मंगलवार, 10 अगस्त 2021

अहमदाबाद गुजरात भारत के पर्यटन स्थल के बारे में विस्तार सहित जानकारी

अहमदाबाद (Ahmedabad) गुजरात का बहुत ही सुन्दर शहर है। यह पहले गुजरात की राजधानी हुआ करता था। इसको कर्णावती नाम से भी पहचाना जाता है। साबरमती नदी के किनारे पर बसे, इस नगर को घूमने के लिए बड़ी संख्या में सैलानी आते है। औद्योगिक और ऐतिहासिक रूप से बहुत ही शानदार नगर है।  यहाँ पर मिलने वाले व्यंजनों का स्वाद सैलानी लम्बे समय तक भूलते नहीं है। आइये आज हम बात करते है, अहमदाबाद गुजरात भारत के पर्यटन स्थल (Ahmedabad Gujarat India Tourist Places) के बारे में विस्तार सहित। 



अक्षरधाम मंदिर (Akashar Dham Temple)


अक्षरधाम मंदिर हिन्दू भगवान स्वामी नारायण को समर्पित है। इस मंदिर की स्थापना वर्ष 1992 में की गयी थी। यह मंदिर बहुत बड़े क्षेत्र में फैला हुआ है। इस मंदिर के अंदर 7 फुट ऊंची स्वामी नारायण की मूर्ति स्थित है। मंदिर की दीवारों पर नक्काशी की गयी है। इस मंदिर को गुलाबी रंग के पत्थर से बनाया गया है। जन्मआष्ट्मी का त्यौहार बड़ी धूम धाम के साथ मनाया जाता है। 



यह भी पढ़े:- पोरबंदर गुजरात के पर्यटन स्थल के बारे में जानिए विस्तार सहित


हठी सिंह जैन मंदिर (Hathi Singh Jain Temple)


हठी सिंह जैन मंदिर का निर्माण 19 सदी के दौरान हुआ था। इस मंदिर को हठी सिंह नाम के व्यापारी ने उस समय 8 लाख रुपए दे कर बनवाया था। यह जैन मंदिर जैन समुदाय के 15 वे गुरु धर्मनाथ को समर्पित है। इस मंदिर को सफ़ेद संगमरमर पत्थर से बनाया गया है। इस पर बहुत ही बारीकी से नक्काशी की गयी है। मंदिर के शिखर पर एक गुंबद और 12 स्तंभ पर बना है। 



केलिको संग्रहालय (Calico Museum)


केलिको संग्रहालय में सैलानियों को भारतीय कपड़ों के बारे में जानकारी मिलती है। कपड़े की बुनाई, सिलाई देखने को मिलती है। अलग अलग कपड़े, धागे, डिजाइन देखने को मिलते है। पूरी दुनिया में एक अनूठा संग्रहालय है। इस संग्रहालय को गौतम साराभाई और उनकी बहन जीरा साराभाई द्वारा 1949 में शुरू किया गया था। मुग़ल काल के समय के कपड़े देखने को भी मिलते है। सैलानियों के लिए एक पुस्तकालय भी है। 



चंदोला झील (Chandola Lake)


चंदोला झील का निर्माण मुगल बादशाह अहमदाबाद ताज खान नारी अली की बेगम के द्वारा करवाया गया था। इसी कारण यह एक ऐतिहासिक झील भी कही जा सकती है। चंदोला झील 1200 हेक्टर में फैली हुई है। इसके पानी को खेती और कारखानों में प्रयोग किया जाता है। पर्यटकों को कई किस्म के पक्षी देखने को मिलते है। यहाँ का वातावरण बहुत ही शांत और सुहावना है। बच्चों को यह जगह बहुत पसंद आती है।



अहमद शाह मस्जिद (Ahmad Shah Masjid)


अहमद शाह मस्जिद का निर्माण 1414 ई वी पूर्व में हुआ था। अहमदाबाद शहर की सब से पुरानी मस्जिदों में से एक है। सुलतान अहमदशाह ने इस शहर को बसाया था। उन्हीं के नाम पर इस मस्जिद का नाम रखा गया है। भद्रा किले किले की दक्षिण पश्चिम दिशा में यह मस्जिद स्थापित है। काले और सफ़ेद संगमरमर पत्थर से इस मस्जिद को बनाया गया है। मस्जिद में बहुत सुन्दर मीनाकारी देखने को मिलती है। 



जामा मस्जिद (Jama Masjid)


अहमद शाह ने 1423 में जामा मस्जिद का निर्माण करवाया था। इंडो- अरबी वास्तुकला का बहुत ही सुन्दर मिश्रण देखने को मिलता है। इसकी चारों दिशाओं में दरवाजे स्थित है। यह पिले बलुआ पत्थर से बनाई गयी है। मेहराब (पूजा स्थल) में 260 स्तंभ बने हुए है। अभी भाषा में आयतें खुदी हुई है। सैलानियों को जामा मस्जिद में जैन मंदिर की भांति कुछ गुंबद और हिन्दू मंदिर में लटकी घंटी की नक्काशी दिखाई देगी। 



