डिब्रूगढ़ असम के पर्यटन स्थल के बारे में जानकारी विस्तार सहित


डिब्रूगढ़ असम के प्रमुख शहरों में से एक है। यहाँ पर सब से ज्यादा चाय का उत्पादन होता है। इसी के  साथ पर्यटकों के लिए भी किसी जन्नत से कम नहीं है। पर्यटक प्राकृतिक दृश्यों के नज़ारों के साथ, ट्रैकिंग, कैंपिंग का आनंद भी उठा सकते है। इस शहर को "दी सिटी ऑफ़ इंडिया" के नाम से भी जाना जाता है। डिब्रूगढ़ शहर में अंतर्देशीय हवाई अड्डा भी स्थित है। अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा असम के गुवाहाटी शहर में स्थित है। 


सैलानी भारत के किसी भी राज्य से सड़क मार्ग के द्वारा डिब्रूगढ़ जा सकते है। अपनी कार से नहीं जाना चाहते तो, बस या कैब के द्वारा भी जाया जा सकता है। पवन हंस नाम की कंपनी उत्तरी डिब्रूगढ़ में हेलीकॉप्टर की सेवा भी प्रदान करती है। डिब्रूगढ़ में रेलवे स्टेशन भी है। यह देश के सभी बड़े रेलवे स्टेशन से जुड़ा हुआ है। आइये आज हम बात करते है, डिब्रूगढ़ असम के पर्यटन स्थल (Dibrugarh Assam Tourist Place) के बारे में विस्तार सहित। 



दिहिंग नामती सतरा (Dehing Namti Satra)


सतरा डिब्रूगढ़ में धार्मिक स्थानों को कहा जाता है। यहाँ पर दिन्जोय सतरा, कोली आई थान और दिहिंग सतरा प्रमुख धार्मिक स्थल है। यह स्थल बहुत ही प्राचीन और इतिहास में रुचि रखने वाले लोगों के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है। दिहिंग नामती सतरा नाहरकाटिया क़स्बे से करीब 8 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह बहुत ही सुन्दर और भव्य धार्मिक स्थल है। 



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राइदोंगिया डॉल (Raidongia Doll)


राइदोंगिया डॉल  डिब्रूगढ़ असम (Assam) के अहोम साम्राज्य की निशानी का एक महत्त्वपूर्ण स्मारक है। यह स्मारक धिंगिया बरबरूआ सड़क के निकट कालाखोवा ज़िला के लारा मौजा में स्थित है। इस स्मारक में अहोम साम्राज्य से संबंधित 14 मूर्तियां स्थापित है। इसकी ऊँचाई 45 फुट है। कुछ विद्वानों के अनुसार स्वदेशदेव प्रमत्त सिंघा ने अपनी बहन रैडनोगिया बरुआ को उसकी शादी में दहेज के रूप में दिया था। 



बारबारुआ मैदाम (Barbarua Maidam)


बारबारुआ मैदाम एक बहुत बड़ा कब्रिस्तान है। इस कब्रिस्तान में अहोम साम्राज्य के दो बड़े अधिकारियों की कब्रों के साथ कई छोटे अधिकारियों की कब्रें बनी हुई है। यह कब्रिस्तान शहर से लगभग 14 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। सैलानियों के लिए इन कब्रों की बनावट को देखना बहुत ही अच्छा है। वैसे यहाँ पर अब सब कुछ खंडहर ही बन चुका है।



जोकाई बॉटनिकल गार्डन (Jokaai Botanical Garden)


जोकाई बॉटनिकल गार्डन प्रकृति से प्यार करने वाले लोगों के लिए अति उत्तम स्थान है। यहाँ पर कई प्रकार के फूल, पौधे और पेड़ देखने को मिलते है। सैलानियों को बहुत ही शांत माहौल देखने को मिलता है। इस बाग़ के कई पौधों से दवाइयाँ भी बनाई जाती है। पर्यटक हाथी की सैर के साथ, नौकायन भी कर सकते है। बच्चों के साथ घूमने के लिए बहुत बढ़िया स्थान है। 



नामफाके गांव (Namphake Village)


नामफाके गांव डिब्रूगढ़ (Dibrugarh) में सब से सुन्दर और आकर्षित गांव है। यह शहर से 37 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। पर्यटकों के लिए इस गांव में बौद्ध धर्म से संबंधित एक अति सुन्दर मठ है। इस मठ में बौद्ध धर्म से संबंधित लोग भगवान का सिमरन करते है। यहाँ के लोगों की बौद्ध धर्म में बहुत ज्यादा आस्था है।  इस मठ में बौद्ध भगवान महात्मा बुध की सोने की मूर्ति भी देखी जा सकती है।  



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नाहरकटिया (Naharkatia)


नाहरकटिया इस शहर का छोटा सा क़स्बा है। इस नाम के पीछे का राज बहुत ही दुखद है। कुछ लोगों के अनुसार रेलवे स्टेशन के पास में नाहर राजकुमार की हत्या अहोम कुलीन ने कर दी थी। जिसके बाद से इस स्थान को नहरकटिया के नाम से जाना जाता है। सैलानियों के घूमने के लिए इस कस्बे में नम्पहाके, गोभुरो डोलोंग और सासोनी गोजपुरिया बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान है। 



