बुधवार, 11 मार्च 2020

उज्बेकिस्तान का वीजा और पर्यटन स्थल की जानकारी

उज्बेकिस्तान (Uzbekistan) एक मुसलिम देश है। इस देश के बारे में बहुत ही काम लोग जानते है। यह एक खूबसूरत और आकर्षक देश है। सैलानियों के लिए इस देश में बहुत कुछ है। इस देश के लोग बहुत ही दोस्ताना होते है। आइए आज बात करते है, उज्बेकिस्तान (Uzbekistan) के वीज़ा (Visa) और पर्यटन स्थलों (Tourist places) के बारे में।

वीज़ा (Visa)


यात्री के पासपोर्ट की अवधि कम से कम 6 महीने होनी जरूरी है। पासपोर्ट में कम से कम दो पेज खाली ज़रूर हो। पासपोर्ट में किसी प्रकार की छेड़छाड़ ना की गयी हो। होटल बुकिंग या यात्री के पास निमंत्रण पत्र ज़रूर हो, जहाँ उसने ठहर ना हो। वापसी की कन्फ़र्म एयर टिकट हो। ऑनलाइन वीज़ा आवेदन की भारतीयों के लिए सुविधा उपलब्ध है। यात्रा से कम से कम 5 या 3 दिन पहले वीज़ा आवेदन करें। यह वीज़ा 30 दिनों के लिए होगा, एक बार जाने के लिए। इस वीज़ा के लिए 20 डॉलर शुल्क लगेगा।




हिस्ट्री म्यूजियम (History museum)

हिस्ट्री म्यूजियम उज्बेकिस्तान (Uzbekistan) की राजधानी ताशकंद (Tashkent) में स्थित है। इस संग्रहालय में इस देश को सही रूप से जानने का मौका मिलता है। यहाँ पुराने सिक्के, किताबें, पुरातत्व लेख पढ़ने और देखने के लिए मिलते है। यह चार मंजिला संग्रहालय है। सिर्फ सोमवार को छोड़ कर सुबह 10 बजे से लेकर शाम 5  बजे तक खुला रहता है।


नवोई रंगमंच (Navoi theater)


नवोई रंगमंच में पर्यटकों को इस देश के नाटकों को देखने का अवसर मिलता है। जिन सैलानियों को नाटकों में रुचि हो उन लोगों के लिए यह बहुत बढ़िया स्थान है। नवोई रंगमंच के थिएटर अपनी वास्तुकला के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है। यहाँ पर नाटक देखने के चाहवान लोग ऑनलाइन 6 बजे तक टिकट ख़रीद सकते है। यहाँ जाने के शार्ट ड्रेस, फ्लिप फ्लॉप या स्नीकर्स पहन कर नहीं जा सकते है।





चौरसू बाजार (Chorsu market)


चौरसू बाजार ताशकंद (Tashkent) का बहुत ही पुराना और आकर्षक बाजार है। यहाँ पर ज्यादा स्टाल ही लगे मिलते है। यह बाजार सुबह सुबह ही खुल जाता है। इस बाजार से लोग अपनी रोज़मर्रा की चीज़ें ख़रीद कर ले जाते है। चौरसू बाजार में बढ़िया रेस्टोरेंट, कैफ़े, स्ट्रीट फूड आसानी से मिल जायेंगे।




ताशकंद इस्लामिक विश्विद्यालय (Tashkent Islamic University)


ताशकंद इस्लामिक विश्वविद्यालय उज्बेकिस्तान (Uzbekistan) के मुख्य यूनिवर्सिटी में से एक है। इसमें बहुत ही सुंदर तीन मक़बरे बने हुए है। किसी बाहरी व्यक्ति को अंदर जाने की अनुमति नहीं है। इसके अंदर जाने के लिए पहले अनुमति लेनी पड़ती है।



कुक्लैडश मदरसा (Kukeldash Madrasah)


कुक्लैडश मदरसा एक धार्मिक स्कूल है। यह चौरसू बाजार और जुमा मस्जिद के बिलकुल पास में स्थित है। यह मदरसा यहाँ के मुख्य स्थानों में से एक है। मदरसे की बनावट को देख कर सैलानी दंग रह जाते है। हर साल काफी लोग इसे देखने के लिए आते है।



भूकंप स्मारक (Bhukammp Memorial)


उज्बेकिस्तान (Uzbekistan) में भूकंप स्मारक को करेज स्मारक के रूप में भी जाना जाता है। 26 अप्रैल 1966 पर 9-प्वाइंट रिक्टर स्केल के आए भूकंप ने ताशकंद के एक बहुत बड़े हिस्से को बिलकुल खत्म कर दिया था। एक चौथाई के करीब लोगों को बेघर होना पड़ा था। यह बहुत ही संताप से भरा समय था। यहाँ के लोगों ने फिर से अपनी जिंदगी को फिर से बहुत ही जल्दी खड़ा किया। यह बहुत ही हिम्मत से भरा काम था। इस भूकंप की याद में ठीक 10 साल के बाद एक स्मारक का उद्घाटन किया गया। हर साल बहुत बड़ी संख्या में लोग इस स्थान को देखने के लिए ज़रूर आते है।




ताशकंद मीनार (Tashkent Tower)


ताशकंद मीनार अपनी खूबसूरती के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है। इस मीनार से ताशकंद शहर के बहुत बड़े हिस्से को सैलानी बड़े आराम से देख सकते है। सैलानियों के लिए एक बुरी बात यह है कि वह इसके अंदर कैमरे नहीं ले कर जा सकते है।




काफल-शशि समाधि (Kaffal Shashi Samadhi)


