बहुत ज्यादा आस्था है। इस मस्जिद को 1431 में सैय्यद पीर हाजी अली शाह बुखारी (Sayyad Peer haji Ali Shah Bukhari) की याद में बनाया गया था। सैय्यद पीर हाजी अली शाह बुखारी उज्बेकिस्तान देश के एक बहुत बड़े व्यापारी थे। कुछ विद्वानों के अनुसार मक्का की यात्रा करने से पहले उन्होंने सांसारिक मोह माया का त्याग कर दिया था। इस दरगाह में कई दूसरे धर्मों के लोग भी आते है। 



हाजी अली दरगाह में दुनिया के कोने से लोग नतमस्तक होने के लिए आते है। पुरुषों, महिलाओं और बच्चों के लिए अलग अलग प्रार्थना स्थल बने हुए है। इस मस्जिद की वास्तुकला को देखकर हर कोई आनंदित होता है। यहाँ पर आने लोग अपनी मनोकामना पूर्ण होने के लिए या होने पर चादर चढ़ाने के जरूर आते है। आइए आज हम बात करते है, हाजी अली दरगाह (Haji Ali Dargah) के बारे में जानकारी (Information) विस्तार सहित। 



दरगाह का इतिहास (The Dargah History)


कुछ विद्वानों के अनुसार सैय्यद पीर हाजी अली को एक महिला सड़क पर खड़ी रोते हुए मिली। जिसके हाथ में एक खली बर्तन था। हाजी अली जी ने उस महिला से बड़ी विनम्रता से पूछा "आप क्यों रो रही हो?" इस पर महिला का जवाब आया कि "मेरे बर्तन में जो भी तेल था, वह धरती पर गिर गया है। घर जाने पर मेरा पति मुझे पिटेगा" यह सुनकर हाजी अली ने धरती को निचोड़ कर सारा तेल उसके बर्तन में डाल दिया। महिला बड़ी खुशी के साथ अपने घर की तरफ चली गयी। 


यह भी पढ़े :- महाराष्ट्र में पर्यटन स्थल के बारे में जानकारी


सैय्यद पीर जी को बाद में सोचा कि "उन्होंने धरती को निचोड़ कर घायल कर दिया है। यह बहुत बड़ा उनसे गुनाह हो गया है। इसके पछतावे के लिए वह भारत में आ गए। जहाँ पर उन्होंने इस्लाम धर्म का पूरे मन के साथ प्रचार किया। लोग उनके प्रवचन सुनकर बहुत बड़ी संख्या में अनुयायी बनते गए। देखते देखते उनकी प्रसिद्धि भारत के कोने कोने में फ़ैल गयी। 


कहा जाता है कि हाजी पीर जी ने अपने सेवादारों को आदेश दिया था कि उनके शरीर छोड़ने के बाद, शरीर को दफ़नाने के बजाय समुद्र में बहा दिया जाए। उनके शरीर को ताबूत में बंद कर कर के सागर में बहा दिया गया था। जिसके बाद वह ताबूत मुंबई के तट पर पहुंच गया। उनके अनुयायियों ने उसके बाद इस स्थान पर उनको समर्पित एक मस्जिद का निर्माण करवाया।  



बनावट (Structure)


इंडो-मुस्लिम वास्तुकला का बहुत ही सुन्दर चित्रण को सैय्यद पीर हाजी अली दरगाह दर्शाती है। सफ़ेद रंग के संगमरमर पत्थर से बनी बहुत ही सुन्दर मस्जिद है। इसकी ऊँचाई 85 फुट और इसका क्षेत्रफल 4500 वर्ग मीटर है। यहाँ पर पीर हाजी जी का मकबरा मस्जिद के बिलकुल बीच में स्थित है। मकबरे को लाल और हरे रंग के कपड़े से ढका हुआ है। इस स्थान को चदर कहा जाता है। इसमें एक कव्वाल खाने के साथ, औरतों के लिए अलग से विश्राम गृह भी बना हुआ है। 


पीर सैय्यद जी की दरगाह में नमाज को अदा करने के लिए कव्वालियां गायी जाती है। मुसलिम धर्म में कव्वालियों का बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान है। जब लोग पूरे उत्साह के साथ कव्वाली को गाते है, तो ऐसा लगता है कि रूह उस खुदा से जुड़ गई हो। यहाँ जाने वाले लोग कव्वाली को जरूर सुनते है। 



यह भी पढ़े :- सितारों की नगरी मुंबई में घूमने के लिए पर्यटक स्थल


समय (Time)


किसी भी धर्म या मुसलिम लोगों के लिए प्रवेश का समय सुबह 6 बजे से रात 10 बजे तक है। यहाँ प्रवेश करने के लिए किसी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाता है। ध्यान रखे कि आपके कपड़े पूरे शरीर पर होने चाहिए। 



कैसे जाए (How Reach)


हाजी अली दरगाह (Haji Ali Dargah) में जाने के लिए सब से पहले मुंबई आना होगा। मुंबई आने के लिए हवाई जहाज, रेल या सड़क के माध्यम से भी आ सकते है। 



कब जाए (When Go)


मुंबई जाने का सही समय अक्तूबर से फ़रवरी के बीच का समय होता है। इस समय ना ज्यादा सर्दी और गर्मी होती है। बारिश के मौसम में बॉम्बे घूमने की ना सोचे। इस समय बॉम्बे में बहुत ज्यादा पानी भर जाता है। जिसकी वजह से कहीं आना जाना बहुत ही मुश्किल हो जाता है। बॉम्बे (Bombay) महाराष्ट्र (Maharashtra)की सारी जानकारी के लिए गाइड बुक को हमेशा अपने साथ रखे।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

कृपया कमेंट बॉक्स में कोई भी स्पैम लिंक न डालें।

अहमदाबाद गुजरात भारत के पर्यटन स्थल के बारे में विस्तार सहित जानकारी

अहमदाबाद (Ahmedabad) गुजरात का बहुत ही सुन्दर शहर है। यह पहले गुजरात की राजधानी हुआ करता था। इसको कर्णावती नाम से भी पहचाना जाता है। साबरमती...