जॉयपुर रेनफॉरेस्ट (Joypur Rainforest)


जॉयपुर रेनफॉरेस्ट 108 वर्ग किलोमीटर में फैला घना जंगल पर्यटन स्थल (Tourist Place) है। यहाँ पर पूरे वर्ष बारिश होती रहती है। जिसकी वजह से इसके आसपास के प्राकृतिक दृश्य बहुत ही शानदार दिखाई देते है। इस रेनफारेस्ट में 50 से ज्यादा ऊँचाई वाले पेड़ देखने को मिलते है। ऑर्किड और होलेंग पेड़ों की लगभग 102 किस्में पायी जाती है। सेगुन, आजे, बोहोत, नाहर और सैम जैसे पेड़ आम ही देखने को मिल जाते है। 

जलंधर पंजाब के प्रमुख पर्यटन स्थल के बारे में जानकारी विस्तार सहित


जलंधर पंजाब के प्रमुख शहरों में से एक है। यह पंजाब का एक प्राचीन शहर है। प्राचीन कथाओं के अनुसार इस शहर का नाम एक राक्षस के नाम पर पड़ा। कुछ लोगों का यह भी कथन है कि "यह शहर राम पुत्र लव और कुश की राजधानी हुआ करती थी। जलंधर में कई धार्मिक और ऐतिहासिक स्थल देखने को मिलते है। यहाँ के स्वादिष्ट भोजन का स्वाद कई दिनों तक लोगों के मुंह से नहीं जाता है। आइये आज हम बात करते है, जलंधर पंजाब के पर्यटन स्थल (Jalandhar Punjab Tourist Place) के बारे में विस्तार सहित। 



इमाम नासीर दरगाह (Imam Nasir Dargah)


इमाम नासीर दरगाह 800 साल पुराने मकबरे में स्थित है। विद्वानों के विचार अनुसार यहाँ पर बाबा फरीद जी इस स्थान पर 40 दिनों के लिए रुके थे। मुसलिम धर्म में आस्था रखने वाले लोगों के लिए यह बहुत ही पवित्र स्थान है। इस दरगाह ही बनावट पर्यटकों को अपने आप अपनी तरफ आकर्षित करती है।  



हवेली जलंधर (Haveli)


हवेली जलंधर पंजाब (Punjab) की विरासत को दर्शाने वाला एक होटल है। यहाँ पर सैलानियों को लोक नृत्य, कई तरह के कारीगरों के पुतलों के साथ कठपुतली कार्यक्रम भी देखने को मिलता है। जिन्हें प्राचीन पंजाब को देखना हो, वह लोग इस हवेली में जरूर आये। यहाँ पर मिलने वाले भोजन का स्वाद बहुत ही मजेदार होता है। 



पुष्पा गुजराल विज्ञान शहर (Pushpa Gujral Science City)


भारत के पूर्व प्रधानमंत्री आई के गुजराल की माता जी के नाम पर विज्ञान पार्क का नाम पुष्पा गुजराल विज्ञान शहर रखा गया है। यह विज्ञान पार्क शहर से 15 किलोमीटर की दूरी पर कपूरथला में स्थित है। इसका क्षेत्रफल 72 एकड़ में फैला हुआ है। यह बच्चों के लिए बहुत ही अच्छा पर्यटन स्थल (Tourist Place) है।  यहाँ पर बच्चों को आदमी के विकास से लेकर कृषि, उद्योग और इंजीयरिंग के बारे में अच्छी जानकारी मिलती है। किश्ती में घूमने के लिए झील और एक डाइनासोर का मॉडल भी देखने को मिलता है।  



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देवी तालाब मंदिर (Devi Talab Mandir)


देवी तालाब मंदिर सती के मशहूर 51 शक्ति पीठों में से एक है। हिन्दू पुरातन कथाओं के अनुसार कहा जाता है कि सती की छाती का दाहिना हिस्सा इस थान पर गिरा था। यह मंदिर 200 साल पुराना है। इस मंदिर में भगवान शिव की भी एक मूर्ति स्थापित है। प्रति वर्ष इस मंदिर में हरिवल्लभ संगीत कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है। इस कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए पूरे देश से कलाकार आते है। इस मंदिर के तालाब में नवरात्र के दिनों में भक्तों की स्नान करने के लिए आती है। 



सोडल मंदिर (Sodal Temple)


कुछ विद्वानों के अनुसार सोडल बाबा ने तालाब के पास खड़ी अपनी माँ के शरारत करने की सोची। उन्होंने अपनी माँ पर ही मिट्टी के गोले बनाकर फेंकने शुरू कर दिए। जिसके बाद उनकी माँ को बहुत ज्यादा गुस्सा आ गया। जिसके बाद उनकी माँ ने उनको श्राप दे दिया। इसके बाद उन्होंने उनके श्राप को पूरा करने के लिए खुद ही तालाब में कूद गए। जिसके बाद वह कभी वापस नहीं आये। एक बार साँप के रूप में प्रकट हो कर, उन्होंने अपना संसार से जाने का भेद दिया था। 



