बुधवार, 27 नवंबर 2019

मध्य प्रदेश के त्यौहारों की जानकारी (Madhya Pradesh festival information)


भारत (India) देश एक लोकतांत्रिक देश है। जहाँ कई धर्मों के लोग रहते है। बहु धर्मी देश होने के कारण इस देश में बहुत सारे त्यौहार (Festivals) मनाये जाते है। भारत के अलग अलग राज्यों में एक के बाद त्यौहार मनाया जाता है। हर राज्य के त्यौहार को मनाने का रिवाज अलग होता है। आज हम बात करते है मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में मनाये जाने वाले त्यौहारों के बारे में जानकारी (Information)।




अखिल भारतीय कालिदास समारोह (Akhil Bhartiya Kalidas Samaroh)


भारत देश के प्राचीन महान कवि कालिदास जी के सन्मान में अखिल भारतीय कालिदास समारोह का उत्सव (Festival) मनाया जाता है। यह उत्सव मध्य परदेश (Madhya Pradesh) में सात दिनों तक चलता है। इस उत्सव में शामिल होने के लिए दुनिया के कोने कोने से लेखक यहाँ पर आते है। सभी लेखक अपनी अपनी रचनाओं से लोगों का दिल जीतने कि कोशिश करते है। इस उत्सव में बहुत से नाटकों का आयोजन भी किया जाता है।




खुजराहो उत्सव (Khajuraho Festival) 


सात दिनों तक खुजराहो उत्सव मध्य प्रदेश में बड़ी ही धूमधाम के साथ मनाया जाता है। यह उत्सव चित्र गुप्त और विश्वनाथ मंदिर के सामने खुले मैदान में मनाया जाता है। खुजराहो उत्सव में कत्थक, भरतनाट्यम, ओडिसी, कुचिपुड़ी, मणिपुरी, और कथककली जैसे कई प्रकार के नृत्यों का आयोजन किया जाता है। खुजराहो का उत्सव उन लोगों के सन्मान में मनाया जाता है, जिन्होंने इस मंदिर का निर्माण करवाया था। इस उत्सव के दौरान इस मंदिर को बहुत बढ़िया ढंग से सजाया जाता है।



लोक रंग उत्सव (Lokrang Festival)


आदिवासी लोक कला अकादमी हर साल लोक रंग उत्सव मध्य प्रदेश में आयोजित करती है। यह बहुत ही लोगों में लोकप्रिय उत्सव है। लोक रंग उत्सव में सभी नर्तक आगे की तरह पैर बढ़ा कर नृत्य करते है। इस उत्सव में बहुत सारे नृत्य लोगों के समक्ष पेश किए जाते है। मध्य प्रदेश आदिवासी लोगों के द्वारा बनाये गए हस्त निर्मित चीज़ों की प्रदर्शनी लगाई जाती है। लोक रंग त्यौहार को आयोजित करने का मकसद भारत को एक देश के रूप में दिखाना है।


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भगोरिया हाट उत्सव (Bhagoria Haat Festival)


भगोरिया हाट उत्सव मध्य प्रदेश में भील जाति के द्वारा मनाया जाता है। इस उत्सव में लड़का, लड़की एक दूसरे को पसंद करने पर एक दूसरे के गालों पर लाली लगाते है। अपना अपना जीवन साथी पसंद करने के बाद लड़का लड़की मैदान से भाग जाते है। ऐसे जीवन साथी पसंद करने पर माँ बाप किसी प्रकार का एतराज नहीं जता सकते है। भील जाति के कुछ लोगों का ये भी कहना है की भगोरिया उत्सव फसल की कटाई के समय आयोजित किया जाता है।



होली (Holi)


होली (Holi) का त्यौहार मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) साथ पूरे देश में बड़ी धूमधाम के साथ मनाया जाता है। होली वाले दिन के बाद से ठंड (सर्दियां) खत्म होने लगती है। होली वाले दिन लोग एक दूसरे को गले मिलकर रंग लगाते है। ढोल की धुन पर लोग नाचते है। मध्य प्रदेश में होली के 5 दिन के बाद आदिवासी समूह के लोग रंग पंचमी का त्यौहार मानते है। सैलानी विशेष तौर पर यहाँ पहुंचते है, होली का त्यौहार मनाने के लिए।



कुम्भ मेला (Kumbh Mela) 


भारत (India) का सब से बड़ा मेला कुम्भ का मेला होता है। कुम्भ का मेला भारत के चार बड़े शहरों में एक साथ मनाया जाता है।  इन शहरों के नाम इलाहाबाद, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक है। यह मेला 12 सालो में 4 बार मनाया जाता है। हिन्दू मान्यताओं के अनुसार इस समय पवित्र गंगा नदी में डुबकी लगाने से लोगों के किए पाप धुल जाते है। कुम्भ के मेले में कई प्रकार के सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। हस्त निर्मित चीज़ों की प्रदर्शनी भी लगाई जाती है। भारत के कोने कोने से हलवाई कारीगर अपनी अपनी कारीगरी का जौहर स्वादिष्ट पकवान बनाकर दिखाते है।




