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1500 मौतों का गवाह जानिए कौन? (Know who is the witness of 1500 deaths)

वैसाखी वाले दिन 13 अप्रैल 1919 को जालिआंवाला बाग (Jallianwala bagh), अमृतसर (Amritsar)  में जनरल डायर (General Dyer) के हुकम पर निहत्थे लोगो पर अंन्धा धुंध गोलियों की बौछार की गयी थी, जिसमें सूत्रों के अनुसार 1500 लोगो ने अपनी जान को गवां दिया था। इस हत्या कांड की पूरी दुनिया में बहुत ज्यादा निंदा हुई थी। सरदार उधम सिंह ने जनरल डायर (General Dyer) को मार कर इस हत्या काण्ड (massacre) का बदला लिया था। आइए जलिआंवाला बाग हत्या काण्ड पर पुरे विस्तार से बात करते है।



जलिआंवाला बाग की स्थिति (Jallianwala bagh, Location)

जलिआंवाला बाग (Jallianwala bagh) अमृतसर (Amritsar) शहर में गोल्डन टेम्पल (Golden temple) गुरुदुवारा साहिब के बिलकुल पास में है। यह बाग 200 गज लम्बा और 100 गज चौड़ा है। जलिआंवाला बाग तीन तरफ से दीवारों से घिरा हुआ है। इसके एक तरफ बहुत ही छोटा सा रास्ता है। इस रास्ते से ही बाग में प्रवेश और बाहर आ सकते है। बाग में केवल एक कुआँ है।

जलिआंवाला बाग हत्या काण्ड (Jallianwala bagh massacre)

हिदुस्तान को आजादी दिलवाने में बहुत से लोगो का योगदान रहा है। जाने कितनी ऐसे लोग है जिनके कभी नाम भी नहीं सामने आ पाए। जलिआंवाला बाग ऐसे ही शहीदो की क़ुरबानी को चीख चीख कर बता रहा है।  अप्रैल 1919 में आजादी की लड़ाई लड़ने वाले सैफुद्दीन किचलू और सत्यपाल नेताओ को अंग्रेजी सरकार ने कैद कर लिया था। जिसके बाद 13 अप्रैल 1919 को गिरफ्तारी के विरोध में शांतमयी ढंग से विरोध करने के लिए लोग जलिआंवाला बाग में इकट्ठे हुए थे। यह सभी लोग बिलकुल निहत्थे थे, जिनके पास किसी भी प्रकार का कोई हथियार नहीं था। बच्चे, बूढ़े, जवान, औरत सभी इस शांतमयी विरोध में इकट्ठे हुए थे।



जनरल डायर (General Dyer) ने कोई भी बड़ा विरोध ना हो, इसलिए उसने किसी भी प्रकार के जलसे पर रोक लगा दी थी। जब उसे पता चला की एक बहुत बड़ा जलसा आयोजित किया गया है, जलिआंवाला बाग (Jallianwala bagh) में, वह 50  सिपाहियों को ले कर बाग पर पहुंच गया। 50 सिपाहियों के पास मशीन गन थी। डायर के आदेश पर अँधा धुंध गोलियों की बौछार शुरू हो गयी, बाग में लोगो के इतने बड़े इकट्ठ में भगदड़ मच गयी। कुछ लोग जान बचाने के चक्कर में कुए में कूद गए। गोलियों की बौछार इतिहासकारों के बयानों से करीबन 10 मिनट तक चली थी। दस मिनट के अंदर अंदर सारा असला खत्म हो गया था। बाग का एक ही छोटा रास्ता होने के कारण कोई भी बाहर नहीं जा सका।

जलिआंवाला बाग के इस हत्याकांड में सरकारी सूत्रों के हिसाब से लगभग 379 लाशें और 1100 के करीब जख्मियों की पहचान की गयी थी। कुछ एजेंसियों के अनुमान से 1500 से ज्यादा लोगो की मौत हुई है। जिनमें 6 माह का बच्चा, औरतें, बच्चे, बूढ़े, जवान लोग शामिल थे। बाग के कुए में 120 लोगो की लाशें मिली थी। यह बहुत ही भयानक मंजर था। जनरल डायर द्वारा किये इस हत्याकांड (Massacre) की निंदा पूरी दुनिया में हुई थी। इस हत्या कांड ने दुनिया के हर शख्स को हिला कर रख दिया था। रविंदर नाथ टैगोर ने इस घटना से आहत हो कर सर की उपाधि को वापिस कर दिया।



जलिआंवाला बाग (Jallianwala bagh) की दीवारों पर गोलियों के निशान आज भी देखे जा सकते है। इस हत्या कांड (Massacre) के बारे में सोच कर ही दिल रो उठता है। सरदार उधम सिंह (Sardaar udham singh) ने जनरल डायर को कॉक्सटन हॉल में अपनी पिस्तौल से 13 साल के बाद गोलियों से भून डाला था। जिसके बाद सरदार उधम सिंह में खड़े रह कर अपनी गिरफ्तातरी दी थी। जिसके बाद उन्हें फांसी की सजा दी गयी थी।



जलिआंवाला बाग में स्मारक (Jallianwala bagh memorial)

इस दर्दनाक मंजर की याद में जलिआंवाला बाग (Jallianwala bagh) में एक स्मारक (Memorial) बनाया गया। गोलियों के निशान को भी सुरक्षित रखा गया है। लाखो की तादात में पर्यटक इस बाग में आ कर उस दर्दनाक पलों को जीने की कोशिश करते है। यहाँ पर एक संग्रहालय भी बनाया गया है। जलिआंवाला बाग़ पहुंचने के लिए पर्यटक हवाई और सड़क मार्ग दोनों में से कोई भी चुन सकते है। पर्यटक बाग़ आने के साथ साथ गोल्डन टेम्पल और वाघा बॉडर पर भी जा सकते है।

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Maninder singh "mani"
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