शहीद ए आजम सरदार भगत सिंह संग्रहालय (Sheed E Azam Sardaar Bhagat Singh Museum)


शहीद ए आजम सरदार भगत सिंह संग्रहालय का उद्घाटन 23 मार्च 1981 को खटकर कालिया के पैतृक गांव में किया गया था। यह गांव जलंधर (Jalandhar) से 55 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इस संग्रहालय में उनके और कई क्रांतिकारी वीरों के बारे में दस्तावेज और उनके चित्र संभल कर रखे गए है। इस संग्रहालय में भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को फांसी देने के समय जिस क़लम से हस्ताक्षर किए, उसे भी संभल कर रखा गया है। 



सेंट मैरी कैथेड्रल गिरजा घर (Saint Mary Cathedral Church)


सेंट मैरी कैथेड्रल गिरजा घर का निर्माण वर्ष 1847 में रेव फ्रा के द्वारा किया गया था। यह गिरजा घर शहर की छावनी में मॉल रोड पर स्थित है। इसकी सुंदरता को देखकर हर एक पर्यटक मोहित हो जाता है। यहाँ पर ईसाई धर्म से जुडी चीज़ें देखने को मिलती है। यहाँ पर बहुत से फूल लगे हुए है, जो आस पास के वातावरण को सुगंधित करते है। 



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जंग ए आजादी संग्रहालय (War Memorial)


जंग ए आजादी संग्रहालय करतारपुर में स्थित है। इस संग्रहालय में आजादी की लड़ाई में हिस्सा लेने वाले स्वंत्रता सेनानियों के बारे में जानकारी और उस समय की वस्तुओं को देखने का मौका मिलता है। इसकी बनावट बहुत ही आकर्षित है। हर कोई इसे देखता ही रह जाता है। इसके अंदर जा कर एक अजब सा जोश भर जाता है। सैलानियों को आजादी से सम्बंधित एक 3 डी पिक्चर भी दिखाई जाती है। बच्चों को अपने इतिहास से वाकिफ करवाने के लिए जंग ए आजादी संग्रहालय में जरूर ले कर जाए। 



नूर महल सराय (Noor Mahal Sarai)


नूर महल सराय का निर्माण मुग़ल बेगम नूरजहां के कहने पर बादशाह शाहजहां ने करवाया था। विद्वानों  के अनुसार नूरजहां का जन्म इसी स्थान पर हुआ था। यह सराय जलंधर से 25 किलोमीटर दूर गांव नूर महल में स्थित है। काफी संख्या में लोग यहाँ पर घूमने के लिए आते है। परिवार के साथ घूमने के लिए बहुत ही अच्छा पर्यटक स्थल है। 

पटिआला पंजाब में घूमने वाले पर्यटन स्थल के बारे में जानकारी

पटिआला पंजाब के सब से प्रमुख शहरों में से एक है। पुराने समय में यह शहर एक रियासत थी। यहाँ पर सैलानियों को मुग़लकालीन और राजपूताना वास्तुकला के सुन्दर दृश्य देखने को मिलते है। इस शहर के लोग बहुत ही मिलनसार है। इसी शहर के नाम से पटिआला सलवार, पटिआला शाही पगड़ी, पटिआला पैग और पटिआला जूती बहुत ही मशहूर है। आइये आज हम बात करते है, पटिआला पंजाब के पर्यटन स्थल (Patiala Punjab Tourist Place) के बारे में विस्तार सहित। 



किला मुबारक (Kila Mubarak)


किला मुबारक की संरचना मिश्रित भवन के आधार पर की गयी है। इसकी बनावट सैलानियों को बहुत ज्यादा भाती है। इसका निर्माण सिख वास्तुकला के आधार पर किया गया है। वास्तव में यह एक ऐतिहासिक किला है, जिसके साथ एक महल जुड़ा हुआ है। महाराजा आला सिंह ने वर्ष 1764 में इसका निर्माण करवाया था। किले को दो भागों में विभाजित किया है। पहला भाग किला अंदरून और दूसरा दरबार हॉल है। दुर्ग के बाहर लगी दुकानें पर्यटकों को अपनी तरफ आकर्षित करती है। 



मोती बाग़ महल (Moti Bagh Palace)


मोती बाग़ एक ऐतिहासिक महल है। यह शहर के मोती बाग़ हिस्से में स्थित है। इस महल का निर्माण महाराजा भूपिंदर सिंह के द्वारा वर्ष 1840 में करवाया गया था। वर्ष 1920 में इस महल के परिसर का निर्माण किया गया था। महल के परिसर में 15 हॉल बने हुए है। मोती बाग़ महल की वास्तुकला राजपूताना और कांगड़ा शैली को दर्शाती है। सैलानियों के देखने के महल में बहुत सारे चित्र और पदक लगे हुए है। 



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शीश महल (Sheesh Mahal)


