दिल्ली में घूमने वाली जगहों के बारे में जानकारी (Delhi tourist place Information)



भारत (India) की राजधानी का नाम दिल्ली (Delhi) है। यह शहर ऐतिहासिक इमारतों के लिए और राजनीतिक कारणों के कारण दुनिया भर में मशहूर है। दिल्ली को दो हिस्सों में बाँट दिया गया है, एक हिस्सा पुरानी दिल्ली (Old Delhi), और दूसरा हिस्सा नई दिल्ली है। इस शहर में देखने और घूमने के लिए बहुत सारी जगह है। आइए आज बात करते है दिल्ली (Delhi) शहर की विस्तार से।


लाल किला (Red fort)

लाल किला (Red fort) बहुत ही खूबसूरत इमारत है। यह सारी इमारत लाल पत्थर से बनाई गयी है। इस को मुग़ल बादशाह शाहजहाँ ने बनवाया था। यह 250 एक़ड में फैला हुआ है। लाल क़िले की बनावट लोगो को खुद बी खुद अपने तरफ खींचने का काम करती है। लाल क़िले के अंदर जाने के लिए दो दरवाज़े है, जिनका नाम दिल्ली गेट और लाहौर गेट है। यहाँ पर हर साल लाखों की संख्या में देसी विदेशी लोग आते है। लाल क़िले में प्रवेश करने के लिए भारतीयों को 35 रुपए और विदेशियों को 500 देना पड़ता है। इसके अलावा आप ने फोटोग्राफी करनी है तो उसका भी शुल्क लगेगा।

लाल क़िले में रोज़ शाम को पानी और लाइट का शो पर्यटकों को दिखाया जाता है। या शो बड़ा ही आकर्षक होता है। यहाँ पर स्वतंत्रता संग्राम संग्रहालय भी है। यहाँ पर आप पुरानी दिल्ली (Old Delhi) रेलवे स्टेशन से करीब 20 मिनट चलकर भी पहुंच सकते है। आप अगर दिल्ली के किसी और हिस्से में है तो मेट्रो या ओटो से भी पहुंच सकते है। यह वास्तव में देखने लायक है।


जामा मस्जिद (Jama masjid)

जामा मस्जिद को 1650 में मुग़ल बादशाह शाहजहाँ ने बनवाया था। इस मस्जिद में शनिवार से लेकर वीरवार वाले दिन तक आप सिर्फ उत्तरी और दक्षिणी दरवाज़े से अंदर जा सकते है। पूर्वी दरवाज़े को सिर्फ शुक्रवार को ही खोला जाता है। इसका मुस्लिम भाइयों का कहना है कि इस दरवाज़े से राजा ही प्रवेश करते थे। इस मस्जिद के अंदर बहुत बड़ा आँगन है। यहाँ पर रोज़ाना बड़ी संख्या में लोग नमाज़ अदा करते है। जामा मस्जिद को बलुआ पत्थर ,संगमरमर  से बनाया गया है। आप मेट्रो से चावड़ी स्टेशन के 3 नंबर गेट पर उतर जाए। यहाँ से आप पैदल सिर्फ 15 मिनट में पहुंच सकते है।


इंडिया गेट (India Gate)

इंडिया गेट को प्रथम विश्व युद्ध और अफगान युद्ध में मारे गए 90,000 भारतीय सैनिकों की याद में बनवाया  गया था। इस गेट पर सभी 90,000 शहीद सैनिकों के नाम खुदे है। यह स्मृति स्मारक 1931 में बनवाया गया था। इंडिया गेट के नीचे के लौ हमेशा जलती रहती है। इस लौ को सैनिकों के सम्मान में जलाया जाता है। यहाँ से सीधा रास्ता राष्ट्रपति भवन, संसद भवन कि तरफ भी जाता है। आप को यहाँ आने के लिए केंद्रीय सचिवालय मेट्रो स्टेशन पर उतरना पड़ेगा।
                
              

कुतुब मीनार (Kutub Minar)

कुतुब मीनार का निर्माण आज से करीब 1,000 साल पहले हुआ था। इस मीनार की ऊंचाई लगभग 73  मीटर है। लाल बलुआ पत्थर के द्वारा बनाई गई है। यह भारत की सबसे ऊंची मीनार भी है। ज्यादा पुरानी होने की वजह से और कुछ लोगो के ऊपर जा कर छलाँग लगाने के बाद इस के अंदर जाने की अनुमति पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।

क़ुतुब मीनार को मुग़ल बादशाह कुतुब्दीन ऐबक ने बनवाया था। आप को यहाँ पर आने के लिए कुतुबमीनार मेट्रो स्टेशन पर उतरना पड़ेगा। इस मीनार को देखने का समय सुबह 10 बजे से लेकर शाम 6 बजे तक का है। इस मीनार को देखने के लिए भारतीय लोगो को 30 रुपए और विदेशी लोगो को 500 रुपए का टिकट लगेगा।