यह भी पढ़े:- गुजरात में घूमने वाली जगह के बारे में जानिए


सरखेज रोज़ा (Sarkhej Roza)


वास्तुकला की अनूठी मिसाल सरखेज रोज़ा है। सरखेज रोज़ा में पीर अहमद खाटु गंज बख्श, महमूद शाह बेगड़ा, उसकी बेगम का मकबरा, महल के साथ एक मस्जिद भी एक साथ स्थित हैं। यहाँ पर एक जल कुंड भी बना हुआ है। इस जल कुंड की बहुत ज्यादा गहराई बताई जाती है। वस्तुकला का बहुत अच्छा उदाहरण है। इतिहास में रुचि रखने वाले लोगों के लिए बहुत अच्छा स्थान है। 



झूलती मीनार (Jhulta Minar)


झूलती मीनार न सिर्फ भारत के बल्कि दुनिया के वैज्ञानिकों के लिए खोज का विषय है। यह दो मीनार है। एक मीनार को हिलाने पर दूसरी खुद ब खुद हिलने लगती है। जबकि दोनों मीनारों को जोड़ने वाला गलियार स्थिर रहता है। इसका निर्माण सुलतान अहमद शाह के नौकर के द्वारा करवाया गया था। दोनों में से एक मीनार तीन मंजिला है। इस मीनार पर बहुत ही सुन्दर नक्काशी की गयी है। 



दादा हरीर वाव (Dada Harir Vav)


दादा हरीर वाव एक ऐतिहासिक कुआँ है। इतिहासकारों के अनुसार इस कुएं का निर्माण महमूद शाह के शासन काल में किया गया था। यह बात संस्कृत में लिखे शिलालेखों से सिद्ध होती है। या कुआँ सोलंकी वास्तुकला में बना है। इसको बनाने के लिए बलुआ पत्थर का इस्तेमाल किया गया है। इस देखने का सही समय दोपहर का है। जब प्रकाश नीचे तक जाता है। विदेशी सैलानी भी इस वाव को देखने के लिए आते है।



लोथल (Lothal)


लोथल में हड़प्पा संस्कृति के निशान देखने को मिलते है। द्रविड़ काल से इसका सम्बन्ध होने के निशान मिले है। इस स्थान पर एक संग्रहालय भी स्थित है। जहाँ पर कुछ ऐसे अवशेष देखने को मिलते है, जिनका सम्बन्ध 4500 वर्ष पुराना है। 16 वी सदी तक यहाँ पर लोगों ने खूब विकास किया। जैसे जैसे समय बीतने लगा, सब कुछ खत्म होने लगा। पुरातत्व विभाग इस के ऊपर लगातार खोज कर रहा है। इतिहास में रुचि रखने वाले पर्यटकों को जरूर आना चाहिए।   



साबरमती गाँधी आश्रम (Sabarmati Gandhi Ashram) 


आजादी की लड़ाई में साबरमती गाँधी आश्रम का मुख्य स्थान रहा है। इसे सत्याग्रह आश्रम के नाम से भी जाना जाता है। साबरमती नदी के किनारे पर बने होने के कारण इसका नाम साबरमती पड़ा। गाँधी जी ने इस स्थान से डंडी मार्च शुरू किया था। यही पर एक पुस्तकालय है। यह पुस्तकालय स्वतंत्रता  संग्राम और महात्मा गाँधी जी के जीवन पर बखूबी रोशनी डालता है।  



कांकरिया झील (Kankaria Lake)


ऐतिहासिक कांकरिया झील मानव के द्वारा बनाई गयी है। यह झील 34 दिशाओं में बहती है। झील के बिलकुल मध्य में एक मानव निर्मित टापू बना हुआ है। इस टापू का नाम नागिनवाड़ी है। इस झील का निर्माण सुलतान कुतुबद्दीन अहमद शाह द्वितीय ने अपनी देख रेख में करवाया था। कुछ विद्वानों के अनुसार झील में ज्यादा चुना पत्थर होने के कारण, इसका नाम कांकरिया झील पड़ा। बच्चों के खेलने के लिए कई तरह के खेल, तीव्र गति से चली वाली रेल झूला, संग्रहालय और चिड़िया घर स्थित है। 



अडालज वाव (Adalaj Vav)


वाघेला राजा वीर सिंह की याद में उनकी पत्नी रानी रुद्रदेवी ने अडालज वाव का निर्माण करवाया था। पानी की किल्लत को दूर करने के इस वाव का निर्माण करवाया गया। इस वाव तक पहुंचने के लिए तीन रास्ते है। यह 16 स्तंभ पर टिका हुआ है। यह इंडो-इस्लामिक वास्तुकला का बहुत ही सुन्दर उदाहरण है। यहाँ का पानी हर मौसम में ठंडा ही रहता है। 



मोढेरा (Modhera Sun Temple) 