"पैलेस ऑफ़ मिरर" शीश महल को कहा जाता है। इसका निर्माण 1847 में महाराजा नरेंदर सिंह के द्वारा किया गया था। सैलानियों को पुराने सिक्के, चित्र, तमगे, हथियार और पांडुलिपियां देखने को मिलती है। शीश महल मोती बाग़ महल के पीछे ही बना हुआ है। महल के सामने से एक सुंदर झील बहती है। जिसके ऊपर एक बाँध बना हुआ है। इस बाँध को लक्ष्मण झूला के नाम से भी जाना जाता है। पर्यटकों के लिए सुबह 10 बजे से शाम 5 तक का समय घूमने के लिए है। 



बहादुर गढ़ किला (Qila Bahadurgarh)


बहादुर किले पटिआला पंजाब (Punjab) का निर्माण 1658 में नवाब सैफ खान ने करवाया था। इस ऐतिहासिक किले का पुनर्निर्माण  1837 में महाराजा कर्म सिंह ने करवाया था। इसका क्षेत्रफल 21 किलोमीटर में फैला हुआ है। किले के आसपास में बहुत सारी इस्लाम से जुडी इमारतें देखने को मिलती है। बहादुर गढ़ किले में एक मस्जिद और एक गुरुदुवारा साहिब भी स्थित है। वर्ष 1889 के बाद इसके मैदान में कमांडो की ट्रेनिंग दी जाती है। 



बारादरी बाग़ (Baradari Garden)


बारादरी बाग़ महाराजा राजिंदर सिंह के रहने का स्थान था। इस बाग़ में प्रवेश करने के बारह दरवाजे है।  यहाँ पर पर्यटकों को महाराजा राजिंदर सिंह की मूर्ति के साथ, ऐतिहासिक दस्तावेज देखने को मिलते है। बारादरी बाग़ में कई किस्म के फूल और पौधे देखने को मिलते है। सरकार ने इसके महल परिसर को एक हेरिटेज होटल का रूप दे दिया है। 



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बीर मोती बाग़ वन्य जीव पार्क (Beer Moti Bagh Zoo)


बीर मोती बाग़ वन्य जीव पार्क का 645 हेक्टेयर तक फैलाव है। इसकी शहर से दूरी सिर्फ 5 किलोमीटर है। राजघराने के लोगों के द्वारा इस वन्य जीव पार्क का उपयोग किया जाता था। जिन सैलानियों को प्रकृति के दृश्य और जीव जंतुओं को देखने में रुचि हो, उनके लिए बहुत अच्छी जगह है। यहाँ जंगली सूअर, चीतल, दलदली, बटेर, मैना, मोर और हिरन देखने को मिलते है। 



शाही समाधी (Shahi Samadhan) 


शाही समाधी स्थल पर पटिआला (Patiala) के संस्थापक बाबा आला सिंह जी समाधी बनी है। उनके बाद यहाँ पर कई शाही लोगों की समाधी बनाई गयी है। हेरिटेज फेस्टिवल के दौरान हेरिटेज वाक का आयोजन किया जाता है। यह वाक शाही समाधी से शुरू होकर किला मुबारक तक जाती है। इस वाक में शहर वासियों के अलावा दूसरे शहरों के लोग भी हिस्सा लेते है। 



छत्ता नानु मल्ल (Chatta Nanu Mal)


छत्ता नानु मल्ल कैपटन अमरिंदर सिंह के पुरखों के या महाराजाओं के वजीर थे। वह सड़क के ऊपरी हिस्से में बनी छत के मकान में रहते थे। उसके निवास स्थान को छत्ता नानु मल्ल के नाम से जाना जाता है। यहाँ पर वह लोगों की शिकायतें भी सुना करते थे। सरकार की लापरवाही की वजह से इसकी हालत बहुत ही ख़राब हो चुकी है। यहाँ पर कूड़े के ढेर देखने को मिलते है।



हवेली वाला मोहल्ला (Haweli Wala Moholla)


सैलानियों के देखने के लिए हवेली वाला मोहल्ला बहुत ही बढ़िया पर्यटन स्थल (Tourist Place) है। यहाँ पर बीकानेरी शैली में बानी हवेलियां देखने को मिलती है। इस मोहल्ले की गलियां बहुत संकरी है। दरवाजे और खिड़कियों पर नक्काशी की गयी है। पर्यटकों को इसी मोहल्ले में कई छोटे बड़े मंदिर भी देखने को मिलेंगे। याद रहे गलियां संकरी होने कारण भीड़ बहुत रहती है। 

बठिंडा शहर पंजाब के पर्यटन स्थल के बारे में जानकारी


बठिंडा पंजाब का एक ऐतिहासिक शहर है। इस शहर को "मालवे का दिल" भी कहा जाता है। इसका इतिहास का करीब 3000 साल पुराना है। इतिहासकार इस शहर को पंजाब का सब से पुराना शहर मानते है। कहा जाता है कि प्राचीन समय में कुषाण साम्राज्य का एक भाग था। इसका प्राचीन नाम विक्रमगढ़ था। विक्रमगढ़ नाम को जैसलमेर के भाटी राजपूत राजा ने बदलकर बठिंडा कर दिया था। 


