सोमवार, 9 मार्च 2020

पशुपतिनाथ मंदिर के बारे में जानकारी विस्तार से पढ़िए


नेपाल का पशुपतिनाथ मंदिर (Pashupatinath temple) बहुत ही सुन्दर मंदिर है। यह अपनी सुंदरता के कारण दुनिया भर के प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है। यह एक हिन्दू मंदिर है। इस मंदिर में भगवान शिव की पूजा की जाती है। यह मंदिर काठमांडू घाटी के पूर्वी हिस्से में बागमती नदी के किनारे पर स्थित है। इस मंदिर का निर्माण 5 वीं सदी में किया गया था। आइए आज हम बात करते है, पशुपतिनाथ मंदिर के बारे में (Information About Pashupatinath Temple)।

मंदिर का इतिहास (Temple History)


पशुपतिनाथ मंदिर के निर्माण को ले कर कई इतिहासकारों में मतभेद पाए जाते है। किसी की इसके निर्माण की सही तारीख नहीं पता है। यह काठमांडू का सब से पुराना मंदिर है। कुछ इतिहासकारों के हिसाब से इस मंदिर का निर्माण सोमदेव पशुप्रेक्ष ने तृतीय ईसा पूर्व करवाया था। 17 वीं सदी के अंत तक इस मंदिर का मुख्य क्षेत्र जाने की बार नष्ट हुआ और कितनी बार बना। वर्ष 1697 में नेपाल के नरेश भूपलेंद्र मल्ला ने फिर से इससे बनवाया।


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मंदिर की बनावट (Temple Shape)


पशुपतिनाथ मंदिर (Pashupatinath temple) बहुत ही सुंदर और आकर्षक है। यह मंदिर नेपाली शिवालय शैली में निर्मित है। इस मंदिर के द्वार चांदी से, छत सोने और तांबे से, मढ़े हुए है। यहाँ मंदिर की मुख्य छत पर सोने का शिखर बना हुआ है। मंदिर के मुख्य गर्भ ग्रह में भगवान शिव की मूर्ति स्थापित की गयी है। भगवान शिव के वाहन नंदी बैल की विशाल स्वर्ण प्रतिमा है।




पशुपति नाथ मंदिर में विशेष देवता का मुख्य लिंग पत्थर के रूप में स्थापित है। यह लिंग करीब एक मीटर ऊँचा है। लिंग की हर दिशा में एक मुंह है। हर मुंह को मनुष्य के निर्माण में सहायक पाँच तत्वों को आधार माना है। इन पाँच तत्वों के नाम वायु, पृथ्वी, जल, अग्नि, आकाश है। मंदिर की मुख्य मूर्ति को बहुत ही सुन्दर पोशाक डाली गयी है। इस मंदिर का इतिहास हजारों साल पुराना है। इस मंदिर सब से पहली बार एक शिव लिंग की खोज हुई थी।

मंदिर बनने की कथा (Temple Story)


पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान शिव और देवी पार्वती जी ने पृथ्वी को घूम कर देखने का मन बनाया। पृथ्वी पर जाने से पहले उन्होंने हिरण का रूप धार लिया था। शिव जी के पृथ्वी पर भेष बदल कर जाने से, देवता नाराज़ हो गए। जिन्होंने मिलकर हिरण को बहुत मारा। इस मार पीट के दौरान हिरण का एक सींग टूट कर गिर गया। इस सींग को कई सदियों के बाद एक चरवाहे की गाय रोज़ एक स्थान पर दूध डालती थी, जिसे देख कर उस चरवाहे ने उस स्थान की खुदाई की, जिसमें शिव लिंग बाहर निकला। उस के बाद इस स्थान पर पशुपतिनाथ मंदिर (Pashupatinath temple) बना।

मंदिर में रोजाना होने वाली पूजा (In Temple Pray)


इस मंदिर का द्वार सुबह 4 बजे सैलानियों के खुल जाता है। मंदिर के मुख्य पुजारी सुबह 8 .30 बजे आकर भगवान की मूर्तियों को नहलाया जाता है। कपड़े भी रोजाना बदले जाते है। इसके बाद सुबह 9 .30 बजे भगवान को प्रसाद का भोग लगाया जाता है। 10 बजे के बाद से दोपहर 1.45 तक तीर्थ यात्री भी पूजा कर सकते है। इसमें मंदिर के पुजारी कुछ विशेष हिदायत देते है। दोपहर को 1.50 बजे भगवान को भोग लगवाया जाता है। मंदिर के पुजारी सुबह की कथा को समाप्त कर देते है।




शाम की आरती 5.15 पर शुरू होती है। यहाँ पर शाम को 6 बजे शनिवार और सोमवार को बागमती के किनारे होने वाली विशेष गंगा आरती को देख सकते है। रावण के द्वारा लिखित शिव तांडव के साथ गंगा आरती शाम को की जाती है। यह दृश्य देखने के लायक है। इस आरती में हज़ारों लोग शामिल होते है।
शाम 7 बजे मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाते है।

भगवान की मूर्ति का अभिषेक सुबह 9 बजे से 11 बजे तक ही किया जाता है। तीरथ यात्रियों के द्वारा अभिषेक करने के लिए मंदिर के काउंटर पर 1100 रुपए की पर्ची कटवानी पड़ती है। यह अभिषेक उसी दिशा में किया जा सकता है, जिस दिशा में भगवान का चेहरा दिखाई देता है। इस मंदिर में विशेष प्रथा है कि केवल चार पुजारी ही इस मंदिर की मूर्ति को हाथ लगा सकते है। दो पुजारी दैनिक पूजा का कार्य करते है, इनको भट्ट कहा जाता है। दूसरे पुजारी को भंडारी कहा जाता है, इनका काम मंदिर की देखभाल करना होता है।




पशुपतिनाथ मंदिर में त्यौहार ((Pashupatinath Temple In Festival)

पशुपतिनाथ मंदिर में हर साल बहुत ज्यादा त्यौहार मनाए जाते है। जिसमें महाशिवरात्रि, बाला चतुर्थी  और तीज का त्यौहार मनाए जाते है। हिन्दू नेपाली महिलाओं के द्वारा अपने पति की लम्बी उम्र के लिए तीज का त्यौहार मनाया जाता है। इस पर्व में महिलाएं उपवास रखती है। हिन्दू लोगों के अलावा किसी और धर्म के लोगों को मुख्य मंदिर में जाने की इजाजत नहीं है। गैर हिन्दू लोग चाहे तो, छोटे मंदिरों में दर्शनों के लिए जा सकते है। इन मंदिरों में भी दर्शन करने के लिए शुल्क लिया जाता है।




इस मंदिर में नतमस्तक होने के लिए साल में कभी भी जा सकते है। यहाँ पर बंदर बहुत ज्यादा संख्या में पाए जाते है। इन बंदरों से अपने सामान को बचा कर रखे। सैलानी इस मंदिर को घूमने के लिए गाइड ले। हिन्दू तीर्थ यात्रियों के लिए यह बहुत बढ़िया स्थान है।

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