मोढेरा सूर्य भगवान को समर्पित एक मंदिर है। यह मंदिर शहर से 101 किलोमीटर दूर मोढेरा गांव में स्थित है। इस मंदिर को यूनेस्को ने ऐतिहासिक धरोहर में शामिल कर लिया है। इस मंदिर को प्राचीन वास्तुकला के आधार पर बनाया गया है। हिन्दू देवी देवताओं की कई प्राचीन मूर्तियां देखने को मिलती है। पुरातत्व विभाग इस मंदिर की देख रेख कर रहा है। 


कैसे जाए (How Reach) 


अहमदाबाद (Ahmedabad) सारे देश के साथ जुड़ा है। सैलानी रेल, सड़क या हवाई सफर से भी आ सकते है। पर्यटक यहाँ की पाव भाजी, पानी पूरी, बासुंदी, पूरनपोली खाना कभी ना भूले। हर गुजरती खाने में हल्का सा मीठा जरूर डाला जाता है। सैलानी यहाँ पर ना शराब पी सकते है, ना कोई बेच ही सकता है। सर्दियों के दिनों में घूमना सब से बेहतर है। आप सभी का दिल से स्वागत है।

सोमवार, 9 अगस्त 2021

पोरबंदर गुजरात के पर्यटन स्थल के बारे में जानिए विस्तार सहित

पोरबंदर (Porbander) गुजरात के प्रमुख नगरों में से एक है। ऐतिहासिक इमारतें, हर साल होने वाले उत्सव, जंगल, समुंदरी तट और धार्मिक स्थल सैलानियों की बड़ी बड़ी संख्या को अपनी तरफ आकर्षित करते है। गुजरात के इस शहर का इतिहास हड़प्पा के समय का है। इस स्थान पर हड़प्पा के समय के बहुत बड़ी संख्या में अवशेष मिले है। पुरातत्व विभाग इस पर खोज कर रहा है।


कुछ विद्वानों का कहना है कि हिन्दू भगवान श्री कृष्ण के पक्के दोस्त सुदामा की जन्म स्थली भी यही है। महात्मा गाँधी की जन्म स्थली होने कारण इसका महत्व और भी बढ़ गया। गुजरती लोग बहुत ही मिलनसार होते है। अपने मेहमानों का खास ख्याल रखते है। आइये आज हम बाते करते है, पोरबंदर गुजरात भारत के पर्यटन स्थल (Porbander Gujrat India Tourist Spot) के बारे में विस्तार सहित। 



विलिंगडन मरीना समुद्री तट (Willingdon Marina Beach)


विलिंगडन मरीना समुद्री तट को पोरबंदर समुद्री तट के नाम से भी जाना जाता है। इस तट पर उठने वाली लहरें हर किसी के मन को भाती है। सैलानियों के लिए नौका विहार, मछली पकड़ने की सुविधा है। यहाँ पर स्थित चौपाटी पर बहुत ही लजीज खाने को मिलता है। पर्यटकों को इसका वातावरण बहुत ही पसंद आता है। सूर्यास्त  और सूर्योदय का दृश्य बहुत ही सुन्दर दिखाई देता है। 



यह भी पढ़े:- गुजरात में घूमने वाली जगह के बारे में जानकारी 


कीर्ति मंदिर (Kirti Temple)


कीर्ति मंदिर महात्मा गाँधी को समर्पित स्थान है। यह एक तीन मंजिला इमारत है। जिसमें गाँधी जी से संबंधित चीजें देखने को मिलती है। इस इमारत को उनके घर जैसा बनाया गया है। लोगों का कहना है कि कीर्ति मंदिर वाली जगह गाँधी जी के पूर्वजों की थी। एक व्यापारी इस जगह को खरीद कर, इस मंदिर का निर्माण करवाया। इसकी दीवारों पर महात्मा जी के जीवन से संबंधित चित्र देखने को मिलते है।  




पक्षी अभयारण्य (Birds Sanctuary)


हर साल बहुत बड़ी संख्या में प्रवासी पक्षी पोरबंदर के पक्षी अभयारण्य में आते है। सैलानियों के लिए अलग अलग क़िस्म के पक्षियों को देखना बहुत ही आनंददायक होता है। यह अभयारण्य सिर्फ एक वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। पक्षियों का यह पार्क एक छोटी सी झील के पास में स्थित है। बच्चों को इस स्थान पर जरूर ले कर आये। यह वाकई बहुत मनोरम अनुभव है।



कृष्णा- सुदामा मंदिर (Krishna Sudama Temple)


कृष्णा-सुदामा मंदिर का निर्माण इतिहासकारों के अनुसार 20 वी सदी से पहले किया गया है। इस मंदिर की वास्तुकला देखने लायक है। इस मंदिर में सदमा जी श्रीकृष्ण के सिंहासन पर बैठे हुए है। दूसरी तरफ कृष्ण जी मूर्ति के साथ रुक्मणी की मूर्ति स्थापित है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस मंदिर में स्थित भूलभुलैया को पार करने से पाप मिट जाते है। 



श्री हरी मंदिर (Sri Hari Mandir)