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हौज खास कॉम्पलेक्स (Houz Khass Complex) 

हौज खास को हौज-ए-अलई के नाम से भी जाना जाता है। हौज खास में पुराने समय में बनी मस्जिद, अलग अलग कब्रें, पानी की टंकियां शामिल है। इस क्षेत्र के आस पास आप को हौज खास गांव, बढ़िया रेस्टोरेंट, कैफ़े, बुटीक स्टोर्स भी आप को आसानी से मिल जाएंगे। यहाँ पर पहुंचने के लिए आप को सब से बढ़िया और सस्ता मेट्रो का ही सफर पड़ेगा।


सफ़दरजंग का मकबरा (Safdarganj Makbara)  

सफ़दरजंग का मकबरा मुग़ल प्रधान मंत्री सफ़दरजंग की याद में बनवाया गया था। सफ़दरजंग हिन्दुस्तान के अंतिम मुग़ल सम्राट बहादुर शाह जफ़र के यहाँ प्रधानमंत्री थे। यह जगह मुग़ल काल की बहुत ही अच्छी वास्तु कला को देखने के अपनी तरफ पर्यटकों आकर्षित करती रहती है। इस जगह पर उनकी क़ब्र के साथ, उनकी बेग़म की क़ब्र भी है। इस जहाज़ का शुल्क भारतीयों के लिए 10 रुपए, और विदेशी पर्यटकों के लिए 100 रुपए है।


लोटस टेम्पल (Lotus Temple)

लोटस टेम्पल कमल के फूल के आकर जैसा सफ़ेद रंग का मंदिर है। यह मंदिर बहाई मत को मानता है। बहाई मत को ईरान (Iran) के एक संत ने भारत (India) देश में फैलाया था। इस मंदिर में हर धर्म के लोग, बिना किसी रोक टोक के इस मंदिर में आ सकते है। लोटस टेम्पल में आप किसी फोटो की पूजा, यज्ञ आदि नहीं कर सकते है। यहाँ सिर्फ आप सच्चे मन से बिना किसी करम कांड के पूजा कर सकते हो। लोटस टेम्पल सुबह 9 बजे खुल कर शाम को 7 बजे बन्द होता है


इस्कॉन हरे कृष्ण मंदिर (Iskaan hare Krishan mandir)

इस्कॉन हरे कृष्ण मंदिर लोटस टेम्पल (Lotus Temple) से महज 15 मिनट की पैदल दूरी पर स्थित है। इस मंदिर के चारों तरफ बाग़ है।इस बाग़ में जा कर आप बैठ भी सकते है। इस मंदिर में हर ए कृष्णा का जाप आधुनिक रूप से बैंड के धुन पर किया जाता है। ऐसे मन्त्र का जाप सुनना, दिल में शांति पैदा करता है। यह मंदिर हफ्ते के सातों दिन खुला रहता है। इस्कॉन हरे कृष्ण मंदिर जाने के लिए आपको नेहरू प्लेस मेट्रो स्टेशन पर उतरना होगा। इस स्टेशन से सिर्फ 15 मिनट का पैदल रास्ता है।  


कालकाजी मंदिर (Kalkaji mandir)

कालकाजी मंदिर को मनोकामना सिद्ध पीठ ले नाम से भी जाना जाता है। यह भारत (India) के सब से व्यस्त मंदिरों में से एक है। यहाँ पर भक्त दूर दूर से अपनी मनोकामना पूरी करवाने के लिए आते है। नवरात्रि के दिनों में यहाँ पर अत्यधिक भीड़ होती है। इस मंदिर को बहुत ही भव्य तरीके से सजाया जाता है। कालका जी नाम से मेट्रो स्टेशन भी बनाया गया है। जहाँ से इस मंदिर की दूरी करीब 5 मिनट की पैदल यात्रा है। विदेशी पर्यटक भी यहाँ पर बहुत आते है।



लोधी गार्डन (Lodhi Garden) 

लोधी गार्डन मुग़लों के समय का बना एक बाग़ है। यह सफ़दरजंग (Safdarganj) से करीब एक किलोमीटर की दूरी पर है। इस बाग़ में लोधी वंश के लोगो के मक़बरे बने हुए है। अंग्रेजो के समय में इस का नाम लेडी विलिंगटन पार्क (Lady Vilangtan Park) था। लोधी गार्डन में खूबसूरत फ़व्वारे, फूल, तालाब के साथ आप को जॉगिंग ट्रैक भी मिलेगा। यह पार्क आम लोगो के लिए है। इस पार्क में लोग सुबह शाम सैर करने के लिए आते है। यहाँ पर आप को आने के लिए खान मार्किट मेट्रो स्टेशन पर उतरना होगा। यहाँ से आप को पैदल जाने पर करीब 30 मिनट लगेंगे। आप ओटो या रिक्शा भी ले सकते है।



हुमायूं का मकबरा (Humayun maqbara)