यह शहर कई बड़े बड़े राजाओं के अधीन रह चुका है। सैलानियों को यहाँ के पर्यटन स्थल खूब लुभाते है। यहाँ की संस्कृति, मेहमान नवाज़ी की पूरी दुनिया कायल है। यह नगर छोटा जरूर है, लेकिन सुंदरता के मामले में बड़े बड़े शहरों को मात देता है। आइये आज हम बात करते है. बठिंडा पंजाब के पर्यटन स्थल (Bathinda Punjab Tourist Place) के बारे में विस्तार सहित। 



बठिंडा झील (Bathinda Lake) 


शिकारा नाव में बैठने के लिए, पंजाब (Punjab) के लोगों को कश्मीर नहीं जाना पड़ता है। बठिंडा झील में शिकारा नाव पर बैठकर झील के सुन्दर दृश्यों को देखा जा सकता है। यह पर्यटन स्थल परिवार के साथ घूमने के लिए बहुत बढ़िया है। प्रतिदिन बहुत बड़ी संख्या में पर्यटक यहाँ पर घूमने के लिए आते है। इस झील के किनारे पर आकर शरीर ताज़गी से भर जाता है। 



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किला मुबारक (Kila Mubarak)


किला मुबारक या बठिंडा किला इस नगर का प्रमुख पर्यटन स्थल है। इस किले का सम्बन्ध प्राचीन कुषाण राजवंश से है। कुछ इतिहासकारों का कहना है कि रज़िया सुलतान, जो कि पहली हिंदुस्तान की पहली महिला शासक थी। उसे इस स्थान पर हराकर बंदी बना कर रखा गया था। इतिहास में रुचि रखने वाले लोगों के लिए बहुत ही अच्छा स्थान है। पर्यटकों के लिए सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक, बिना किसी शुल्क के खुला रहता है। 



पीर हाजी रतन मजार (Peer Haji Ratan Majar)


मुसलिम धर्म में आस्था रखने वाले लोगों के लिए पीर हाजी रतन मजार बहुत ही महत्वपूर्ण है। पीर हाजी रतन मजार पर हर दिन बहुत बहुत बड़ी संख्या में भक्त चादर चढ़ाने के लिए आते है। यहाँ पर आकर लोगों की मनोकामनाएं पूरी होती है। लोगों के मन को बहुत ज्यादा शांति मिलती है। वीरवार वाले दिन इस मजार पर बहुत ज्यादा भीड़ होती है। 



बीर तालाब चिड़िया घर (Bir Talab Zoo)


बीर तालाब चिड़िया घर की स्थापना वर्ष 1978 में रेड क्रॉस सोसाइटी के द्वारा की गयी थी। इसका क्षेत्रफल 161 एकड़ में फैला हुआ है। इसको जूलॉजिकल गार्डन या मिनी चिड़िया घर भी कहा जाता है। बच्चों या परिवार के साथ घूमने के लिए बहुत ही बढ़िया जगह है। यहाँ पर कई किस्म के पक्षी और जानवर देखने को मिलते है। यहाँ पर कई प्रकार की वनस्पतियों को भी देखने का अवसर मिलता है।



लक्खी जंगल (Lakhi Forest)


लक्खी जंगल बठिंडा (Bathinda) शहर से 15 किलोमीटर की दूरी पर, मुक्तसर शहर की तरफ जाते हुए स्थित है। कुछ विद्वानों के द्वारा कहा जाता है कि इस जंगल में एक लाख से ज्यादा पेड़ होने कारण, इस का नाम सिखों के दसवें गुरु गुरु गोबिंद सिंह जी ने लक्खी जंगल रखा था। कुछ का कहना है कि यहाँ पर सिख मुगलों से बचने के लिए रहते थे। यहाँ पर एक प्राचीन गुरुदुवारा साहिब भी स्थित है। जहाँ पर सैलानी नतमस्तक होने के लिए जरूर जाते है। 



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तख़्त श्री दमदमा साहिब (Takht Shri Damdama Sahib)


सिख इतिहास में पाँच तख़्त है। इन तख्तों से सिख धर्म के हित के लिए फैसले लिए जाते है।  तख़्त श्री दमदमा साहिब पाँच तख्तों में से एक है। यहाँ पर हर दिन बहुत बड़ी संख्या में सिख अनुयायी नतमस्तक होने के लिए आते है। यहाँ का वातावरण बहुत ही भक्तिमय और शांति से भरा है। सिखों के दसवें गुरु गुरु गोबिंद सिंह जी इस स्थान पर करीब साढ़े नौ महीने रहे थे। 



रोज गार्डन (Rose Garden)


रोज गार्डन बठिंडा परिवार के साथ घूमने के लिए बढ़िया पर्यटन स्थल (Tourist Place) है। बच्चों को यह पार्क बहुत ज्यादा भाता है। यह 40000 वर्ग मीटर में फैला हुआ है। यहाँ पर कई तरह के पेड़ पौधे देखने को मिलते है। जिनमें गुलाब की सब से ज्यादा किस्में देखने को मिलती है। रोज गार्डन का वातावरण हर किसी को लुभाता है। पर्यटकों के लिए सुबह 5.30 से रात 10 बजे तक खुला रहता है।   