हिन्दू धर्म या आध्यात्मिक ज्ञान में रुचि रखने वाले लोगों के लिए श्री हरी मंदिर बहुत अच्छा स्थान है। इस मंदिर का निर्माण 20 वी सदी के करीब हुआ है। मंदिर के अंदर 65 स्तंभ स्थित है। इसकी ऊँचाई 105 फुट है। सैलानियों के दर्शन के लिए श्री जंकी वल्लभ, हनुमान जी, राधा कृष्ण जी के साथ गणेश जी की मूर्ति भी स्थित है। पर्यटकों और भक्त इस मंदिर की खूबसूरती को देख कर अत्यंत खुश हो जाते है। 



बर्दा पहाड़ी वन्यजीव उद्यान (Barda Hils Park)


पोरबंदर (Porbander) शहर से करीब 15 किलोमीटर की दूरी पर बर्दा पहाड़ी वन्यजीव उद्यान स्थित है। पोरबंदर और जामनगर में इस उद्यान को विभाजित किया गया है। सैलानी ट्रैकिंग के मजे के साथ कई किस्म के जानवरों को देख सकते है। प्रकृति के प्रेमी सैलानियों के अच्छा स्थान है। शेर, गिरगिट, सांभर, तेंदुआ, भेड़िये के साथ मगरमच्छ भी देखने को मिलते है। 



भारत मंदिर (Bharat Temple)


भारत मंदिर में सारे देश की कलाकृतियों को संजो कर रखा गया है। मुख्य रूप से हिन्दू धर्म के प्राचीन अवतारों की मूर्तियों को स्थापित किया गया है। सैलानियों को सारा देश एक ही स्थान पर देखने को मिलता है। बच्चों को इस स्थान पर विशेष रूप से ले कर आये। ताकि उनको भी भारत देश की अलग अलग संस्कृति का पता चल सके। काफी संख्या में लोग इस मंदिर में घूमने के लिए आते है।



भूतनाथ मंदिर (Bhoothnath Temple)


भूतनाथ मंदिर हिन्दू भगवान शिव जी को समर्पित है। मंदिर के आस पास का वातावरण बहुत ही शांत है। यहाँ पर भक्तों और सैलानियों को आनंद की प्राप्ति होती है। हर साल शिवरात्रि वाले दिन इस मंदिर में बहुत ज्यादा भीड़ देखने को मिलती है। वैसे भी इस मंदिर में रोजाना काफी भीड़ होती है। यह मंदिर 24 घंटे खुला रहता है। इसके साथ एक छोटा सा बाजार भी स्थित है।



घुमली (Ghumli)


इतिहासकारों के अनुसार 12 सदी के आस पास पहले सैंधव और फिर सौराष्ट्र के जेठवा शासन में घुमली राजधानी थी। सैलानियों को इस स्थान पर कई ऐतिहासिक मंदिर और स्मारक देखने को मिलते है। इस समय यह स्थान पुरातत्व विभाग के पास में है। नवलखा और आशा पूरी मंदिर हर किसी को अपनी तरफ आकर्षित करते है।  



हजूर महल (Hazur Palace)


हजूर महल एक ऐतिहासिक इमारत है। इसका निर्माण नटवर सिंह के द्वारा करवाया गया था। महल की छत को लकड़ी से बनाया गया है। इसे रेलिंग के द्वारा जोड़ा गया है।  हजूर महल के कई हिस्से घुमावदार बनाये गए है। इस के फव्वारे, स्तंभ और इसको वास्तुकला देखने लायक है। हजूर महल से रात के दृश्य बहुत ही सुन्दर दिखाई देते है। सैलानियों को रात में यहाँ पर जरूर रुकना चाहिए।



बिल्लेश्वर मंदिर (Baleshwar Temple)  


बिल्लेश्वर मंदिर एक शिव मंदिर है। यह मंदिर बिलेश्वर नदी के किनारे पर स्थित है। गुजरती शैली में बने इस मंदिर की सुंदरता का बखान करना मुश्किल है। हर समय इस मंदिर में घी के दीये जलते रहते है। इस समय यह मंदिर पुरातत्व विभाग की देख रेख में है। शिवरात्रि और अमावस के दिन बहुत ज्यादा भक्तों की भीड़ देखने को मिलती है।  



यह भी पढ़े:-  प्रयागराज उत्तर प्रदेश भारत के पर्यटन स्थल के बारे में विस्तार सहित जानकारी 


दरिया राजमहल (Daria Rajmahal)


ऐतिहासिक दरिया राजमहल का निर्माण 19 वी सदी के दौरान महाराजा भव सिंह के द्वारा करवाया गया था। गॉथिक, इतावली और अरबी वास्तुकला के अनुसार इस राजमहल का निर्माण हुआ है। दरिया राजमहल में चित्र, कलाकृतियां और उस समय का सामान देखने को मिलता है। वर्तमान समय में इस महल को एक मेडिकल कॉलेज में बदल दिया गया है। 



कैसे जाए (How Reach)


