शनिवार, 4 जनवरी 2020

दिल्ली में घूमने वाली जगह जंतर मंतर (Jantar Mantar, a place to visit in Delhi)

भारत में जंतर मंतर (Jantar Mantar) वेधशाला का नाम शायद ही किसी ने ना सुना हो। दिल्ली (Delhi) में अकसर प्रदर्शन और धरने  इस स्थान पर होते रहते है, जिसके कारण हर समय यह स्थान चर्चा में रहता है। जंतर मंतर वेधशाला का निर्माण महाराजा जय सिंह जी ने साल 1724 में करवाया था। महाराजा जय सिंह की खगोलीय ज्ञान की बहुत ज्यादा जानकारी थी। आकाश संबंधी जानकारी जुटाने के लिए उन्होंने इस वेधशाला का निर्माण करवाया था। आइए आज हम आप को बताते है कि जंतर मंतर दिल्ली स्थान (Place) के बारे में जानकारी (Information) विस्तार के साथ। 




जंतर मंतर का इतिहास (Jantar Mantar History)


सम्राट मुहम्मद शाह के समय में मुसलिम और हिन्दू खगोल विद्वानों के बीच ग्रहों को लेकर बहुत ज्यादा बहस छिड़ गयी। जिसके बाद मुहम्मद शाह ने जयपुर के महाराजा जय सिंह (Maharaja Jai singh) को इस बारे कुछ करने के लिए कहा था। महाराजा जय सिंह बचपन से खगोल में विज्ञान में बहुत ज्यादा रुचि रखते थे। सही समय और सही ग्रहों कि जानकारी लेने के लिए जंतर मंतर (Jantar Mantar) वेधशाला का निर्माण करवाया था। इस वेधशाला से प्राप्त आंकड़ों के हिसाब से ग्रहों कि स्थिति को जय सिंह ने नग्न आँखों से बता दिया था।




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कार्य (Work)


ग्रहों कि गति, दिशा और समय देखने के लिए जंतर मंतर वेधशाला में 13 खगोलीय यंत्र स्थित है। इन खगोलीय यंत्रों के द्वारा महाराजा जय सिंह (Maharaja Jai singh) ने नग्न आँखों से ग्रहों कि दिशा, गति और समय को सही जानकारी उपलब्ध करवाई थी। सारी वेधशाला का निर्माण ईंट, मलबे से करने के बाद उस के ऊपर चुने पत्थर का प्लास्टर किया गया है। समय के साथ साथ यंत्रों में थोड़ा बहुत बदलाव भी किया गया था। जंतर मंतर वेधशाला मिस्र वेधशाला टालेमिक खगोल विज्ञान से काफी मिलती जुलती है। यहाँ पर स्थित 13 यंत्रों में से चार यंत्रों से मुख्य रूप से कार्य किया जाता है। 



सम्राट यंत्र (Smarat Yantra)


70 फुट ऊँचा, 114 फुट लम्बा, और 10 फुट मोटा के विशाल आकार का त्रिभुज यंत्र का नाम सम्राट यंत्र है। सम्राट यंत्र की खासियत है कि सही समय को आधे सेकंड की सटीकता से माप सकते है। ग्रहों के सही कोण नापने के लिए बहुत ही सटीक उपकरण साबित हुआ। 

जयप्रकश यंत्र (Jaiparkash Yantra)


खोखले गोले की तरह दिखाई देने वाले यंत्र का नाम जय प्रकाश यंत्र है। जय प्रकाश यंत्र के माध्यम से खगोल वैज्ञानिक तारों की सही स्थिति का आसानी से पता लगा सकते है। 

मिश्रा यंत्र (Mishra Yantra)


महाराजा जय सिंह (Maharaja Jai singh) ने साल के सब से छोटे दिनों को जानने के लिए मिश्रा यंत्र (Mishra yantra) का मॉडल तैयार कर के खुद बनवाया था। इस यंत्र के साल के सब से छोटे दिनों का आसानी से पता लगाया जा सकता है। 


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राम यंत्र (Ram Yantra)


राम यंत्र बेलन के आकार की दो सूचनाएँ बनी हुई है। जिनका मुंह आसमान की तरफ खुला हुआ है। राम यंत्र का निर्माण सिर्फ जयपुर (Jaipur) और दिल्ली (Delhi) की वेधशालाओं में ही किया गया था। इस यंत्र का उपयोग पृथ्वी पर अक्षांश और देशांतर के आधार पर तारों की ऊँचाई को मापने के लिए प्रयोग किया जाता है।


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