हुमायूँ का मक़बरा मुग़ल काल की वास्तु कला की अनूठी मिसाल है। उस समय भारत में वास्तुकला का प्रवेश हुआ था। इस मक़बरे को हुमायूँ की बेग़म हमीदा बानो ने 1570 में बनवाया था। जब हमीदा बानो के इस दुनिया को अलविदा कहा तो इनकी भी कब्र वही बनाई गयी थी। इस मक़बरे को बालू रेत से तैयार किया गया था। जब हम इस मक़बरे में प्रवेश करते है तो, यहाँ पर एक छोटा सा संग्रहालय भी देखने को मिलता है। यह वाकई में बहुत अच्छी जगह है घूमने के लिए। हुमायूँ मक़बरे पर जाने के लिए आप को खान मार्केट और जेएलएन मेट्रो स्टेशन सब से नज़दीक पड़ेंगे। इस का भारतीयों के लिए शुल्क 30 रुपए और विदेशी पर्यटकों के लिए 500 रुपए है।


गुरुद्वारा बांग्ला साहिब (Gurudwara Bangla Sahib)

गुरुद्वारा बांग्ला साहिब का इतिहास सिखों के आठवें गुरु हरकिशन जी से संबंधित है। वास्तव में पहले यह स्थान जयपुर के महाराजा जय सिंह का बांग्ला हुआ करता था। इस बंगले में गुरु हरकिशन जी चिकन पॉक्स की बीमारी में जकड़े हुए लोगो की सेवा की थी। सभी मरीज़ो के लिए दवाईयां और लंगर का इंतज़ाम किया गया था। गुरुद्वारा बांग्ला साहिब में आप कभी भी जा कर अपनी लंगर खा सकते हो। यहाँ पर रहने के लिए सरां और कमरे आप को मिल जायेंगे। यह गुरुदवारा साहिब गोल मार्किट, नई दिल्ली में स्थित है।



कैथेड्रल चर्च (Cathedral church)

कैथेड्रल चर्च भारत (India) के सबसे सुन्दर चर्च में से एक है। इस चर्च को वायसराय चर्च भी कहा जाता है। यह चर्च राष्ट्रपति भवन (President House) के बिलकुल पास में है। राष्ट्रपति भवनऔर संसद भवन parliament House) के बनने से पहले इस इमारत को बनाया गया था। कैथेड्रल चर्च जाने के लिए आप को केंद्रीय सचिवालय मेट्रो से जाना होगा। यहाँ पर हजारों की गिनती में लोग यहाँ पर आए है।



त्रि मूर्ति भवन (Tiri murti bhawan) 

त्रि मूर्ति भवन इंडिया गेट (India Gate) से लगभग 4 किमी की दूरी पर स्थित है। इस भवन में भारत (India) के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू जी रहा करते थे। उनके घर को ही एक संग्रहालय का रूप दे दिया गया है। यहाँ पर आप को सीढ़ीनुमा बाग़ भी देखने को मिलेगा। यह रोज़ाना सुबह 10 बजे से, शाम के 5 बजे तक खुला ही रहता है।



अक्षरधाम मंदिर (Akshar Dham Mandir)

अक्षरधाम मंदिर भगवान स्वामीनारायण को समर्पित मंदिर है। यह मंदिर भारत की प्राचीन कला, संस्कृति और शिल्पकला की बहुत ही खूबसूरत छवि प्रस्तुत करता है। आप इस मंदिर में कोई भी सामान नहीं ले कर जा सकते है। यहाँ पर म्यूजिकल फाउंटेन, मूवी शो, नाव की सवारी बहुत ही मशहूर है। यह मंदिर सुबह 9.30 बजे से शाम 6.30 बजे तक ख़ुलता है। अक्षर धाम मंदिर पर जाने के लिए अक्षरधाम मेट्रो स्टेशन सब से बढ़िया साधन है। ध्यान रहे सोमवार को यह मंदिर बंद होता है।


गुरुदुवारा शीश गंज साहिब (Guruduwara Sish Ganj Sahib)

गुरुदुवारा शीश गंज साहिब पुरानी दिल्ली (Old Delhi) के चांदनी चौंक (Chandani chownk) में स्थित है। इस स्थान पर सिखों के नौवें गुरु गुरु तेग बहादुर जी ने हिन्दू धर्म को मुगलों से बचाने के लिए अपने शीश का बलिदान दिया था। उसके बाद इस स्थान पर गुरुदुवारा शीश गंज साहिब का निर्माण करवाया गया था। यहाँ पर कीर्तन हर समय चलता रहता है। इस गुरु घर में लंगर की सेवा हर समय चलती रहती है। किसी भी धर्म का प्राणी गुरु घर में जा कर लंगर का सकता है। यहाँ पर आप को आने के लिए पुरानी दिल्ली (Old Delhi) स्टेशन से उतरना होगा। वहां से पैदल 15 मिनट का रास्ता है। आप ऑटो या रिक्शा भी कर सकते है। 

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Maninder singh"mani"

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