सैलानी हवाई मार्ग, सड़क और रेल के द्वारा पोरबंदर जा सकते है। गुजराती खाने के साथ पंजाबी और चीनी खाने का स्वाद भी देखने को मिलता है। गुजराती खाने में घेवर, ढोकला, खंडवी, थेपला आदि प्रमुख है। यात्रा करने के लिए जुलाई से मार्च तक सही समय है। गर्मियों के दिनों में बहुत ज्यादा गर्मी होती है। ऐसी गर्मी में बच्चों के साथ घूमना बहुत मुश्किल होता है।  

शनिवार, 7 अगस्त 2021

प्रयागराज उत्तर प्रदेश भारत के पर्यटन स्थल के बारे में विस्तार सहित जानकारी

इलाहबाद (Allahabaad) को अब प्रयागराज (Paryaagraj) के नाम से जाना जाता है। हिन्दू धर्म में इस शहर का प्रमुख स्थान है। ऐतिहासिक इमारतों के साथ बहुत बड़ी संख्या में, धार्मिक स्थल भी देखने को मिलते है। प्रयागराज उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहरों में से एक है। गंगा, यमुना और सरस्वती का संगम इसी शहर में देखने को मिलता है।  यहाँ का माहौल बहुत ज्यादा धार्मिक है। आइये आज हम बात करते है, प्रयागराज उत्तर प्रदेश भारत के पर्यटन स्थल (Paryaagraj Allahabaad Uttar Pradesh India Tourist Spot) के बारे में विस्तार सहित।  



त्रिवेणी संगम स्थल (Triveni Sangam Site)


पुरातन कथाओं के अनुसार इसी स्थान पर गंगा, यमुना और सरस्वती नदी का संगम हुआ था। जिसके बाद इसका नाम त्रिवेणी संगम स्थल पड़ गया। यहाँ पर सरस्वती नदी दिखाई नहीं देती है। मकर संक्रांति या कुम्भ के दिनों में बहुत ज्यादा भीड़ देखने को मिलती है। नाव में बैठकर भी इस स्थल पर पहुँचा जा सकता है। यहाँ पर होने वाली गंगा आरती दुनिया भर में प्रसिद्ध है।



प्रयागराज किला (Prayagraj Fort)


प्रयागराज किला ऐतिहासिक धरोहर है। इस किले का निर्माण मुग़ल बादशाह अकबर ने करवाया था। पुरातन विभाग के द्वारा इसका सही से ख्याल नहीं रखा गया। जिस के कारण खंडर में बदल गया है। इसके बहुत बड़े हिस्से को बंद कर दिया गया है। सैलानी कुछ हिस्से को ही देख सकते है। पाताल पूरी मंदिर और अक्षय वट को भी देखा जा सकता है।   



मनकामनेश्वर मंदिर (Mankameshwar Temple)


मनकामनेस्वर मंदिर हिन्दू भगवान शिव जी को समर्पित है। इस मंदिर में शिव लिंग स्थित है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस मंदिर में  मांगी गयी हर मनोकामना पूर्ण होती है। यह मंदिर प्रयाग राज किले के ठीक पीछे है। मंदिर के साथ में यमुना घाट भी स्थित है। लोग वहां पर स्नान कर सकते है। सारा दिन भक्तों कि भीड़ इस मंदिर में रहती है। 



हनुमान मंदिर (Hanuman's Temple)


इस हनुमान मंदिर में लेटी हुई, हनुमान जी की मूर्ति है। ऐसा लगता है कि मानो वह आराम कर रहे हो। यह मंदिर त्रिवेणी संगम स्थल के निकट है। उनकी मूर्ति को अच्छे से सजाया गया है। इस मंदिर का इतिहास बहुत पुराना है। यह मूर्ति जमीन से 6 या 7 फुट नीचे है। प्रतिदिन बहुत बड़ी संख्या में हनुमान भक्त मंदिर में दर्शन के लिए आते है। बारिश के दिनों में कई बार इस मंदिर के अंदर पानी भी प्रवेश कर जाता है।  



चंदरशेखर आजाद पार्क (Chandrashekhar Azad Park)


चंदर शेखर आजाद की अंग्रेजों के साथ इसी पार्क में मुठभेड़ हुई थी। उन्होंने कहा था मैं आजाद था, आजाद हूँ आजाद ही रहूँगा। इसी बात को पूरा करने के लिए आखिरी गोली खुद को मार कर शहीद हो गए। पार्क में कई तरह के पौधे, फूल और लाइब्रेरी देखने को मिलती है। बच्चों को इस स्थान पर जरूर ले कर आये। इस से उन्हें अपने इतिहास का पता चलता है। 



यह भी पढ़े :- हरिद्वार उत्तराखंड में घूमने वाले स्थानों के बारे में विस्तार सहित जानकारी


आदि विमान मंडपम मंदिर (Adi Vimana Mandapam Temple)