अमृतसर पंजाब के पर्यटन स्थल के बारे में विस्तार सहित जानकारी


अमृतसर औद्योगिक और आध्यात्मिक नज़र से पंजाब का बहुत ही महत्वपूर्ण शहर है। इस शहर में सिखों का सब से पवित्र स्थान हरमंदिर साहिब स्थित है। वाघा बॉर्डर, जलिआंवाला बाग़, दुर्गियाणा मंदिर, महाराजा रणजीत सिंह संग्रहालय और खैर उद्दीन मस्जिद सैलानियों के घूमने लिए बहुत ही बढ़िया स्थान है। 


पंजाबी लोग अपने मेहमानों की बहुत सेवा करते है। यहाँ के लोग बहुत ही खुश मिज़ाज के होते है। अमृतसर में हाथ से बनी चीज़ें, स्वादिष्ट भोजन, लोक नृत्य भागड़ा - गिद्दा हर एक पर्यटक दिल मोह लेते है। 1984 ओपरेशन ब्लू स्तर अमृतसर पंजाब के के लिए बहुत ज्यादा दुःख से भरा समय था। जिस के बारे में सोचने भर से रूह काँप उठती है। इस दुखद समय के बाद पंजाब के लोगों ने फिर से खुद को खड़ा किया। आइये आज हम बात करते है, अमृतसर पंजाब के पर्यटन स्थल (Amritsar Punjab tourist place Information) के बारे में विस्तार सहित जानकारी। 



गोल्डन टेम्पल (Golden Temple) 


गोल्डन टेम्पल सिख धर्म में बहुत ही महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है। गोल्डन टेम्पल को हरमंदिर साहिब और दरबार साहिब के नाम से जाना जाता है। सिख लोगों के अलावा और भी धर्मों के लोग इस स्थान पर नतमस्तक होने के लिए आते है। हरमंदिर साहिब की नींव गुरु अर्जुन देव जी ने मुसलिम फ़कीर हजरत साईं मियाँ मीर जी से रखवाई थी। 


दरबार साहिब का निर्माण सरोवर के बिलकुल मध्य में किया गया है। मुख्य दरबार में चारों दिशा में दरवाजे, प्रवेश करने के लिए एक ही रास्ता बनाया गया है। इसका कारण यह है कि दुनिया के किसी भी कोने से, किसी भी धर्म, जात पात के लोग, एक ही रास्ते पर चलकर इस स्थान पर सजदा करने के लिए आये। 


हरमंदिर साहिब के मुख्य दरबार पर सोने की परत वाली चादर चढ़ाई गयी है। जिसकी वजह से इस स्थान को स्वर्ण मंदिर या गोल्डन टेम्पल कहा जाता है। इस गुरुदवारा साहिब में हर समय लंगर चलता रहता है। यहाँ पर दुनिया की सब से बड़ी रसोई है। हर 40000 से 50000 के करीब लोग लंगर खाते है। लोगों को यहाँ पर आकर बहुत ज्यादा शांति मिलती है। 


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अकाल तख़्त अमृतसर (Akal Takhat, Amritsar)


अकाल तख़्त अमृतसर (Amritsar) पाँच अकाल तख्तों में सब से पहला अकाल तख़्त है। इसका निर्माण सिखों के छठे गुरु हरगोबिंद जी ने 1606 में करवाया था। इस स्थान से सिखों से जुड़े अहम फैसले लिए जाते है। इतिहास गवाह है कि इस पर कई बार हमले हुए है। इस हमलों में इसका बहुत ज्यादा नुकसान हुआ है। 1984 में ओप्रशन ब्लू स्टार के दौरान इसकी इमारत को बहुत ज्यादा नुकसान पहुँचा था। 



जलियाँवाला बाग़ (Jalian Wala Bagh)


जलियाँवाला बाग़ हरमंदिर साहिब के बहुत ही समीप है। 13 अप्रैल 1919 को वैशाखी वाले दिन अंग्रेजी अफसर ब्रिगेडियर जनरल रेजिनाल्ड एडवर्ड डायर ने निहत्थे लोगों पर गोलियां चलवाई थी। इस गोलीबारी में हजारों लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा था। जलियाँवाला बाग़ तीन और से घिरा हुआ और एक तरफ से बहुत ही संकरा रास्ता है। 


इस हत्याकांड में कई छोटे छोटे बच्चे भी मारे गए थे। इस हत्याकांड की पूरी दुनिया में निंदा हुई थी। शहीद उधम सिंह ने लंदन के कॉक्सस्टान हॉल में ब्रिगेडियर जनरल रेजिनाल्ड एडवर्ड डायर को सामने से गोली मार कर इस हत्याकांड का बदला लिया था। इसके बाद उनको गिरफ्तार कर के, फांसी की सज़ा दी गयी थी। 


यहाँ पर आज भी गोलियों के निशान देखने को मिलते है। इस बाग़ में एक कुआँ भी स्थित है। इस कुएँ में लोग अपनी जान बचाने के लिए कूदे थे। आज इस कुएं को ऊपर से बंद कर दिया गया है। जलियाँवाला बाग़ हत्याकांड की याद में एक स्मारक बनाया गया है। इस स्मारक का उद्घाटन 13 अप्रैल 1961 में डॉक्टर राजेंदर प्रसाद ने किया था। 