मालवा उत्सव (Malwa Utsav)


मालवा उत्सव दुनिया के कलाकारों को एक मंच देता है अपनी अपनी प्रतिभा दिखाने का। यह उत्सव मध्य प्रदेश में बड़े उच्च स्तर पर मनाया जाता है। दुनिया के कोने कोने से मालवा उत्सव में शामिल होने के लिए अलग अलग कला के माहिर लोग आते है। इस त्यौहार को संस्कृति का त्यौहार कहना बिलकुल भी गलत नहीं होगा। कला के साथ इस त्यौहार में हस्त निर्मित चीज़ें और स्वादिष्ट व्यंजनों का लोग बहुत ज्यादा लुत्फ उठाते है।



दशहरा (Dussehra)


दशहरा (Dussehra) उत्सव भारत के हर राज्य में मनाया जाता है पर मध्य प्रदेश में यह काफी बड़े स्तर पर मनाया जाता है। दशहरा को विजयादशमी का त्यौहार भी कहा जाता है। हिन्दू धर्म की मान्यता अनुसार दशहरा नवरात्रे के दसवें दिन रावण पर राम की विजय के उपलक्ष्य के रूप में मनाया जाता है। इस दिन लोग रावण, मेघनाथ, कुम्भ करण के पुतले जलाकर दशहरा उत्सव मानते है। लोग नए कपड़े पहनते और मिठाइयां कहते है।




नाग जी का मेला (Naag Ji Ka Mela)


आदिवासी क्षेत्र मध्य प्रदेश के लोगों का बहुत ही खास नाग जी का मेला उत्सव है। मुग़ल सम्राट अकबर के समय में बहुत ही माने हुए संत नाग जी के सम्मान में नाग जी उत्सव मनाया जाता है। इस मेले की शुरुआत में बंदर का व्यापार किया जाता था लेकिन आज इस त्यौहार में हर प्रकार के घरेलू जानवर की खरीद फरोख्त की जाती है। नाग जी के मेले में कई प्रकार के सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन भी किया जाता है।




चिठीयागिरी विहार उत्सव (Chetiyagiri Vihara Utsav)


चिठीयागिरी विहार उत्सव मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के साँची शहर में आयोजित किया जाता है। इस उत्सव में बौद्ध भिक्षुओं और तीर्थ यात्रियों के द्वारा हिस्सा लिया जाता है। चिठीयागिरी उत्सव में भिक्षुक और यात्री बौद्ध के सब से पहले दो शिष्य साडी पुथा और महा मोगलाना के अवशेषों के दर्शन करते है। यह अवशेष 1853 में सपूत 3 विहार में रखे गए है। जिनको उत्सव के दौरान तीर्थ यात्रियों को दिखाए जाते है।



तानसेन संगीत समारोह (Tansen Sangeet Samaroh)


मुग़ल सम्राट अकबर के दरबार के नौ रत्नों में संगीतकार तानसेन (Tansen) एक थे। तानसेन संगीत समारोह तान सेन के मकबरे के नीचे चार दिनों के लिए आयोजित किया जाता है। यह उत्सव संगीत प्रेमियों के लिए बहुत अच्छा उत्सव है। इस उत्सव में नए नए कलाकारों को एक बहुत बड़ा मंच दिया जाता है। यहाँ पर आये संगीत कला के माहिर लोगों का दिल आराम से जीत लेते है। 



दीवाली (Diwali)


दीवाली (Diwali) का त्यौहार (festival) सारे देश में पुरी धूमधाम के साथ मनाया जाता है। दीवाली का त्यौहार राम के 14 साल के वनवास के बाद अयोध्या लौटने के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। मध्य प्रदेश में यह उत्सव 5 दिन बड़ी धूमधाम के साथ मनाया जाता है। इस दिन लोग अपने घरों के बाहर दीये जलाते, मिठाइयां खाते और नए कपड़े पहनते है। दीवाली वाले दिन लोग माता लक्ष्मी की पूजा करते है। लोगों का मानना है कि इस दिन लक्ष्मी माता की पूजा करने से धन घर में आता है।



पंच मढ़ी त्यौहार (Pachmarhi Festival)


मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) का बहुत ही आकर्षक त्यौहार पंच मढ़ी उत्सव है। पंच मढ़ी उत्सव में कला प्रदर्शन के द्वारा संगीत, नृत्य और शिल्प कला को प्रस्तुत किया जाता है। देश विदेश से कलाकार पंच मढ़ी उत्सव में हिस्सा लेने के लिए मध्य प्रदेश में आते है। इस उत्सव में ज्यादा से ज्यादा लोक कलाओं का प्रदर्शन किया जाता है। कारीगरों के बनाये गए सामान को बेचने के लिए बहुत सारे स्टाल लगाए जाते है। विभिन्न प्रकार के व्यंजनों के स्वाद भी लोग यहाँ पर आ कर लेते है।

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