आदि विमान मंडपम मंदिर एक तीन मंजिला मंदिर है। हिन्दू भगवान शिव जी को समर्पित है। मंदिर की तीसरी मंज़िल पर एक शिव लिंग में कई छोटे छोटे शिव लिंगों को बनाया गया है। सैलानियों को मंदिर में की गयी नक्काशी बहुत ज्यादा पसंद आती है। महाशिवरात्रि वाले दिन इस मंदिर में बहुत ज्यादा भीड़ देखने को मिलती है। इस मंदिर के साथ में एक बाजार भी है।



पातालपुरी मंदिर (Patalpuri Temple)


पातालपुरी मंदिर को जमीन के नीचे बनाया गया है। यह मंदिर प्रयागराज किले के अंदर स्थित है। हिन्दू देवी देवताओं की बहुत सारी मूर्तियां देखने को मिलती है। यह मंदिर यमुना नदी के किनारे पर बहुत ही सुन्दर बना हुआ है। एक सुरंग के रास्ते इस मंदिर में प्रवेश किया जाता है। फिर उसी सुरंग के दूसरे हिस्से से बाहर आया जाता है। कई लोगों का कहना है कि यहाँ के कुछ लोगों के द्वारा ज्यादा दान माँगा जाता है। याद रहे आप दान अपने सामर्थ्य के हिसाब से दे। 



अक्षय वट (Akshaywat Tempale)


अक्षय वट एक प्राचीन बरगद का वृक्ष है। विद्वानों के अनुसार इस पेड़ का सम्बन्ध तीनों युगों से है। यह भी प्रयागराज (Paryaagraj) किले में स्थित है। इस पेड़ के नीचे हिन्दू भगवान श्री कृष्ण की मूर्ति को स्थापित किया गया है। यह मूर्ति अत्यंत मनमोहक है। पेड़ ने निचले नीचे में संगमरमर का पत्थर लगा हुआ है। इस पेड़ को अमर कहा जाता है। लोग हर दिन यहाँ पर पूजा के लिए आते है।



समुद्रकूप स्थल (Samudra Koop Tirtha)


समुद्र कूप स्थल पर एक प्राचीन कुआँ स्थित है। इस कुंए की गहराई समुद्र तल के बराबर बताई जाती है । कुछ लोगों ने इसकी गहराई को मापने की कोशिश भी की लेकिन सफलता नहीं मिली। स्थानीय लोगों के अनुसार इस कुंए में पानी समुद्र से आता है। जिसकी वजह से इसका पानी ना कम ही हुआ और ना ही पानी में कोई बदलाव आया। कुम्भ मेले के दौरान बहुत बड़ी संख्या में लोग इस कुंए को देखने के लिए आते है। 



नागवासुकी मंदिर (Nagvasuki Temple)


नागवासुकी मंदिर दारागंज इलाके में स्थित है। यह एक प्राचीन नाग देवता को समर्पित मंदिर है। गंगा किनारे बने इस मंदिर में हर दिन बहुत बड़ी संख्या में भक्त दर्शन के लिए आते है। मंदिर के गर्भ गृह में स्थित नाग मूर्ति को 10 वी सदी का बताया जाता है। महाशिवरात्रि वाले दिन इस मंदिर में बहुत भीड़ देखने को मिलती है। भक्तों की सभी मनोकामना पूरी होती है।



स्वराज भवन संग्रहालय (Swaraj Bhawan)


स्वराज भवन भारत देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरु जी का पुश्तैनी घर है। इस भवन में उनके समय की वस्तुओं को संभाल कर रखा गया है। सैलानियों को नेहरु जी से संबंधित कई बातों का पता चलता है। यहाँ पर एक छोटा सा पार्क भी है। जिसमें कई तरह के फूल देखने को मिलते है। स्वराज भवन में बच्चों को जरूर ले कर आये। इस से उन्हें इतिहास की जानकारी मिलती है।



जवाहर तारामंडल (Jawahar Planetarium)


जवाहर तारामंडल में सौर मंडल के बारे में जानकारी दी जाती है। जिन लोगों या बच्चों को सौर मंडल में दिलचस्पी है, उनके लिए बहुत बढ़िया पर्यटन स्थल है। यहाँ पर लोगों को वीडियो और ऑडियो के द्वारा ग्रहों की चाल, दिशा के बारे में बताया जाता है। इसको 1979 में बनाया गया था। यह सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक खुला रहता है। 



यह भी पढ़े :- लखनऊ उत्तर प्रदेश के पर्यटक स्थल के बारे में जानकारी विस्तार सहित।  


आनंद भवन  (Anand Bhawan)


आनंद भवन का निर्माण देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरु के पिता जी मोती लाल नेहरु जी ने करवाया था। इस से पहले वह स्वराज भवन में रहते थे। जिसे बाद में अँग्रेज़ों के समय में कांग्रेस का दफ्तर बना दिया गया था। मोती लाल जी अपने पूरे परिवार के आनंद भवन में आ गए थे। इस समय इसे एक संग्रहालय का रूप दे दिया गया है। जिसमें नेहरु परिवार के बारे में जानकारी मिलती है। 



भारद्वाज बाग़ (Bharadwaj Park)