वाघा बॉर्डर (Wagha Border) 

 

वाघा बॉर्डर भारत और पाकिस्तान की सीमा को दर्शाने वाला पर्यटक स्थल (Tourist Place) है। इसको अटारी बॉर्डर के नाम से भी जाना जाता है। यहाँ से अमृतसर 28 किलोमीटर और लाहौर  22 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यहाँ पर लोग शाम को होने वाली परेड का लुत्फ लेने के लिए आते है। इसके दोनों और सैलानियों के बैठने के लिए जगह बनाई गयी है। यहाँ परेड पर्यटकों को रोमांच से भर देती है। 



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गुरु का महल (Guru Ka Mahal)


गुरु का महल गुरुदुवारा साहिब गोल्डन टेम्पल के बहुत ही निकट में स्थित है। इस गुरुदुवारा साहिब की स्थापना गुरु राम दास ने अपने परिवार से साथ रहने के लिए करवाया था। इस स्थान पर गुरु रामदास जी के पुत्र और सिखों के पाँचवें गुरु अर्जुन देव जी का विवाह हुआ था। सिखों के छठे गुरु हरगोबिंद सिंह  जी का विवाह और उनके पुत्र बाबा अटल राय जी और गुरु तेग बहादुर जी का जन्म यहीं पर हुआ था। 



दुर्गियाना मंदिर (Durgiana Mandir)


दुर्गियाना मंदिर लोहा गेट के निकट अमृतसर, पंजाब (Punjab) में बहुत ही सुन्दर हिन्दू तीर्थ स्थल है। इस मंदिर को लक्ष्मी नारायण मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। इसका निर्माण 20 वी सदी में किया गया था। लक्ष्मी नारायण मंदिर की बनावट हरमिंदर साहिब से थोड़ी बहुत मिलती जुलती है। यह मंदिर माता दुर्गा को समर्पित है। पंडित मदन मोहन मालवीय ने इस मंदिर की नींव रखी थी। मंदिर का मुख्य द्वार नक्काशी युक्त चाँदी की परत वाला है।  जिस के कारण इसको रजत मंदिर भी कहा जाता है।  



महाराजा रणजीत सिंह संग्रहालय (Maharaja Ranjit Singh Museum)


महाराजा रणजीत सिंह संग्रहकाय में सैलानियों को ऐतिहासिक वस्तुओं को देखने का अवसर प्राप्त होता है। इन वस्तुओं में हथियार, पांडुलिपियां, पुराने सिक्के, कवच और पेंटिंग शामिल है। यह संग्रहालय समर पैलेस का बदला हुआ रूप है। समर पैलेस को महाराजा रणजीत सिंह ने राम बाग़ में बनवाया था। समर पैलेस को जगजीवन राम जी ने एक संग्रहालय के रूप में लोगों के सामने पेश किया था। सैलानियों के घूमने के लिए समय सुबह 10 बजे से शाम पाँच बजे तक का है। यह सोमवार को बंद रहता है।   



खैर उद्दीन मस्जिद (Khair Ud Din Masjid)


खैर उद्दीन मस्जिद मुसलिम धर्म में आस्था रखने वाले लोगों के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान है। इस मस्जिद की वास्तुकला बहुत ही शानदार है। मोहम्मद खैर उद्दीन ने इसको बनवाया था। यह मस्जिद अमृतसर में हॉल बाजार में गाँधी दरवाजे के समीप में स्थित है। एक ही समय में सैकड़ों मुस्लिम भाई एक साथ नमाज अदा कर सकते है।  



पार्टिशन संग्रहालय (Partition Museum)


पार्टिशन म्यूजियम में हिंदुस्तान के बटवारे के समय में हुई घटनाओं को संयोजित कर के रखा गया है। यह लाखों लोगों की दर्द भरी दास्तान को संभाले हुए है। इसका उद्घाटन पंजाब के मुख्यमंत्री कैपटन अमरिंदर सिंह ने किया था। इस संग्रहालय में 14 गैलरी बनाई गयी है। इन गैलरियों में उस समय के अख़बार, फोटो, वीडियो, डॉक्यूमेंट्री फिल्में और लोगों की बातचीत भी शामिल है। 

गोल्डन टेम्पल या हरमंदिर साहिब अमृतसर पंजाब के बारे में विस्तार सहित जानकारी।


हरमिंदर साहिब या गोल्डन टेम्पल गुरुदवारा साहिब को सिख धर्म में बहुत ही पवित्र स्थान माना जाता है। दुनिया के कोने कोने से हर सिखों के साथ दूसरे धर्मों के लोग भी यहाँ पर नतमस्तक होने के लिए आते है। यहाँ पर आ कर हर किसी को बहुत ज्यादा शांति मिलती है। आइए आज हम बात करते है, गोल्डन टेम्पल (Golden Temple)  या हरमंदिर साहिब (Hraminder sahib) अमृतसर (Amritsar) पंजाब (Punjab) के बारे में विस्तार सहित।  



