सोमवार, 11 जनवरी 2021

आप भी जानिए सहारा या महान रेगिस्तान के बारे में - You also know about the Sahara or the great desert




दुनिया के सब से बड़े रेगिस्तान (Desert) का नाम सहारा है। इस रेगिस्तान को महान सहारा (Great desert) के नाम से भी जाना जाता है। यह रेगिस्तान अफ्रीका महाद्वीप (Africa continent)में स्थित है। महान सहारा पूर्व में अटलांटिक महासागर से नील नदी होते हुए लाल सागर तक फैला हुआ है। सहारा रेगिस्तान (Sahara Desert) दक्षिण की तरफ मोरक्को एटलस पर्वत और भू मध्य सागर से घिरा हुआ है। इसके फैलाव का क्षेत्रफल करीब 9.2 मिलियन वर्ग किलोमीटर है। 



मॉरिटानिया, नाइजर, पश्चिमी सहारा, सूडान,  ट्यूनीशिया, अल्जीरिया, चाड, मिस्र, लीबिया और माली का क्षेत्र इस रेगिस्तान के हिस्से में आता है। इस रेगिस्तान में बारिश बहुत कम, वह भी कभी कभी होती है। यहाँ पर कई तरह की वनस्पति, जीव जंतुओं के साथ आदमी भी जीवन व्यतीत करता है। महान सहारा (Great Desert) में बहुत ज्यादा गर्मी पड़ने के बावजूद भी, हर साल बहुत बड़ी संख्या में सैलानी घूमने के लिए आते है। यह वाकई में बहुत ही अद्भुत स्थान है। आइये आज हम बात करते है सहारा रेगिस्तान के बारे में विस्तार सहित। 




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महान सहारा मरुस्थल का इतिहास (History of great sahara desert)


भू वैज्ञानिकों के अनुसार करीब 6000 साल पहले यह जगह बहुत ज्यादा हरी भरी थी। मौसम में एकदम बहुत ज्यादा बदलाव आने के कारण, यह रेगिस्तान में बदल गया। यहाँ पर दिन प्रति दिन गर्मी बहुत ज्यादा बढ़ती गयी। तापमान के बहुत ज्यादा बढ़ने के कारण लोग दूसरे स्थानों की तरफ रुख करने लगे। विद्वानों के विचार अनुसार किसी समय में डायनासोर इस जगह पर रहते थे। लोगों के द्वारा कृषि करने के निशान भी पाए गए है। यहाँ वर्ष 2006 में उल्का पिंड भी वैज्ञानिकों को मिले है।



सहारा रेगिस्तान का रहस्य (Secret of sahara desert)


सहारा रेगिस्तान की में एक नीले रंग की आँख बनी हुई है। इस आँख को अंतरिक्ष से ही देखा जा सकता है। कुछ विद्वानों के अनुसार यह आँख इंसानों के द्वारा बनाई गयी है, वहीं कुछ का कहना है कि यह दूसरे ग्रहों के लोगों के द्वारा बनाई गयी है। कुछ सालों पहले बर्फ गिरने की वजह से इस मरुस्थल में नदी बन गयी थी। गुएल्टा डी आर्चेई नाम की इस नदी का पानी कभी खत्म नहीं होता है। ऊंटों के मल मूत्र के कारण इस नदी का पानी काला पड़ गया है। 



इस मरुस्थल (Desert) का तापमान दिन के समय 56 डिग्री से ज्यादा और रात में शून्य डिग्री से भी नीचे चला जाता है। संसार की सब से बड़ी नील नदी इसी रेगिस्तान से हो कर जाती है। यहाँ पर सब से ज्यादा ऊंटों को खरीदने और बेचने का कार्य किया जाता है। इसके कई टीलों की ऊँचाई 180 मीटर से भी ज्यादा होती है। वर्ष 13 सितम्बर 1922 को इस मरुस्थल का तापमान 136 डिग्री दर्ज किया गया था। 



सहारा का जन जीवन (Sahara's public life)


सहारा में अरबी भाषा मुख्य रूप से बोली जाती है। यहाँ पर तुआरेग लोग अलग अलग कबीले बना कर रहते है। तुआरेग लोग बुर्किना फासो, लीबिया, नाइजीरिया, माली, अल्जीरिया, ट्युनिसिया और मोरक्को देश के लोग है। यह सभी देश अफ्रीका महाद्वीप पर स्थित है। लोग अपने आजीविका चलने के लिए तावीज, गहने और हस्त शिल्प चीजों को बनाने का कार्य करते है। यह लोग प्रदूषण से बचने के लिए अपने मुंह को हमेशा ढक कर रखते है। 


यहाँ मरुस्थल में कई प्रकार के जानवर भी पाए जाते है। जिनमें गेरबिल, जरबोआ, रेगिस्तानी हाथी, बिस्क्रा, डामा हिरण, न्यूबियन जंगली गधा, छिपकली, गिरगिट और कोबरा प्रमुख रूप से पाए जाते है। इस जगह पर खजूर, रेगिस्तानी लौकी, ओलिव पेड़, तामरिस्क प्रमुख वनस्पति है। ज्यादा गर्मी होने के बावजूद कई तरह के पौधे भी पाए जाते है। 



जिन लोगों ने इस रेगिस्तान को घूमने का मजा ट्रेन से लेना हो, तो वह भी संभव है। इस रेगिस्तान के बीच में एक रेल चलाई जाती है, जिसमें पर्यटक बैठ कर इस मरुस्थल का आनंद उठा सकते है। सहारा रेगिस्तान घूमने का आनंद बहुत ही ज्यादा रोचक है। 

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