भारद्वाज बाग़ ऋषि भारद्वाज जी से संबंधित है। सैलानियों को इस बाग़ में ऋषि भारद्वाज जी की एक बड़ी मूर्ति देखने को मिलती है। यहाँ पर बहुत सारे फव्वारे देखने को मिलते है। इन फव्वारों में लाइट भी लगाई गयी है। शाम के समय रंगबिरंगी लाइट में बहुत ही सुन्दर मनोरम दृश्य दिखाई देता है। कई किस्मों के फूल इस उद्यान को सुगंधित करते है।  



हाथी उद्यान (Elephant Park)


हाथी उद्यान इलाहबाद उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) का मुख्य पर्यटन स्थल है। यहाँ पर एक विशाल हाथी की मूर्ति है। जिसके अंदर से बच्चों के फिसलने के लिए जगह बनाई गयी है। यह उद्यान बच्चों को खूब पसंद आता है। इस उद्यान के साथ में एक छोटी से झील और बहुत सारे पक्षी देखने को मिलते है। सुमित्रानंदन उद्यान के नाम से भी इस पार्क को जाना जाता है। 



इलाहबाद संग्रहालय (Allahabad Museum)


इलाहबाद (Allahabad) संग्रहालय चंदर शेखर आजाद पार्क में स्थित है। इस संग्रहालय की इमारत बहुत ही सुंदर तरीके से बनाई गयी है। पर्यटकों को आजाद जी के जीवन, स्वतंत्रता संग्राम के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी पढ़ने के लिए मिलती है। सैलानियों को प्राचीन वस्तु, मूर्तियां देखने को मिलती है। यहाँ वह बंदूक भी देखने को मिलती है, जिस से उन्होंने खुद को गोली मारी थी।



खुसरो बाग़ (Khusro Bagh)


खुसरो बाग़ एक महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल है। इस बाग़ में खुसरो, उनकी बहन और माँ की कब्र बनी हुई है। खुसरों मुग़ल बादशाह जहाँगीर के सब से बड़े पुत्र थे। इन कब्रों पर बहुत ही सुन्दर नक्काशी की गयी है। इस उद्यान में अमरूद के सब से ज्यादा पेड़ है। यहाँ पर होने वाले अमरूदों को विदेशों में भी बेचा जाता है। यह बाग़ 17 बीघे में फैला हुआ है। 



पत्थर गिरजा घर (Patthar Girjaghar)


पत्थर गिरजा घर बहुत ही सुन्दर ईसाई धर्म से संबंधित इमारत है। इस गिरजा घर का निर्माण गॉथिक शैली में किया गया है। इसको 13 वी सदी के करीब बनाया गया है। यह बहुत ही प्राचीन इमारत है। किसी भी धर्म के लोग या सैलानी इसको अंदर जा कर देख सकते है। हफ्ते के सारा दिन खुला रहता है। यह सरोजनी नायडू मार्ग पर स्थित है।  



वेणी माधव मंदिर (Veni Madhav Temple)


हिन्दू भगवान श्री कृष्ण को वेणी माधव मंदिर इलाहबाद में निर्मला मार्ग पर स्थित है। कुछ विद्वानों के अनुसार इस मंदिर वाली जगह पर बंगाल के प्रसिद्ध संत चैतन्य महाप्रभु ने अपने जीवन काफी समय गुजारा है। इस मंदिर में कृष्ण जी की अत्यंत सुन्दर मूर्ति देखने को मिलती है। मंदिर के साथ में एक छोटा सा बाजार भी है। यहाँ के बाजार से हस्तशिल्प वस्तु खरीदी जा सकती है।



मिंटो पार्क (Minto Park)


मिंटो पार्क को मदन मोहन मालवीय पार्क के नाम से भी जाना जाता है। यह बाग़ यमुना नदी के किनारे पर बना हुआ है। इस बाग़ में जाने के लिए 10 रुपए शुल्क लगता है। इस बाग़ की हरियाली को देख कर सैलानी आनंदित हो जाते है। वर्ष 1858 ईस्ट इंडिया कंपनी के लिए क्वीन विक्टोरिया का पत्र इसी पार्क में पढ़ा गया था। इस कारण इसका ऐतिहासिक महत्व ज्यादा हो जाता है। 

शुक्रवार, 6 अगस्त 2021

जोवाई जयिन्ता हिल्स मेघालय भारत के पर्यटन स्थल के बारे में जानकारी

जोवाई जिला जयिन्ता हिल्स मेघालय बहुत ही महत्वपूर्ण शहर है। इस शहर की जमीन पठारी है। मिंतदू नदी ने इसको तीन तरफ से घेरा हुआ है। समुद्र से 1380 फुट की ऊँचाई पर बसे इस नगर का वातावरण बहुत ही शुद्ध और ताजगी से भरा है। उद्योग और शिक्षण की नज़र से मेघालय का प्रमुख शहर है। हर साल बहुत बड़ी संख्या में बांग्लादेश से बच्चे पढ़ने के लिए आते है। गर्मियों के दिनों में मौसम काफी ठंडा रहता है। आइये आज हम बात करते है, जोवाई जयिन्ता हिल्स मेघालय भारत के पर्यटन स्थल (Jowai Jaintia Hills Meghalaya India Tourist Spot) के बारे में विस्तार सहित। 