गोल्डन टेम्पल का इतिहास  (Golden Temple History)


सिखों के तीसरे गुरु गुरु अमरदास जी ने "अमृतसर" या "अमृत सरोवर" को बनाने के बारे में अपने विचार रखे थे। अमृत सरोवर को सिखों के चौथे गुरु रामदास जी और बाबा बुड्ढा जी की निगरानी में बनवाना शुरू किया। सरोवर के साथ एक नगर को बसने की योजना भी बनाई गयी। जिस के लिए जमीन गुरु राम दास जी ने जमीदारों को पूरे पैसे दे कर ले ली थी। 


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जमीदारों से जमीन लेने के बाद 1570 में नगर को बसाने का और तालाब बनाने का कार्य शुरू हुआ। यह कार्य 1577 में पूरा हुआ था। गुरु अर्जुन देव जी सिखों के पांचवें गुरु जी ने एक मुसलमान फ़कीर हजरत साईं मियाँ मीर जी से हरमंदिर साहिब की नींव रखवाई थी। गुरु जी ने दरबार साहिब का नक्शा खुद ही तैयार किया था। दरबार साहिब के निर्माण कार्य में गुरु राम दास जी, बाबा बुड्ढा जी, भाई गुरदास जी और कई बड़ी हस्तियों ने बहुत ज्यादा योगदान दिया था। 



दरबार साहिब की बनावट (Durbar Sahib Design)


हिन्दू धर्म की मर्यादा के अनुसार मंदिर की जमीन की ऊँचा रखा जाता है। गुरु अर्जुन देव जी ने दरबार साहिब को जमीन की निचली सतह पर रख कर बनवाया है। यह सरोवर के बिलकुल मध्य में स्थित है। 

इसके मुख्य दरबार में चार दरवाजे और एक ही रास्ता है। इसका तात्पर्य यह है कि दुनिया की चारों दिशाओं के लोग, चाहे किसी भी धर्म के हो, किसी भी जात के, वह बिना किसी भेद भाव के इस दरबार में नतमस्तक होने के लिए आ सकते है। 


मुख्य दरबार की दीवारों पर सोने की परत वाली चादर लगी हुई है। यहाँ पर बहुत ही सुन्दर नक्काशी भी की गयी है। चार दरवाजों को बहुत ही सुन्दर तरीकों से सजाया गया है। गोल्डन टेम्पल के किनारों पर चार गुंबद और एक मध्य में बड़ा गुंबद बना हुआ है। सोने की चादर को महाराजा रणजीत सिंह जी ने 1830 के लगभग चढ़वाया था। जिसके बाद से इसे स्वर्ण मंदिर या गोल्डन टेम्पल कहा जाने लगा।  


दरबार साहिब आने वाली संगत या भक्तों के लिए हर समय लंगर चलता रहता है। कोई भी व्यक्ति किसी भी धर्म का यहाँ पर मुफ्त में भर पेट खाना खा सकता है। हरमंदिर साहिब की रसोई को दुनिया की सब से बड़ी रसोई के रूप में जाना जाता है। यहां पर प्रति दिन 40000 से 50000 के मध्य में लोग लंगर खाते है। ऐसी मिसाल दुनिया में कहीं और या किसी दूसरे धर्म में देखने को नहीं मिलती है।  



कैसे जाए (How To Reach)


गोल्डन टेम्पल जाने के लिए अमृतसर (Amritsar) पंजाब (Punjab) में अंतर्राष्ट्रीय हवाई मार्ग भी स्थित है। यहाँ से जाने के लिए टैक्सी या ऑटो मिल जाता है। बस अड्डे से पैदल भी जाया जा सकता है, नहीं तो ऑटो या रिक्शा भी लिया जा सकता है। अमृतसर से पूरे देश के राजमार्ग जुड़े हुए है। लोग अपनी गाड़ी में भी आराम के साथ आ सकते है। यहाँ पर मुफ्त में कार पार्किंग की सुविधा भी दी जाती है। 


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बाहर से आने वाले लोगों के लिए मुफ्त में रहने के लिए कमरे भी मिल जाते है। कमरे अगर खाली ना हो तो धर्मशालाएं भी बनी हुई है। यहाँ भक्तों और सैलानियों के लिए हर प्रकार की सुविधा उपलब्ध है। दीवाली वाले दिन दरबार साहिब को बहुत ही सुन्दर तरीके से सजाया जाता है। आतिशबाजी भी बहुत बड़े स्तर पर देखने को मिलती है।  




हरमिंदर साहिब में किन बातों का ध्यान रखे (What Is Important To Keep In Mind In Harminder Sahib)


हरमिंदर साहिब में सर को ढक कर प्रवेश करें। प्रवेश करते समय किसी प्रकार का नशा न किया हो और ना ही अंदर ले कर जाए। गुरुदवारा साहिब के तालाब में तैरना बिलकुल मना है। दरबार साहिब के अंदर थूके ना। लंगर के लिए आराम से जाए और उतना ही ले जितना आप खा सके। थाली में अन्न बिलकुल भी ना छोड़े।