ताशकंद के बहुत ही बड़े संत क़फ़ल- शशि थे। क़फ़ल-शशि ने इस्लाम का प्रचार करने के साथ, समाज सुधारक और कवि थे। यह संत करीब एक हजार साल पहले यहाँ रहते थे। उनकी समाधि खास्त इमाम चौराहे के उत्तर-पूर्व में स्थित है। इस्लाम को मानने वाले लोग इस समाधि पर नतमस्तक होने के लिए ज़रूर जाते है।



जुमा मस्जिद (Juma Mosque)


जुमा मस्जिद ताशकंद में सब से ऊंची मस्जिद है। कहा जाता है कि इस मस्जिद का निर्माण 9 वीं सदी के करीब गए था। यह मस्जिद कई बार क्षतिग्रस्त हुई और कई बार इसे फिर से बनाया गया। वर्ष 2003 में इस मस्जिद में कई तरह के बदलाव किए  गए। इस मस्जिद के दो मुख्य गुंबदों को आपस में जोड़ गया था।



छोटी मस्जिद (Choti Masjid)


छोटी मस्जिद अपनी सुंदरता के कारण ताशकंद में विशेष स्थान रखती है। यह मस्जिद पूरी तरह से संगमरमर पत्थर से तैयार की गयी है। इस मस्जिद का निर्माण 2014 में किया गया था। यहाँ पर एक बार में करीब 2400 लोगों के बैठने की व्यवस्था है।



रेगिस्तान स्क्वायर (Registan Square)


समरकंद के मुख्य चौंक का नाम रेगिस्तान स्क्वायर है। कहा जाता है कि मध्य युग में इस स्थान पर बहुत बड़ा बाजार था। यह तैमूर युग की याद दिलवाता है। अकसर भूकंप के कारण, यहाँ बानी इमारतों को बहुत ज्यादा नुकसान हुआ। जिसको 20 सदी के समय में सोवियत संघ ने फिर से ठीक करने के लिए कोशिश की।



बीबी हनीम मस्जिद (Bibi Hanim Mosque)


बीबी हनीम मस्जिद किसी समय दुनिया की सब से बड़ी मस्जिदों में से एक थी। यह तैमूर के समय में 1399 से 1404 के बीच में बनी है। इसके गुंबद नीले रंग के बने हुए है। यह मस्जिद 1897 में भूकंप के कारण खंडहर बन गयी थी। इस मस्जिद को 1970 में फिर से बनाया गया। यह बहुत ही सुन्दर इमारत है। यहाँ पर बहुत बढ़ी संख्या में लोग घूमने के लिए आते है।




शाह-ए-ज़िंदा (Shah-E-Zinda)


शाह-ए-ज़िंदा को "लिविंग किंग मकबरे" के नाम से भी जाना जाता है। इसमें उज्बेकिस्तान (Uzbekistan) देश के राजाओं को और वहां की बड़ी बड़ी हस्तियों को दफ़न किया गया था। ऐतिहासिक इमारतों में रुचि रखने वाले लोगों के लिए यह बहुत बढ़िया स्थान है।


                                           

उलुगबेक वेधशाला (Ulugbek Madrasah)


उलुगबेक वेधशाला को 1908 में खोजा गया था। यह वेधशाला तैमूर के पौत्र राजा उलगबेग ने बनवाया था। उलगबेग बहुत ही अच्छे खगोल वैज्ञानिक थे। इस इमारत की ऊँचाई करीब 30 मीटर है। यह शहर से थोड़ी दूरी पर स्थित है। आज के समय में यह एक संग्रहालय है।



सियाब बाजार (Siyaab Market)


सियाब बाजार समरकंद (Samarkand) के मुख्य बाजार में से एक है। सैलानियों को इस बाजार में उज्बेकिस्तान की पूरी झलक दिखाई देगी। यहाँ से आप हर प्रकार की चीज़ें ख़रीद सकते है। यह सामान छोटे छोटे स्टालों पर बिकने के लिए मिलेगा। यहाँ के व्यंजन दुनिया भर में प्रसिद्ध है।




बुखारा आर्क महल (Ark of Bukhara)


बुखारा (Bukhara) आर्क महल 5 वीं शताब्दी में बनाया गया था। यह बहुत ही सुन्दर महल था। वर्ष 1920 में हुई बमबारी के दौरान इस महल को काफी नुकसान पहुंचा था। यह राजाओं का निवास स्थान था। इस महल में हवेली, मंदिर, सैन्य बैरक, सिक्का बनाने का कारखाना, गोदाम, कार्यशालाएं और जेल  बनी थी। इस को पर्यटक एक छोटे से हिस्से में ही देख सकते है।



चार मीनार (Chor Minor)


चार मीनार वास्तव में मदरसे के चारों तरफ बनी चार मीनार है। इस मदरसे को वर्ष 1807 में बनाया गया था। यह चार मीनार दुनिया के चार धर्मों को दर्शाने का काम करती है। यहाँ की सड़कें भारतीय सड़कों से काफी मिलती जुलती है।



कलोन मिनारेट (Kalon Minaret)


कलोन मिनारेट मीनार को अर्सलान खान राजा ने 1127 में बनवाया था। यह मीनार बहुत ही सुन्दर और
आकर्षक है। वर्ष 1127 में यह मध्य एशिया की सब से ऊंची इमारत में से एक थी। इसकी नींव ज़मीन में 10 मीटर और ऊँचाई 47 मीटर है। जब चंगेज खान ने इस शहर पर हमला किया तो उसने सारे शहर में सिर्फ इस इमारत को सही रखने का आदेश दिया।

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