सिंतु कसीअर (Syntu Ksiar)


सिंतु कसीअर सैलानियों की जोवाई में पहली पसंद है। यहाँ पर लोग अपने परिवार के साथ पिकनिक मनाना ज्यादा पसंद करते है। यह एक हरियाली से भरा क्षेत्र है। यहाँ के लोगों ने आजादी की लड़ाई में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। कीयांग नोनबोह क्रांतिकारी को यही पर फांसी की सज़ा दी गयी थी। पर्यटक एक दिन आराम से इस पर्यटन स्थल का मजा ले सकते है। स्थानीय खाने का स्वाद पर्यटक लेना कभी नहीं भूलते है। 



जान पिचर प्लांट झील (John Pitcher Plant)


जान पिचर प्लांट झील पर सैलानियों को कुछ ऐसे पौधे देखने को मिलेंगे, जो मास खाते है। इन पौधा का आकार एक घड़े की तरह होता है। ऐसे पौधे गीले और दलदली इलाके में पाए जाते है। यहाँ पर यह पौधे 50000 वर्ग फुट के करीब फैले हुए है। यह पौधे कीड़े मकोड़े खाते है। सैलानी नौकायान के आनंद के साथ फव्वारे का मजा भी ले सकते है। 



यह भी पढ़े :-  तुरा पश्चिम गारो हिल्स मेघालय के पर्यटन स्थल के बारे में विस्तार सहित जानकारी 


नर्तियांग मोनोलिथ्स स्मारक (Nartiang Monoliths Memorial)


नर्तियांग मोनोलिथ्स स्मारक 27 फुट ऊंचे 7 फुट चौड़े पत्थर के स्मारक है। यह स्मारक खासी जनजाति के नायकों को दर्शाते है। इन पत्थरों को 3,4,5 और 7 की संख्या में खड़ा किया गया। सैलानियों को यहाँ पर कई और ऐतिहासिक वस्तु देखने को मिलती है। जिनको देखने के बाद मुंह से वाह वाह अपने आप ही निकल आता है। इसी स्थान पर एक बाजार भी लगता है। 



लालोंग बाग़ (Ialong Park)


लालोंग बाग़ एक इ को पार्क है। जिसमें पर्यटकों को खास किस्म की वनस्पति देखने को मिलती है। इस बाग़ से बहुत ही सुन्दर प्रकृति के दृश्य देखने को मिलते है। पर्यटकों के लिए बाथरुम, कपड़े बदलने के लिए रूम भी बनाये गए है। यहाँ से नहर भी निकल कर जाती है। पर्यटन विभाग की तरफ से सफाई का बहुत ज्यादा ध्यान रखा गया है। 


थाडलासकें झील (Thadlaskein Lake)


थाडलासकें झील का पानी अपनी शुद्धता के लिए जाना जाता है। इसका पानी पारदर्शी है। यह बहुत ही सुन्दर दिखाई देता है। झील के आस पास का वातावरण हर किसी को आनंदित करता है। यहाँ पर पूरे साल सैलानी घूमने के लिए आते है। सैलानियों के लिए एक छोटा सा होटल है। जिसे व्यंजन बहुत ही स्वादिष्ट होते है।   




डावकी (Dawki)


डावकी को डउकी के नाम से भी जाना जाता है। यह जोवाई से करीब 57 किलोमीटर की दूरी पर स्थित एक छोटा सा गांव है। इस गांव से सड़क निकलकर बांग्लादेश में प्रवेश करती है। ट्रैकिंग के लिए अच्छी जगह है। उमंगोट नदी पानी पारदर्शी है। जिसे देखने के लिए लोग दूर दूर से आते है। डावकी के प्राकृतिक दृश्य हर किसी को बाँध लेते है। 



यह भी पढ़े :- शिलोंग मेघालय के पर्यटन स्थल के बारे में विस्तार सहित जानकारी


कैसे जाए (How Reach)


हवाई जहाज के द्वारा गुवाहाटी जाना होगा। जहाँ से कार या बस से शिलोंग होते हुए जोवाई (Jowai) पहुँचा जा सकता है। वैसे सब से करीब हवाई अड्डा उमरोई है। उमरोई से कोलकत्ता के लिए उड़ाने है। ट्रैन भी सिर्फ गुवाहाटी तक ही आती है। बस शिलोंग से लेना ही बेहतर विकल्प होगा। सर्दियों के दिनों में तापमान 4 डिग्री तक पहुंच जाता है।  

अहमदाबाद गुजरात भारत के पर्यटन स्थल के बारे में विस्तार सहित जानकारी

अहमदाबाद (Ahmedabad) गुजरात का बहुत ही सुन्दर शहर है। यह पहले गुजरात की राजधानी हुआ करता था। इसको कर्णावती नाम से भी पहचाना जाता है। साबरमती...